फेफड़ों में खून के थक्के, हार्ट पर असर; प्रतीक को क्या-क्या बीमारियां थीं? पुरानी डॉक्टर ने बताया
प्रतीक बीपी, डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीज थे। उनके फेफड़ों में खून के थक्के (Blood Clots) जम गए थे, जिसका सीधा असर उनके दिल पर पड़ा। सांस फूलने की समस्या के कारण उन्हें हाल ही में अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था।

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। बाहर से बेहद फिट और बॉडी बिल्डर दिखने वाले प्रतीक के स्वास्थ्य को लेकर अब उनकी पुरानी डॉक्टर रुचिता ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। डॉक्टर के मुताबिक, प्रतीक पिछले कुछ समय से कई जटिल बीमारियों की चपेट में थे, जिनका असर उनके हृदय और श्वसन तंत्र पर पड़ रहा था।
डॉक्टर रुचिता ने बताया कि प्रतीक यादव उनके पुराने पेशेंट थे और वे लंबे समय से उनका इलाज कर रही थीं। डॉक्टर के अनुसार, "प्रतीक को हाई ब्लड प्रेशर (BP), हाइपरटेंशन और डायबिटीज (मधुमेह) जैसी बीमारियां थीं।" आमतौर पर ये बीमारियां 'साइलेंट किलर' मानी जाती हैं, जो शरीर के आंतरिक अंगों को धीरे-धीरे कमजोर कर देती हैं। फिटनेस के प्रति बेहद सजग होने के बावजूद, ये लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां उनके शरीर में घर कर चुकी थीं।
फेफड़ों में जमे थे खून के थक्के
डॉक्टर ने सबसे चिंताजनक जानकारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून के थक्के जमना) को लेकर दी। उन्होंने बताया कि प्रतीक के फेफड़ों में खून के थक्के जम गए थे, जिसके कारण उन्हें हाल ही में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। फेफड़ों में जमे इन थक्कों की वजह से उनके हृदय (Heart) पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा आने के कारण उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित हुई थी, जो अंततः जानलेवा साबित हुई।
सांस फूलने की समस्या और हार्ट पर असर
डॉक्टर रुचिता के मुताबिक, प्रतीक को अक्सर सांस फूलने (Breathlessness) की भी समस्या रहती थी। फेफड़ों और हृदय की बीमारियों के आपस में जुड़े होने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। अस्पताल में हालिया भर्ती के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम और गहन चिकित्सा की सलाह दी थी। डॉक्टर के अनुसार फेफड़ों की धमनियों में ब्लॉकेज के कारण उनके हृदय पर भी असर पड़ा था। उन्होंने बताया कि यह बीमारी बेहद गंभीर और जोखिम भरी होती है तथा प्रतीक यादव नियमित रूप से दवाएं और ब्लड थिनर ले रहे थे।
फिटनेस और बीमारी का विरोधाभास
प्रतीक यादव की पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में थी जो जिम में घंटों पसीना बहाते थे और अपनी मांसपेशियों (Muscles) के लिए जाने जाते थे। लेकिन डॉक्टर के इन खुलासों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाहरी फिटनेस हमेशा आंतरिक स्वास्थ्य की गारंटी नहीं होती। प्रतीक की मौत ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि गंभीर बीमारियों और तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच सप्लीमेंट्स या अत्यधिक वर्कआउट का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।


