प्रतीक यादव मर कर भी बेटी के हाथों पर हुए जिंदा, लाडली पद्मजा ने बनवाया फोटो वाला टैटू
मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की बेटी पद्मजा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पद्मजा अपने प्यारे पापा प्रतीक की फोटो वाला टैटू हाथों पर बनवा रही है।

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव अपने निधन के बाद भी बेटी पद्मजा के हाथों पर जिंदा हो गए हैं। पद्मजा ने अपने हाथों पर पिता की फोटो वाला टैटू बनवाया है। इसका वीडियो सोशल मीडया पर वायरल हो रहा है। आठ सेकेंड के इस वीडियो में दिल को छू लेने वाला पद्मजा का अनोखा अंदाज किसी को भी भावुक कर सकता है। वैसे तो प्रतीक के निधन के बाद पद्मजा के नटखट अंदाज और अपने पिता के लिए प्यार भरे एहसास वाले कई वीडियो सामने आए। लेकिन इस आठ सेकेंड के वीडियो में बज रहा गाना भी पद्मजा के प्रति दुलार बढ़ा रहा है। वीडियो में भले ही पद्मजा हंसती मुस्कुराती दिखाई दे रही हो लेकिन हर पल साथ रहने वाले पिता का हमेशा के लिए छोड़कर चले जाना और हाथों पर उनकी तस्वीर को बार-बार स्पर्श करना आंखें नम करने वाला है।
प्रतीक की पत्नी और पद्मजा की मां अपर्णा यादव यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष औऱ भाजपा नेत्री होने के कारण ज्यादातर कार्यक्रमों में ही व्यस्त रहती थीं। ऐसे में दोनों बेटियों को सबसे ज्यादा साथ पिता प्रतीक का ही मिलता रहा। जब अपर्णा कार्यक्रमों और दौरों पर होती थीं, प्रतीक का पूरा समय अपनी बेटियों के साथ बीतता था। बीमारी के कारण भी प्रतीक का ज्यादातर समय घर पर बीतता। ऐसे में बेटियों से ज्यादा ही लगाव और नजदीकियां लाजमी भी था।
यही कारण रहा कि प्रतीक के निधन के बाद पद्मजा अपनी मां अपर्णा के साथ कम और चाची डिंपल, चाचा अखिलेश यादव और आदित्य यादव के साथ ज्यादा घुलती मिलती नजर आई। हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के दौरान गंगा के तट पर पद्मा का आई लव यू पापा वाला कार्ड तो हर किसी की आंखें नम कर गया था। इस दौरान पद्मजा रोते हुए नजर आईं तो चाचा आदित्य उसे संभालते दिखाई दिए। प्रतीक के दाह संस्कार के दौरान गोमती किनारे श्मशान घाट पर भी पद्मजा पूरे समय चाचा अखिलेश यादव के साथ दिखाई दी।
जब प्रतीक की तस्वीर के आगे फूलों का संवारती दिखी पद्मजा
प्रतीक यादव की तेरहवीं के दिन भी बेटी पद्मजा का अलग रूप देखने को मिला था। लोग प्रतीक की तस्वीर के आगे श्रद्धा सुमन स्वरूप गुलाब की पंखुड़िया चढ़ा रहे थे। पद्मजा बिखरी पंखुड़ियों और फूलों को संभालती और संवारती दिखाई दे रही थी। वह ज्यादातर समय पिता की तस्वीर के आगे ही उन्हें बार-बार निहारती और घर आए लोगों से दुलार पाती दिखाई दी।
38 की उम्र में प्रतीक के निधन से हर कोई स्तब्ध
प्रतीक यादव का 13 मई को अचानक निधन हो गया था। एक दिन पहले तक किसी ने यह नहीं सोचा था कि केवल 38 साल की उम्र में वह दुनिया को अलविदा कह देंगे। डॉक्टरों ने उनके निधन के पीछे कार्डियक अरेस्ट और धमनियों मे खून का धक्का जमने को कारण माना था। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। हालांकि बीमारी ऐसी नहीं थी जिसका इलाज नहीं हो सकता था। लेकिन शायद अपने प्रति थोड़ी सी लापरवाही ने उन्हें इतनी छोटी उम्र में ही अपनों से दूर कर दिया।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


