
अव्यवस्था से नाराज संतों ने किया चक्काजाम, सेक्टर कार्यालय कराया बंद
Prayagraj News - प्रयागराज में माघ मेला के पहले स्नान पर्व से पहले संतों ने प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ प्रदर्शन किया। संतों ने कार्यालय का चक्का जाम कर दिया और अधिकारियों का पुतला फूंका। उनका आरोप है कि प्रशासन काम में देरी कर रहा है और संतों की सुविधाओं का ध्यान नहीं रख रहा है।
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। माघ मेला का पहला स्नान पर्व शनिवार को है पर अब तक संतों को सुविधा नहीं मिल सकी है। प्रशासनिक अफसर फोन उठा नहीं रहे हैं तो संतों के सब्र का बांध गुरुवार को टूट गया। प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज कई अखाड़ों के साधु-संत गुरुवार दोपहर बाद ओल्ड जीटी मार्ग स्थित सेक्टर छह के कार्यालय पर पहुंचे और कार्यालय का दरवाजा बंद कर वहीं चक्का जाम कर दिया। मनाने के लिए पुलिस के अफसर पहुंचे तो संतों ने उन्हें बैरंग लौटाया और मंडलायुक्त, जिलाधिकारी या मेलाधिकारी को बुलाने की मांग रखी। नाराज संतों ने मेला प्रशासन के अफसरों का पुतला भी फूंका।
पहला स्नान पर्व तीन जनवरी को है। लेकिन अभी मेला क्षेत्र में काम पूरा नहीं हो सका है। कई संस्थाओं के शिविर तक नहीं लगे हैं। प्रदर्शनकारी संतों ने आरोप लगाया कि प्रशासन सारा काम एक ही संस्था से करा रहा है, जबकि उसके पास संसाधन नहीं है। मेले की तैयारियों में जब देर हुई तो सुविधा देने वाली एजेंसियों को बढ़ाना चाहिए था और उनके ऊपर काम बांटने चाहिए थे। इसके साथ ही अफसरों पर यह भी आरोप लगाया कि पहले जमीन देने में देर की और अब सुविधा नहीं दे रहे हैं। अधिकारी एक संत के यहां जाकर रोटियां सेंक रहे हैं और दूसरे साधु-संतों को ऐसे छोड़ दिया है कि मेला से उनका कोई सरोकार नहीं है। संतों ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मेला पैंट वालों का नहीं है वो हमें देखें, हम भी पैंट वाले नहीं हैं। इसके बाद भी परेशान किया जा रहा है। इस दौरान सेक्टर छह के सेक्टर मजिस्ट्रेट हंसराज जैसवार ने वार्ता का प्रयास किया तो संत नारेबाजी करने लगे और उनसे कहा कि अव्यवस्था के लिए वो भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। प्रदर्शन करने वालों में जूना अखाड़े के थानापति अभेद्ययानंद गिरि, निरंजनी अखाड़े के गोपालानंद गिरि, आवाहन अखाड़े के महंत विनय गिरि, दिगंबर गोविंद भारती, बद्रीनाथ से महंत प्रणवदास, शृंग्वेरपुर से लवलेशानंद आदि मौजूद थे। संवादहीनता आक्रोश का बड़ा कारण प्रयागराज। संतों के आक्रोश का बड़ा कारण संवादहीनता बन गया है। दरअसल, अफसर किसी का भी फोन नहीं उठा रहे हैं। वहीं पिछले दिनों मेला प्राधिकरण कार्यालय में आत्मदाह के प्रयास के बाद लाल सड़क के सामने मेला प्रशासन का जो स्थायी कार्यालय है, वहां पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और आम नागरिकों को पुलिस प्रवेश ही नहीं करने दे रही है। ऐसी स्थिति में परेशान संतों को इस बात की नाराजगी है कि वो अपनी बात कहें तो किससे कहें। त्रिवेणी मार्ग पर प्रशासन का अस्थायी कार्यालय भी अब तक नहीं बन सका है। यही बढ़ते आक्रोश का कारण है।

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