Hindi NewsUttar-pradesh NewsPrayagraj NewsChhattisgarh s Aadesh Soni Sacrifices Finger for Cow Protection Movement
गोरक्षा के लिए उंगुली बलिदान करने वाले ‘एकलव्य’ की हुंकार

गोरक्षा के लिए उंगुली बलिदान करने वाले ‘एकलव्य’ की हुंकार

संक्षेप:

Prayagraj News - प्रयागराज में छत्तीसगढ़ के आदेश सोनी ने गोरक्षा के लिए अपनी एक उंगली काट दी। उन्होंने माघ मेला में ऐलान किया कि वे मार्च में दिल्ली में बड़े प्रदर्शन का आयोजन करेंगे। आदेश ने शंकराचार्य के समक्ष गोवध और गोतस्करी के खिलाफ आंदोलन चलाने का संकल्प लिया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी थी कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो बलिदान करेंगे।

Jan 18, 2026 12:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
share Share
Follow Us on

प्रयागराज। महाभारतकाल में एकलव्य ने गुरुदक्षिणा के रूप में अपना अंगूठा काटकर द्रोणाचार्य को दे दिया था। उस युग में उन्हें धनुर्विद्या सीखने की लगन थी। वर्तमान में मामला थोड़ा अलग है। गोरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के आदेश सोनी ने उंगली बलिदान कर दी थी। आदेश ने माघ मेला में ऐलान किया कि आगामी मार्च में दिल्ली में साधु-संतों के साथ मिलकर गोरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। दरअसल, माघ मेला क्षेत्र में उस समय श्रद्धालुओं और संत समाज का ध्यान आकर्षित हुआ, जब छत्तीसगढ़ के युवक आदेश सोनी गोरक्षा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर में पहुंचे।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

आदेश सोनी ने शंकराचार्य के समक्ष अपनी कटी हुई उंगुली दिखाते हुए गोवध और गोतस्करी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाने का संकल्प व्यक्त किया। शंकराचार्य ने बताया कि गोरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ के आदेश सोनी ने सरकार को चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वह अपनी एक उंगुली का बलिदान कर देंगे। शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने आदेश को ऐसा करने के लिए मना किया था, लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया। आदेश सोनी ने माघ मेला में ऐलान किया कि आगामी मार्च माह में दिल्ली में साधु-संतों के साथ मिलकर गोरक्षा को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। माघ मेला में उनकी मौजूदगी और बलिदान की कहानी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही। छत्तीसगढ़ निवासी आदेश सोनी पहले जेल में कैदियों और पुलिसकर्मियों को स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए प्रशिक्षण देते थे। इसके अलावा वह कोरियोग्राफी भी करते थे। लेकिन एक घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने गो माता को राज्य माता घोषित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को हजारों पत्र लिखे लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरकार के रवैया से हताश होकर उन्होंने अपनी एक उंगुली का बलिदान किया।