झूठी एफआईआर पर सख्ती, अब फर्जी केस दर्ज कराने वालों पर होगी कार्रवाई
Prayagraj News - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठे मुकदमों और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि यदि एफआईआर झूठी सूचना पर दर्ज की गई तो विवेचना अधिकारी को सूचना देने वाले के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करानी होगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 60 दिनों के भीतर निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों और पुलिस का गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि अगर पुलिस जांच में यह पता चलता है कि एफआईआर झूठी सूचना के आधार पर लिखवाई गई थी, तो अब पुलिस चुप नहीं बैठ सकती। जांच अधिकारी को झूठी खबर देने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी ही होगी। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस को पता चलता है कि आरोप झूठे हैं और वह केस बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट लगा रही है, तो उसे शिकायतकर्ता के खिलाफ भी लिखित में मामला दर्ज कराना होगा।
अगर पुलिस वाले ऐसा नहीं करते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक और सभी न्यायिक अधिकारियों को 60 दिन के भीतर इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है। अब मजिस्ट्रेट भी पुलिस की ऐसी रिपोर्ट तब तक स्वीकार नहीं करेंगे जब तक कि झूठ बोलने वाले के खिलाफ शिकायत न जुड़ी हो।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने एक पति-पत्नी के विवाद की सुनवाई करते हुए दिया। मामला अलीगढ़ का था जहां एक पति ने अपनी पत्नी पर धमकाने और बदनाम करने का आरोप लगाया था। पुलिस जांच में आरोप झूठे निकले। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने इस मामले को एक बड़े अपराध की तरह सरकारी केस के रूप में चलाने का आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने गलत माना। कोर्ट ने समझाया कि कम गंभीर अपराधों (असंज्ञेय अपराध) में पुलिस की रिपोर्ट को सरकारी केस नहीं, बल्कि परिवाद यानी निजी शिकायत माना जाना चाहिए।
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