प्रतीक की सामान्य मौत तो पोस्टमार्टम क्यों? सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने जांच की मांग उठाई

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सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने प्रतीक यादव की मौत को 'संदिग्ध' बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रतीक के शरीर पर नीले निशान और चोटें थीं, जो जहर दिए जाने की ओर इशारा करती हैं। साथ ही उन्होंने पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपने में हुई 5 घंटे की देरी पर भी प्रशासन को घेरा है।

प्रतीक की सामान्य मौत तो पोस्टमार्टम क्यों? सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने जांच की मांग उठाई

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन का मामला अब एक गहराते रहस्य और राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है। समाजवादी पार्टी के लखनऊ से ही वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने प्रतीक की मौत को पूरी तरह संदिग्ध करार देते हुए कई डॉक्टरों के हवाले से कई दावे किए। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर घंटों मौजूद रहे मेहरोत्रा ने दावा किया कि प्रतीक की मौत सामान्य नहीं है और इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। कहा कि यह सामान्य मौत नहीं थी। सामान्य मौत होती तो पोस्टमार्टम क्यों होता। प्रतीक की मौत घर पर ही हो चुकी थी। ऐसे में इसकी जांच जरूर होनी चाहिए। हालांकि प्रतीक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने रविदास के दावों को खारिज भी कर दिया है।

विधायक रविदास मेहरोत्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रतीक मुझे अंकल कहते थे और मैं उनके बहुत करीब था। मैंने उनकी स्थिति देखी है। डॉक्टरों से जो मेरी बात हुई है, उसके अनुसार प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। उनके शरीर पर नीले दाग भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह सामान्य बीमारी से हुई मौत थी, तो शरीर नीला क्यों पड़ा और चोट के निशान कहां से आए? उन्होंने जहर का अंदेशा भी जताया।

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मेहरोत्रा ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और समय पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "आम तौर पर सामान्य मौत की स्थिति में पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता। प्रशासन ने खुद पोस्टमार्टम का फैसला लिया, जो साबित करता है कि परिस्थितियां संदिग्ध थीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुबह 9 बजे पोस्टमार्टम पूरा हो गया था, तो फिर शव को 5 घंटे तक क्यों रखा गया। 2 बजे परिजनों को बॉडी क्यों सौंपी गई? आखिर इस देरी के पीछे क्या छिपाया जा रहा था?

अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मौत

सपा विधायक ने कहा कि प्रतीक को जब अस्पताल ले जाया गया, तो वे जीवित नहीं थे। डॉक्टरों के पास पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। एक फिट और जिम जाने वाले नौजवान की अचानक इस तरह मौत होना और फिर शरीर पर ऐसे निशान मिलना, पूरी कहानी को संदिग्ध बनाता है।" मेहरोत्रा ने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

भावुक हुए रविदास मेहरोत्रा

बातचीत के दौरान रविदास मेहरोत्रा काफी भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा, "मैं बहुत दुखी हूं। प्रतीक एक ऊर्जावान युवक था। मैं पूरे समय पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ा रहा ताकि यह सुनिश्चित कर सकूं कि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो। हम चुप नहीं बैठेंगे, जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि आखिर हमारे परिवार के सदस्य के साथ क्या हुआ।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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