जो आदेश से पीड़ित या प्रभावित नहीं वो नहीं दे सकता चुनौती: हाईकोर्ट

Feb 15, 2026 02:53 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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Prayagraj News - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति तब तक आदेश को चुनौती नहीं दे सकता जब तक असाधारण परिस्थिति न हो। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुघर सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं है। याचिका में सरकारी दस्तावेज में बंजर भूमि को कृषि भूमि बताकर पट्टा निरस्त करने की मांग की गई थी।

जो आदेश से पीड़ित या प्रभावित नहीं वो नहीं दे सकता चुनौती:  हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि कोई व्यक्ति जो किसी आदेश से पीड़ित या प्रभावित नहीं है तो वह उसे तब तक चुनौती नहीं दे सकता, जब तक असाधारण परिस्थिति न हो। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने जमीन का पट्टा निरस्त करने की मांग में दाखिल सुघर सिंह की याचिका को खारिज करते हुए की है। कन्नौज निवासी सुघर सिंह ने याचिका के माध्यम से सरकारी दस्तावेज में बंजर भूमि के रूप में दर्ज जमीन इंद्रपाल व ममता देवी को कृषि भूमि बताकर किए गए पट्टा के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। कन्नौज तहसील में अनौगी मौजा के उम्मेदपुरवा गांव निवासी याची ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 के तहत विभिन्न धाराओं के तहत पट्टा आवंटन को चुनौती दी थी।

याची के अनुसार इंद्रपाल व ममता देवी के पास पर्याप्त भूमि है। उसका कहना था कि चार जनवरी 2014 को उनके पक्ष में किए गए पट्टे के दौरान संबंधी जमीन खाली नहीं थी, उस पर याची का कब्जा था। उसका प्लाट इसके करीब है। उसने घर बनाया है, ट्यूबवेल लगवाया है। साथ ही पेड़ भी उगाए हैं। याची ने इस तर्क के साथ कन्नौज के एडीएम फाइनेंस की अदालत में धारा 198 (4) के तहत मुकदमा किया कि आवंटन के समय प्लाट खाली नहीं था इसलिए इसे आवंटित नहीं किया जाना चाहिए। यह मुकदमा आठ अक्टूबर 2024 को खारिज कर दिया गया। इस आदेश को अतिरिक्त आयुक्त कानपुर प्रथम की कोर्ट में चुनौती दी गई, यहां भी छह अक्टूबर 2025 को इसे खारिज कर दिया गया। दोनों आदेश को इस याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि याची प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं है। साथ ही कहा कि जसभाई मोतीभाई देसाई बनाम रोशन कुमार केस (1976) में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अज्ञात व्यक्ति को तब तक अदालत आने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक कोई असाधारण परिस्थिति न हो। याची पीड़ित व्यक्ति की परिभाषा में नहीं आता इसलिए उसकी याचिका खारिज किए जाने योग्य है।हा

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