
बोले प्रयागराज : अबकी छठ पर मिट्टी-दलदल के बीच सूर्य देव की उपासना करेंगे श्रद्धालु
संक्षेप: Prayagraj News - प्रयागराज में छठ पूजा की तैयारी के दौरान संगम और बलुआ घाट पर अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं चेंजिंग रूम और शौचालय की कमी के कारण परेशान हैं। बाढ़ के बाद कीचड़ और गंदगी के बीच पूजा करना...
प्रयागराज, हिटी। लोक आस्था का महापर्व छठ 25 अक्तूबर को नहाए खाए के साथ शुरू होगा। पर्व के तीसरे दिन 27 अक्तूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा-यमुना के तटों पर आस्था का महाकुम्भ दिखेगा। चाहे संगम नोज हो या बलुआ घाट, हजारों की संख्या में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं अपने परिवार के साथ दोपहर बाद से पहुंचने लगेंगी लेकिन बुधवार को इन दोनों प्रमुख घाटों पर चारों ओर फैली अव्यवस्था देखकर लगा नहीं कि चार दिन बाद यहां होने वाले आयोजन को लेकर जिम्मेदार गंभीर हैं। संगम नोज पर जहां पुण्य की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं को अपनी गठरी-झोला लेकर दलदल से होकर गुजरना पड़ रहा था।
वहीं बलुआ घाट पर कार्तिक स्नान चलने के बावजूद हर तरफ मिट्टी का टीला ही नजर आ रहा है। संगम नोज के एक किमी के दायरे में चेजिंग रूम नहीं दिखाई दिया। एक-दो चेजिंग रूम थे लेकिन जीर्णशीर्ण हालत में। टॉयलेट की सुविधा कहीं नहीं थी। दूरदराज के क्षेत्रों से स्नान को आने वाले श्रद्धालु या तो अपने चार पहिया वाहन में कपड़े बदलने के लिए मजबूर हो रहे थे या महिलाओं के घेरे में वस्त्रों को बदलना पड़ रहा था। एक भी टॉयलेट ना होने की वजह से श्रद्धालुओं को खुले में ही शौच आदि के लिए जा रहे थे। बिजली की मुकम्मल व्यवस्था अभी नहीं की गई है, बिजली विभाग की ओर से पोल व लाइन बिछाने का कार्य इतनी धीमी गति से किया जा रहा है कि पर्व से पहले उसके पूरा होने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। साफ-सफाई ना होने की वजह से संगम नोज पर भगवान गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और फूलों के साथ पूजन सामग्रियों का अंबार लगा हुआ है। संगम नोज के बड़े दायरे में सूख चुके दलदल को समतल करने के लिए महज एक जेसीबी लगाया गया है जबकि जमीन समतल ना होने की वजह से श्रद्धालुओं का पैदल और चार पहिया से चलना दुश्वार हो गया है। संगम नोज के बाद छठ महापर्व पर सबसे ज्यादा पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बलुआघाट की बारादरी पर उमड़ती है। जहां कार्तिक मास के शुरू होते ही एक माह का कार्तिक महोत्सव भी शुरू हो चुका है। अव्यवस्था के बीच बलुआघाट बारादरी से लेकर प्रभुपाद घाट के तीन सौ मीटर के क्षेत्र में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु यमुना स्नान व दीपदान के लिए पहुंच रहे हैं। बाढ़ के पानी में इस कदर मिट्टी बहकर आई है कि अभी तक बारादारी से लेकर प्रभु पाद घाट तक बड़ा बड़ा मिट्टी का टीला बना हुआ है। टीला ऐसा है कि बारादारी के तीन स्थाई चेजिंग रूम उसी में दबे हुए हैं। जबकि दो चेजिंग रूम से मिट्टी हटाई जा चुकी है। कार्तिक मास बीते पंद्रह दिन से ज्यादा हो चुका है लेकिन बारादारी के आसपास एक भी मोबाइल टॉयलेट की सुविधा श्रद्धालुओं के लिए नहीं दिखाई दी। बहुत धीमी गति से चल रहा काम काशीराज नगर के पार्षद सतीश केसरवानी ने बताया कि पिछले वर्षों तक बाढ़ का पानी आता है लेकिन मिट्टी की टीला कार्तिक मास शुरू होने से पहले नगर निगम प्रशासन हटवा देता था। इस बार सात अक्तूबर को नगर आयुक्त सीलम सांई तेजा टीम के साथ बारादारी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने टीला को हटाने व अन्य व्यवस्था का समाधान करने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। मिट्टी-कीचड़ के बीच करनी होगी पूजा बलुआघाट पर अव्यवस्था के शिकार राजेश कुमार, अनिल श्रीवास्तव व आलोक सिंह ने बताया कि जिस तरह से एक रोबोट और एक जेसीबी से मिट्टी के टीले को समतल करने का कार्य चल रहा है। उससे लगता है कि छठ पर्व पर भी हम लोगों को मिट्टी-कीचड़ के बीच घाट पर डूबते हुए व उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आना पड़ेगा। क्योंकि मिट्टी का टीला बहुत ऊंचा है और वह समय से पूरा नहीं हो पाएगा। भोर से ही घाट पर हजारों श्रद्धालु स्नान के लिए आ रहे हैं। लाइट की पर्याप्त व्यवस्था ना होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। श्रद्धालु बचते बचाते स्नान करने को मजबूर हो रहे हैं। महापर्व की महत्वपूर्ण तिथियां 25 अक्तूबर : नहाए खाए 26 अक्तूबर : खरना 27 अक्तूबर : डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य 28 अक्तूबर : उगते हुए सूर्य को अर्घ्य -हमारी भी सुनें-- हर साल छठ पूजा संगम पर करने आती हूं। इस बार हालात बहुत खराब हैं। बाढ़ के बाद दलदल में पैर रखते ही फिसल जाते हैं। चेंजिंग रूम की कोई व्यवस्था नहीं होने से खुले में कपड़े बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।-छाया देवी छठ पूजा का मतलब स्वच्छता और पवित्रता से है। यहां घाटों की हालत देखकर मन दुखी हो रहा है। बलुआघाट बारादारी पर मिट्टी, प्लास्टिक और कचरे का ढेर लगा है। साफ-सफाई ठीक से नहीं की जा रही है, ऐसे में कैसे पूजा होगी।-पूजा गुप्ता संगम तट पर सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए परिवार के साथ आती हूं। घाट पर गंदगी, दलदल और बदबू है। सफाई तो दूर बात है कहीं-कहीं इतनी मिट्टी है कि पैर धंस जा रहा है। महिलाओं को कपड़े बदलने की कोई सुविधा नहीं दी गई।-रेखा पांडेय बलुआघाट पर बाढ़ के बाद चेंजिंग रूम मिट्टी के नीचे दब गया है। कपड़े बदलने की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन ने बस थोड़ा ऊपर से साफ कराया है, नीचे दलदल जस का तस बना हुआ है। ऐसे में पूजा करने में बहुत परेशानी होगी।-बिटोला मैं सुबह से घाट पर ही हूं, चारों ओर कीचड़ और दलदल ही है। कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम नहीं हैं, न ही पेयजल की व्यवस्था। बच्चे और बुजुर्ग दलदल में गिर रहे हैं। प्रशासन ने बस औपचारिक निरीक्षण किया।-प्रीति गुप्ता बलुआघाट पर पूजा की सामग्री लेकर नीचे उतरना मुश्किल है। छठ पर्व आस्था का प्रतीक है, लेकिन प्रशासनिक तैयारी देखकर मन दुखी हो रहा है। प्रशासन को छठ से पहले काम पूरा करा देना चाहिए नहीं तो पर्व पर बड़ी दिक्कत होगी।-रमा मिट्टी, कीचड़ और गंदगी से भरे घाटों पर खड़ा होना भी मुश्किल है। महिलाओं की निजता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। सफाईकर्मी कभी-कभी दिखते हैं लेकिन साफ-सफाई का काम अधूरा छोड़ देते हैं।-डॉ. सपना मौर्या संगम पर सफाई की स्थिति बहुत खराब है। कोई चेंजिंग रूम नहीं है। महिला पुलिस नहीं दिखी। ऐसे में महिलाओं को असुरक्षा महसूस होती है। यह त्योहार महिला व्रतधारियों का है, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।-कंचन छठ पर्व जैसे बड़े आयोजन से पहले अधिकारियों को खुद मौके पर जाकर देखना चाहिए। महिलाएं बहुत मुश्किल में हैं। संगम पर न चेंजिंग रूम हैं और न ही बैठने की जगह। हम चाहते हैं कि तुरंत सफाई अभियान चले और सुरक्षा बढ़ाई जाए।-मंगला बलुआघाट पर गंदगी और दुर्गंध है। कहीं-कहीं सड़ी मिट्टी पड़ी है। शाम को रोशनी नहीं रहती। श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में है। पर्व से पहले प्रशासन को युद्ध स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए।-काजल संगम पर कीचड़ और फूल की परत जमी हुई थी। चेंजिंग रूम की सुविधा बिल्कुल नहीं। महिलाएं गाड़ी के पीछे कपड़े बदलती दिखीं। यह स्थिति अत्यंत शर्मनाक है। सफाईकर्मी आधा काम करके चले जाते हैं।-रविंद्र पांडेय दलदल ने पूरे घाट का स्वरूप बिगड़ गया है। प्रशासन की लापरवाही साफ दिखती है। अगर सफाई नहीं हुई तो यह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। चेंजिंग रूम और शौचालय की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए।-प्रमोद पांडेय प्रशासन की कार्यशैली अभी तक खानापूर्ति जैसी हो रही है। बलुआघाट पर महिलाओं के बैठने की जगह तक नहीं है। इस बार की तैयारी अब तक की सबसे कमजोर दिख रही है। अब युद्धस्तर पर कार्य करने की जरूरत है।-विपिन लोक आस्था का पर्व भगवान सूर्यदेव को समर्पित है। अव्यवस्था देखकर मन बहुत दुखी है। दलदल, बदबू और बिजली की कमी सबसे बड़ी समस्या है। महिलाएं खुले में कपड़े बदलने को मजबूर हैं। नाम मात्र के चेंजिंग रूम बनाए गए हैं।-सुरेंद्र कुमार संगम तट पर स्नान के लिए सुबह ही आया गया था। बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी दलदल की स्थिति बनी हुई है। अब भी वहीं जमी है। श्रद्धालु दलदल में गिर रहें हैं। निगरानी किए बिना इंतजाम पूरा नहीं हो सकता।-कृष्णा मौर्या --पार्षद बोले-- हमने कई बार नगर निगम में घाट की सफाई को लेकर शिकायत की कि घाट पर मिट्टी और कीचड़ हटाया जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बच्चे और बुजुर्ग दलदल में फंस जाते हैं। घाटों पर सफाई, सुरक्षा और व्यवस्था का अभाव है। यह प्रशासन की नाकामी है। आस्था के इस पर्व पर श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलनी चाहिए।- सतीश केशरवानी, पार्षद बोले जिम्मेदार छठ पर्व को देखते हुए घाटों पर सफाई अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पर्व की तैयारियों के लिए गुरुवार को सभी विभागों के अधिकारियों को साथ लेकर निरीक्षण किया जाएगा। संगम सहित सभी प्रमुख घाटों पर जहां-जहां समस्याएं दिखाई देंगी, वहां पर संबंधित विभागों के अधिकारियों को कार्यों को पूरा कराया जाएगा। उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, महापौर

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