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20 सितम्बर, 2020|11:17|IST

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जैन धर्म के दसलक्षण महापर्व का समापन

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दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व के तहत मंगलवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा अर्चना की गई। पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर भक्तों ने व्रत रखा। इस अवसर पर जीरो रोड, कर्नलगंज, बेनीगंज, नैनी व तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा पूजन किया गया।

मोक्षकल्याण के निमित्त भक्तों ने नारियल का लड्डू अर्पित किया गया। धर्मावलंबियों ने आचार्यश्री विद्या सागर, प्रमाण सागर, सुधा सागर एवं साध्वी ज्ञानमती के ऑनलाइन सत्संग को सुना। आचार्य विपुल सागर ने कहा कि वर्तमान में व्यक्ति ब्रह्मचर्य का महत्व नहीं जानता है। संयम, सदाचार दूर होता जा रहा है। इसलिए व्यभिचार फैलता जा रहा है।उन्होंने कहा कि मन पर नियंत्रण रखकर काम वासना जागृत करने वाले निमित्तों से दूर रहना चाहिए। आचार्य भरतेश सागर ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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  • Web Title:Closing Mahaparva of the Hindu religion