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प्रयागराज में मुंह और स्तन कैंसर सबसे आम, देर से जांच बनी बड़ी वजह

प्रयागराज में मुंह और स्तन कैंसर सबसे आम, देर से जांच बनी बड़ी वजह

संक्षेप:

Prayagraj News - प्रयागराज में कैंसर एक लाइलाज बीमारी है, जिसमें पुरुषों में मुंह का और महिलाओं में स्तन कैंसर आम हैं। एसआरएन अस्पताल में 70-80 प्रतिशत मरीज अंतिम अवस्था में आते हैं। शुरुआती अवस्था में इलाज करने पर बीमारी को 90 प्रतिशत नियंत्रित किया जा सकता है। अस्पताल में मुफ्त रेडियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है।

Feb 04, 2026 01:30 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज में कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। एसआरएन अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि यहां आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या मुंह के कैंसर वाले पुरुषों और स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की है। अफ़सोस की बात यह है कि 70 से 80 फीसदी मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब बीमारी आखिरी स्टेज पर होती है।

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डॉक्टरों के मुताबिक, अगर मरीज बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही अस्पताल आ जाएं, तो इलाज से बीमारी को 90 फीसदी तक कंट्रोल किया जा सकता है। मरीजों को अब इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे क्योंकि एसआरएन में जल्द ही 'ट्यूमर बोर्ड' और 'टारगेटेड थेरेपी' जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू होने जा रही हैं। टाटा कैंसर संस्थान की मदद से बायोप्सी, सर्जरी और कीमोथेरेपी जैसी सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी।

मुफ्त इलाज और लक्षणों के प्रति रहें सावधान

अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि यहां हर महीने करीब एक हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। साल 2017 से अब तक 66 हजार मरीजों का इलाज किया जा चुका है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि निजी अस्पतालों में जिस रेडियोथेरेपी का खर्च तीन से चार लाख रुपये आता है, वह एसआरएन में बिलकुल मुफ्त उपलब्ध है। इसके अलावा, कमला नेहरू अस्पताल में बच्चों की आंखों के कैंसर (रेटिनोब्लास्टोमा) का भी अब सफल इलाज हो रहा है।

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि शरीर में हो रहे बदलावों को कभी नजरअंदाज न करें। अगर कोई घाव भर न रहा हो, शरीर में कहीं गांठ हो, बेवजह खून या मवाद आए, तिल का रंग बदले, लगातार खांसी हो या खाना निगलने में दिक्कत हो, तो तुरंत जांच कराएं। मुंह के अंदर सफेद दाग भी कैंसर का संकेत हो सकता है। समय रहते इलाज ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।