प्रतीक यादव राजनीति से दूर फिटनेस और बिजनेस में रमे रहे, अपर्णा से हुई थी लव मैरिज

Yogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने राजनीति के बजाय बिजनेस और फिटनेस को अपनी पहचान बनाया। अपर्णा यादव के साथ उनकी लव मैरिज और जिम के प्रति उनके जुनून की अक्सर चर्चा होती थी। 

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा राजनीति कुनबा बनाने वाले मुलायम सिंह यादव का बेटा होने के बाद भी प्रतीक यादव का व्यक्तित्व अपने परिवार के अन्य सदस्यों से बिल्कुल जुदा था। जहां एक ओर पिता मुलायम सिंह समेत पूरा कुनबा यानी चाचा, भाई, चचेरे भाई यहां तक की भाभी और पत्नी भी राजनीति में आ गईं लेकिन प्रतीक ने खुद को उससे दूर रखा। प्रतीक ने अपनी अलग ही पहचान बनाई। वह एक सफल बिजनेसमैन, फिटनेस आइकॉन और समाजसेवा में लगे रहे। उन्होंने स्कूल में दोस्त बनीं अपर्णा से परिवार की सहमति के बाद 2011 में शादी की थी। दोनों को दो बेटियां हैं।

राजनीति से दूरी लेकिन चर्चाओं में हमेशा रहे

मुलायम सिंह यादव राजनीति में वह नाम था, जो धरती पुत्र और नेताजी जैसे उपनामों से जाना गया। प्रतीक यादव उन्हीं नेताजी की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। मुलायम सिंह ने बहुतों को नेता बनाया, घर परिवार से कई नेता दिए और राजनीति में परिवारवाद जैसे आरोपों को भी झेला, लेकिन प्रतीक यादव राजनीति से हमेशा दूर रहे। कभी न मंच साझा किया और न कभी किसी पार्टी कार्यक्रम में शामिल हुए। राजनीति से प्रतीक भले ही दूर रहे हों, लेकिन चर्चाओं में वे हमेशा रहे।

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प्रतीक की थी अपनी अलग दुनियां

प्रतीक ने कभी राजनीति की तरफ नहीं देखा। वह बस अपने कारोबार और बॉडी बिल्डिंग पर ध्यान देते रहे। मुलायम सिंह यादव की सरकार रही हो या फिर अखिलेश यादव की 2012 से 2017 की सरकार। प्रतीक कभी भी राजनीति की केंद्र में नहीं आए। बढ़ती उम्र के साथ कारोबार भी बढ़ाया। वह जिम सेंटर की श्रृंखला स्थापित करना चाहते थे। इसके अलावा बिल्डर के साथ अन्य कारोबार किया करते थे। वह राजनीति से हटकर अपनी दुनियां बसाना चाहते थे। ऐसा नहीं है कि वो चाहते तो राजनीति में नहीं आ सकते थे, लेकिन उन्होंने इस तरफ कभी रुख नहीं किया।

एक बार चुनाव लड़ने की हुई चर्चा

बात 2014 के लोकसभा चुनाव की है। मुलायम सिंह यादव मैनपुरी के साथ आजमगढ़ से चुनाव लड़े और दोनों स्थानों से वह जीते। इन स्थितियों में उन्हें एक लोकसभा सीट छोड़नी थी। उस समय प्रतीक यादव के नाम की चर्चाएं जरूर हुई थी कि वो लोकसभा उपचुनाव लड़ सकते हैं लेकिन यह सिर्फ कयासबाजी ही साबित हुई। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव वर्ष 2017 में सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ी, लेकिन भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गईं। अपर्णा यादव के चुनाव में भी प्रतीक यादव कभी नहीं दिखाई दिए। वह राजनीति से हमेशा दूर रहे और अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में जुटे रहे।

सत्ता की विरासत पर भारी पड़ा फिटनेस का जुनून

प्रतीक यादव को उत्तर प्रदेश के सबसे फिट 'पॉलिटिकल फैमिली मेंबर' के तौर पर जाना जाता था। बचपन में मोटापे से जूझने वाले प्रतीक ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से खुद को एक बॉडी बिल्डर के रूप में ढाला। लखनऊ में उनका सबसे बड़ा और विश्वस्तरीय जिम है। जहां वे घंटों पसीना बहाते थे। उन्हें महंगी और लग्जरी गाड़ियों का भी काफी शौक था, लेकिन उनकी सबसे बड़ी संपत्ति उनकी सेहत थी। वे अक्सर युवाओं को नशे से दूर रहने और वर्कआउट पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करते थे।

अपर्णा के साथ 'स्कूल डेज' वाली लव स्टोरी

प्रतीक और अपर्णा की प्रेम कहानी स्कूली दिनों में शुरू हुई। स्कूली दिनों में कॉमन दोस्तों के साथ इनकी मुलाकातें होती थीं। दोनों में आकर्षण था। हालांकि, 2001 के पहले तक इसका इजहार नहीं हुआ था। दोनों के करीबी लोग बताते हैं कि अपर्णा और प्रतीक की एक कॉमन दोस्त की जन्मदिन की पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई। तब प्रतीक हाईस्कूल में थे। उन्होंने वहीं अपर्णा से बातचीत की और संवाद का सिलसिला बनाए रखने के लिए ई-मेल आईडी मांगी। यह वह दौर था, जब मोबाइल इतना सामान्य नहीं हुआ करता था।

दोनों के बीच ई-मेल आईडी साझा हुईं तो प्रतीक अपर्णा को नियमित ई-मेल करने लगे। वह अपर्णा को ई-मेल से अपने दिल का हाल बताने लगे। इन सबसे बेखबर अपर्णा ने काफी दिनों तक अपना ई-मेल चेक ही नहीं किया था। जब उन्होंने किसी रोज ई-मेल देखा तो प्रतीक के प्रेम के इजहार को अस्वीकार नहीं कर सकीं। इस तरह से दोनों के बीच प्रेम का संबंध पनपा जो दोनों की पढ़ाई पूरी होने तक जारी रहा। इसके बाद दोनों ने अपने-अपने परिवार में इसकी जानकारी दी और उनकी रजामंदी से दोनों की शादी हो गई।

हाई-प्रोफाइल थी शादी

अपर्णा और प्रतीक की शादी एक हाई-प्रोफाइल समारोह था। मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव में 4 दिसंबर 2011 को हुए इस समारोह में तमाम नामचीन हस्तियां जुटी थीं। अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अनिल अंबानी जैसे वीवीआईपी पहुंचे थे। लखनऊ से सैफई तक इस शादी का जश्न मना था।

फिटनेस फ्रीक प्रतीक और शास्त्रीय गायिका अपर्णा

विदेश में पढ़े अपर्णा और प्रतीक के शौक बेहद अलग थे। प्रतीक फिटनेस फ्रीक थे, जबकि अपर्णा को शौक संगीत रहा। अपर्णा एक प्रशिक्षित शासत्रीय गायिका हैं। वहीं, प्रतीक सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से प्रेरित होकर बॉडी बिल्डिंग करते थे। मुलायम भी अपनी नौजवानी के दिनों में पहलवानी करते थे। सितंबर 2012 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त बॉडीबिल्डिंग वेबसाइट पर 'द इंटरनेशनल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ द मंथ' के रूप में दिखाया गया था। अपने-अपने शौक के इतर दोनों ने अपनी पढ़ाई विदेश में पूरी की थी। अपर्णा मैनचेस्टर विश्वविद्यालय में पढ़ीं जबकि प्रतीक लीड्स विश्वविद्यालय में।

समाज सेवा और परोपकार में रुचि

भले ही प्रतीक राजनीति से दूर रहे लेकिन वे समाज सेवा के कार्यों में हमेशा सक्रिय रहते थे। वे जानवरों से बेहद प्रेम करते थे और लखनऊ में पशुओं के कल्याण के लिए कई प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे। साथ ही, वे समय-समय पर दबे-कुचले लोगों की आर्थिक मदद के लिए भी आगे आते थे। उन्होंने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को चर्चाओं से दूर रखा और लो-प्रोफाइल रहकर अपना रियल एस्टेट का कारोबार संभाला।

अधूरा रह गया सफर

प्रतीक के अचानक चले जाने से न केवल यादव परिवार बल्कि उनके चाहने वाले भी सदमे में हैं। अपनी दो मासूम बेटियों प्रथमा और प्रतीक्षा के लिए वे एक सुपर-डैड थे। प्रतीक का निधन मुलायम सिंह की उस विरासत के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसने हमेशा परिवार को जोड़ने की कोशिश की। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रतीक ने हर पारिवारिक रिश्ते को बखूबी निभाया और कभी भी सत्ता के अहंकार को अपने करीब नहीं आने दिया।

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लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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