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प्रयागराज

करोड़ों की ठगी के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Wed, 26 May 2021 04:32 AM
करोड़ों की ठगी के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

प्रयागराज। विधि संवाददाता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इफको के रिटायर अधिकारी सहित कइयों से करोड़ों की ठगी के आरोपी योगेश कुमार तिवारी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने योगेश तिवारी के लंबे आपराधिक इतिहास और मामले की गम्भीरता को देखते हुए दिया है। झूंसी थाने के मामले के तथ्यों के अनुसार इफको के रिटायर अधिकारी प्रभाष चन्द्र गुप्ता ने अपने बेटों के नाम जमीन खरीदी थी, जिसे योगेश तिवारी ने बड़े प्रोजेक्ट में शामिल कराने का झांसा देकर सादे कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया और फिर जमीन पर कब्जा कर लिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि योगेश तिवारी बहुत ही शातिर है और कई अफसरों के नाम पर भी करोड़ों रुपये ठग चुका है। उसकी गिरफ्तारी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स भी लगी लेकिन सफलता नहीं मिली। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान कहा गया कि याची को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसके 45 मामलों के आपराधिक इतिहास के सम्बंध में कहा गया कि सभी मामलों में उसे झूठा फंसाया गया है। सरकारी वकील ने कहा कि याची पर आरोप है कि उसने व्यवसाय के वादे पर परिवादी से दिखावटी विक्रय विलेख निष्पादित कराया लेकिन उक्त विक्रय विलेख के आधार पर उसका नाम भूमि अभिलेख में बदल दिया गया। याची पर यह भी आरोप है कि याची एक संगठित गिरोह का सदस्य है जो कई जिलों में संचालित है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। याची ने कई निर्दोषों को धोखा दिया है और उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।

परिवादी के अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि योगेश तिवारी का 80 मामलों का आपराधिक इतिहास रहा है। उसे धोखाधड़ी, हत्या का प्रयास, सार्वजनिक भूमि हड़पने, चेक बाउंस आदि के अपराध करने की आदत है। उसके लंबे आपराधिक इतिहास से यह स्पष्ट भी है। उन्होंने यह भी कहा कि याची के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए वह अग्रिम जमानत का हकदार नहीं हैं। साथ ही केवल काल्पनिक भय के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों व परिस्थितियों और याची के लंबे आपराधिक इतिहास को देखते हुए वह अग्रिम जमानत दिए जाने का पात्र नहीं है।

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