विदेशी संपत्ति छिपाने पर भारी पड़ सकता है ब्लैक मनी कानून
विदेशों में अघोषित आय और संपत्तियां रखने वालों पर शिकंजा कसने के लिए बने ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय एवं परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम-2015 के
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। विदेशों में अघोषित आय और संपत्तियां रखने वालों पर शिकंजा कसने के लिए बने ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय एवं परिसंपत्तियां) तथा कर अधिरोपण अधिनियम-2015 के प्रावधान बेहद सख्त हैं। इस कानून के तहत गलत जानकारी देने या विदेशी संपत्तियों का खुलासा न करने पर भारी जुर्माने के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह जानकारी द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की कॉमर्शियल लॉज़ एवं इकोनॉमिक एडवाइजरी समिति के अध्यक्ष सीए संजय कुमार अग्रवाल ने दी।आईसीएआई की ओर से सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित सेमिनार में उन्होंने ब्लैक मनी कानून के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि विदेशों में मौजूद आय, बैंक खाते, शेयर, अचल संपत्ति या अन्य परिसंपत्तियों की जानकारी छिपाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सेमिनार के दूसरे तकनीकी सत्र में सीए दीपेन्द्र कुमार अग्रवाल ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), आयात-निर्यात, वस्तुओं एवं सेवाओं से जुड़े विदेशी मुद्रा लेन-देन की जानकारी दी। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता सीए अजय कुमार अग्रवाल और सीए पंचम मौर्य ने की। प्रयागराज शाखा के सचिव सीए शैंकी कसैरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर शाखा अध्यक्ष सीए शुभम अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सीए अताउर रहमान, उपाध्यक्ष सीए अभिनव कोहली, पूर्व अध्यक्ष सीए सुशील कुमार शुक्ला सहित बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विद्यार्थियों और पेशेवरों ने भाग लिया।
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