
पेंशन एरियर, ग्रेच्युटी घोटाले की पूरे प्रदेश में जांच कराने का आदेश
Prayagraj News - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में हो रहे घोटाले की जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने खासकर उन मामलों की जांच का आदेश दिया है जहां मृत पेंशनरों के नाम पर फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट के जरिए पेंशन का भुगतान हो रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी जिलों में पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में हो रहे घोटाले की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि खासकर उन मामलों की जांच की जाए जहां पेंशनर की मृत्यु हो चुकी है और अपात्र लोग फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट लगा कर उनके नाम पर पेंशन ले रहे हैं। चित्रकूट की 84 वर्षीय महिला जगुआ उर्फ जोगवा की अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दिया है। याची के खिलाफ 28,6,506 लाख रुपये पेंशन एरियर के नाम पर फर्जी तरीके से चित्रकूट ट्रेजरी से अपने खाते में भुगतान कराने और फिर रकम निकाल लेने का आरोप है।
यह रकम 7 फरवरी 2024 से 30 मई 2025 के दौरान उसके खाते में पेंशन एरियर के तौर पर जाम की गई। याची के अधिवक्ता का कहना था की याची एक 84 साल की अनपढ़ महिला है। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। किसी बिचौलिए और ट्रेजरी कर्मचारियों की मिली भगत से उसके खाते में रकम ट्रांसफर की गई। याची ने किसी भी पेंशन एरियर भुगतान के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया था। उसके गांव के एक व्यक्ति अमित मिश्रा ने याची को बताया कि उसके खाते में गलती से पैसे ट्रांसफर हो गए हैं उसकी बेटी की शादी के लिए आवश्यकता है इसलिए याची ने अमित मिश्रा को पैसे निकाल कर के दे दिए। याची ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है और ना ही उसने ट्रेजरी से अपने खाते में पैसे भेजने के लिए कोई पैरवी की थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि याची के खाते में पैसे गए हैं। जिसे उसने स्वयं निकाले हैं। वह इसकी लाभार्थी है। इसलिए या नहीं कहा जा सकता कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं थी। राज्य सरकार की ओर से यह बताने के लिए कि याची ने एरियर भुगतान के लिए कोई आवेदन किया था या नहीं समय की मांग की। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि उसकी उम्र और महिला होने के नाते उसे यह अंतरिम जमानत दी जा रही है। हालांकि कोर्ट ने इसी मामले एक अन्य आरोपी दयाराम को राहत नहीं दी है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी से यह पता चलता है की कुल 42,04,22,093 करोड़ रुपये की पब्लिक मनी का घोटाला हुआ है। यह रकम 57 पेंशनरों के खाते में भेजी गई है। इसलिए कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मामले अन्य जिलों में भी हो सकते हैं जहां पब्लिक फंड का पेंशन एरिया भुगतान के नाम पर दुरुपयोग किया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पेंशन एरियर, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट से संबंधित हुए भुगतान की सभी जिलों में जांच कराए। विशेष कर वहां जहां पेंशनर की मृत्यु हो गई है और आश्रित अहर्ता ना होने के बावजूद फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करके पेंशन ले रहे हैं। कोर्ट ने इस आदेश की एक प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है।

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