ढाई साल से गायब वृद्धा सोशल मीडिया के सहारे अपनों से मिली

ढाई साल से गायब वृद्धा सोशल मीडिया के सहारे अपनों से मिली

संक्षेप:

Prayagraj News - दिल्ली की सुमति (70) दो साल से अधिक समय बाद अपने परिवार से मिलीं। वह नैनी के आधारशिला वृद्धाश्रम में लावारिस पाई गई थीं। उनके नाती दीपक और पत्नी ने उन्हें लेने के लिए आया और सभी की आंखें भर आईं। सुमति गलती से प्रयागराज आई थीं और मानसिक परेशानी के कारण घर का पता नहीं बता पा रही थीं।

Dec 11, 2025 11:25 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज, ईश्वर शरण शुक्ल। दिल्ली के लाजपत नगर की रहने वाली सुमति (70) बड़ी मशक्कत के बाद सोशल मीडिया की मदद से अपने परिजनों से मिल गयीं। वह ढाई साल से नैनी के आधारशिला वृद्धाश्रम में लावारिस रह रही थी। बुधवार को दिल्ली से उनके नाती दीपक और उनकी पत्नी डॉ. पूजा उन्हें लेने वृद्धाश्रम पहुंचे तो तीनों की आंखें भर आईं। शाम को वह ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गयीं। दिल्ली के एक निजी कंपनी में कार्यरत दीपक ने बताया कि उनके नाना राम अवतार का घर झारखंड के कोडरमा जिले के झंडा चौक में हैं। नाना वहीं रहते थे, जबकि नानी उनके साथ दिल्ली में रहती थीं।

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उनका कैंसर का इलाज चल रहा था जो लगभग ठीक हो गया है। जून, 2023 में वे दिल्ली से झारखंड के लिए ट्रेन से जा रही थीं और गलती से प्रयागराज चली आईं। प्रयागराज जंक्शन पर लावारिस हालत में मिलने पर पुलिस ने उन्हें आधारशिला वृद्धाश्रम पहुंचा दिया। मानसिक परेशानी के चलते वे घर का पता नहीं बता पा रही थीं। वृद्धाश्रम के हर वीडियो को बारीकी से परखा दीपक ने बताया कि छह माह पहले नैनी में हम लोग एक रिश्तेदार के यहां शादी में आए थे। यहीं पर हम लोगों से नानी के गा,यब होने की चर्चा की थी और व्हाट्सप ग्रुप पर फोटो शेयर किया था। रिश्तेदारों ने नैनी के आधारशिला वृद्धाश्रम की वेबसाइट, फेसबुक और इंटाग्राम का लिंक उनके साथ शेयर किया था। उसके बाद वृद्धाश्रम में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मौजूद लावारिस महिलाओं को मोबाइल पर व एलईडी टीवी पर कई बार देखा गया। इस बीच फोटो के मिलान होने पर वृद्धाश्रम के निदेशक शशांक गोस्वामी से संपर्क किया गया। महिला के सकुशल मिलने पर परिजनों ने वृद्धाश्रम प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। कोट समुति का परिजनों से मिलना एक सपने जैसा है। हम चाहते हैं कि यहां आने वाले हर वृद्ध को उसका घर मिले। यह सच है कि घर जैसा सुकून और अपनापन कोई वृद्धाश्रम नहीं दे सकता। बुजुर्गों का असली स्थान उनके अपने घर-परिवार के बीच ही होता है। - शशांक गोस्वामी, निदेशक, आधारशिला वृद्धाश्रम, नैनी।