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केला नहीं अकेला, पत्ते और तने से बनेगी खाद

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Fri, 23 Jul 2021 02:40 PM
केला नहीं अकेला, पत्ते और तने से बनेगी खाद

‘आम के आम गुठलियों का दाम हिन्दी का यह मुहावरा सभी ने सुना होगा। यह बात अब केले पर भी अक्षरश: लागू हो रही है। विश्व में केला का सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत अब इसके कृषि अवशेषों (केले के फल का छिलका, तना और पत्तियों) से बहुद्देशीय जैविक खाद बना सकेगा। केले के पेड़ पर मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के केमिकल ब्रांच के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष एन सावरकर के शोध में यह बात सामने आई है।

डॉ. सावरकर ने बताया कि केले के पेड़ों के कृषि अवशेषों से नाइट्रोजन और फासफोरस युक्त जैविक खाद बनाई गई है। साथ ही बायो आयल जल्द ही बना लेने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बायो केमिकल कनर्वजन का प्रयोग करके बायो केमिकल और थर्मोकेमिकल प्रक्रिया के जरिए केले के कृषि अवशेषों से खाद बनाई जा सकती है। इस प्रोजेक्ट में डॉ. सावरकर के नेतृत्व में शोध छात्र रजनीश कुमार सिंह, एमटेक छात्रा दीक्षा पांडेय और बीटेक छात्र त्रिलोक पाटिल ने भी काम किया है। यह शोध अभी हाल में इंग्लैंड के बायो रिसोर्स टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

केले के कृषि अवशेष की अधिकता

डॉ. सावरकर ने बताया कि केला एक ऐसा फलदायी पेड़ है जो पूरे जीवन काल में एक बार ही फल देता है। इसके बाद इसके पेड़ दोबारा फल नहीं देते हैं। इसमें कृषि अवशेष अधिक होता है। उन्होंने कहा कि इसके पेड़ में फल का चार गुना कृषि अवशेष मिलता है।

बायो ऑयल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

डॉ. सावरकर ने बताया कि खाद बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही बायो ऑयल तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भविष्य में इस तेल का प्रयोग पेट्रोल के साथ किया जा सकेगा।

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