
भक्ति काल शास्त्र और लोक का द्वंद नहीं बल्कि समन्वय
Prayagraj News - प्रयागराज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में डॉ. सुजीत सिंह की पुस्तक 'भारत में भक्ति' का लोकार्पण हुआ। इस कार्यक्रम में भक्ति काल पर परिचर्चा भी हुई, जिसमें विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। डॉ....
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय हिंदी विभाग में शुक्रवार को डॉ. सुजीत सिंह की पुस्तक भारत में भक्ति का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। डॉ. विनम्र सेन ने कहा कि भक्ति काल शास्त्र और लोक का द्वंद नहीं बल्कि समन्वय है। डॉ. चित्तरंजन कुमार ने कहा कि भक्ति काल की कई स्थापनाएं रूढ़ हो गई हैं। तुलसीदास ने काव्य में अवधी, ब्रज और संस्कृत का प्रयोग किया। साथ ही उन्होंने प्रबंध काव्य भी लिखा ऐसे में हजारी प्रसाद द्विवेदी का कबीर को वाणी का डिक्टेटर कहना अतिश्योक्तिपूर्ण लगता है। इस अवसर पर प्रो. लालसा यादव, भगवती सिंह, प्रो. बसंत त्रिपाठी, प्रो. भूरेलाल, डॉ. विजय रविदास, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. प्रदीप सिंह, डॉ. सरोज यादव, डॉ. अमितेश, डॉ. एकात्म देव आदि मौजूद रहे।

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