हिंदी ई-लेखन की तीसरी क्रांति की दस्तक, ‘कंप्यूटर की मेधा’ बनी पहचान
Prayagraj News - इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने 'कंप्यूटर की मेधा' पुस्तक लिखी है। यह पुस्तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी भाषा के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। इसका विमोचन मार्च 2025 में हुआ था और इसकी सभी प्रतियां तेजी से बिक गईं। यह हिंदी में ई-लेखन…
आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। इसी बदलाव और तकनीकी दुनिया में हिंदी की स्थिति को समझाने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह ने कंप्यूटर की मेधा नाम से एक बेहद महत्वपूर्ण किताब लिखी है। लेखक का मानना है कि भाषा के इतिहास में यह तीसरी बड़ी क्रांति है। पहली क्रांति बोलने की थी, दूसरी लिखने की और अब टेक्स्ट और हाइपर टेक्स्ट के जरिए ई-लेखन का नया दौर शुरू हो चुका है।
इस किताब की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2025 में जेएनयू में इसके विमोचन के महज छह महीनों के भीतर ही इसकी सारी प्रतियां बिक गईं। जब 3 दिसंबर 2025 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इस पुस्तक पर चर्चा के लिए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई, तो वहां भी इसकी भारी मांग देखी गई, जिसके बाद अब इसका दूसरा संस्करण प्रकाशित करने की तैयारी की जा रही है।
प्रोफेसर सिंह बताते हैं कि इंटरनेट आज एआई का प्राण बन चुका है और इस दौर में हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बनकर उभरी है। यह किताब सिर्फ कॉलेज के छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी है। इसमें बहुत ही सरल तरीके से बताया गया है कि हम हिंदी भाषा में एआई का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, उससे संवाद कैसे स्थापित करें और नई तकनीक के जरिए कहानियां कैसे लिखें। संक्षेप में कहें तो यह पुस्तक सोशल मीडिया और तकनीक के युग में हिंदी के बदलते और निखरते स्वरूप का एक बेहतरीन दस्तावेज है।
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