प्रतीक यादव की अनकही कहानी, जिसने हमेशा धड़कते दिल से बांधकर रखा ‘यादव परिवार’
प्रतीक यादव के निधन के बाद जिस तरह अखिलेश बड़े भाई की भूमिका में नजर आए और पूरा यादव परिवार एकजुट दिखा उसकी चर्चा पिछले कई दिनों से हो रही है। प्रतीक से जुड़े वे अनकहे किस्से भी सामने आ रहे हैं जिन्हें जानकर कोई भी कह देगा कि उनके लिए यादव परिवार के हर सदस्य का दिल धड़कने की यही है वजह।

समाजवादी पार्टी के संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 13 मई को निधन हो गया था। प्रतीक उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कहने को सौतेले भाई थे लेकिन उनके न रहने पर पोस्टमार्टम हाउस से लेकर अंत्येष्टि और फिर अस्थि विसर्जन तक जिस तरह पूरा यादव परिवार एकजुट नजर आया उससे साफ हो गया कि प्रतीक इस परिवार के हर सदस्य के दिल में बसते हैं। दरअसल, प्रतीक थे ही ऐसे। वह जब तक जिए मीडिया से दूर रहे या फिर मीडिया ने भी उन्हें ज्यादा खोजा नहीं लेकिन उनके निधन उनसे जुड़े ऐसे-ऐसे किस्से सामने आ रहे हैं जो अब तक अनकहे थे। इन्हीं अनकही कहानियों में प्रतीक यादव की वो शख्सियत छिपी है जिसकी यादों ने उनके न रहने पर लोगों को झकझोर कर रख दिया। राजनीति से दूर, यादव परिवार के इस प्रतीक ने हमेशा एकता की बात की और परिवार में छिड़े घमासान के बीच भी जिंदा रखी अपनों की मिठास।
प्रतीक ऐसे थे कि पारिवारिक घमासान के बीच भी अपने बड़े अखिलेश यादव के साथ नियमित बैडमिंटन खेला करते थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रतीक ने कहा था कि हमारे घर बाहर से दिखते अलग-अलग हैं लेकिन अंदर से एक हैं। मैं राजनीति नहीं जानता लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि मेरे यहां राजनीति में उतार-चढ़ाव और वैचारिक मतभेद भले हों लेकिन दिलों की दूरियां नहीं हैं। उस दौर में जब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के रिश्तों को लेकर मीडिया में तरह-तरह की खबरें चल रही थीं तब प्रतीक का कहना था कि इसे मतभेद नहीं, डिबेट के तौर पर देखना चाहिए। डिबेट और मंथन होता है तो उससे अमृत निकलता है। खुद को राजनीति से दूर रखने के बारे में प्रतीक का कहना था कि उनकी कभी इसमें रुचि नहीं रही। पढ़ाई-लिखाई भी बिजनेस और मैनेजमेंट की ही की और इसी में मजा आता है।
परिवार की एकता हर चीज से ऊपर
प्रतीक के लिए परिवार की एकता हर चीज से ऊपर थी। प्रतीक ने कहा था की छोटे-मोटे मतभेद हों तो कोई बात नहीं। बस परिवार की एकता बनी रहनी चाहिए। परिवार की एकता रही तो सब ठीक हो जाएगा। प्रतीक के जिंदगी के तीन ही सबसे बड़े शौक थे। पहला फिटनेस, दूसरा बिजनेस और तीसरा पशुओं की सुरक्षा और सेवा। प्रतीक शुद्ध रूप से शाकाहारी थे और सभी जीवों की रक्षा को अहमियत देते थे। इस दिशा में वह लगातार काम भी कर रहे थे।
अपर्णा के राजनीतिक स्टैंड को कैसे देखते थे प्रतीक
प्रतीक यादव को इस बात पर बड़ा गर्व था कि उनके परिवार में सभी को उसका प्रोफेशन चुनने की आजादी मिली। 2017 के चुनाव के दौरान जब अपर्णा लखनऊ कैंट से सपा के टिकट पर मैदान में थीं तब प्रतीक ने कहा था कि उन्हें शुरू से इस क्षेत्र में रुचि थी। उन्होंने पढ़ाई भी इसमें की है। उनका राजनीति में जाना लाजिमी है और वह बहुत अच्छा करेंगी।
सबको देखना चाहिए सपना
प्रतीक यादव अक्सर अपनी लाइफस्टाइल, फिटनेस और करोड़ों की सुपरकारों को लेकर चर्चा में रहते थे। उन्होंने 5.28 करोड़ रुपए की लैंबोर्गिनी ह्यूराकैन कार खरीदी तो सियासी गलियारों में भी इसकी खूब चर्चा हुई। तब प्रतीक ने खुद इसके साथ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने बताया कि यह उनका 10 साल पुराना सपना था जिसके लिए उन्होंने बिजनेस में खूब मेहनत की। रात को तीन-चार बजे तक काम किया। प्रतीक ने कहा था कि हर इंसान को सपना देखना चाहिए और अपने सपनों को एक साल, पांच साल, दस साल और 20 साल में बांट लेना चाहिए। सपनों को पूरा करने के लिए खूब मेहनत करनी चाहिए। यह मेहनत एक न एक दिन आपके सपनों को पूरा जरूर कर देगी। जब लोगों ने प्रतीक की लैंबोर्गिनी को लेकर आलोचना की तो उन्होंने कुर्ता-पजामा पहनकर कार के साथ फोटो शेयर कर दी थी और खुद को पहला कुर्ता पजामा वाला लैंबोर्गिनी का मालिक बताया था। प्रतीक का कहना था कि यदि इंसान कोई गलत या अवैध काम नहीं कर रहा है और अपनी मेहनत से कुछ हासिल कर रहा है तो उसे अपनी सफलता दिखाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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