प्रतीक की मौत से अकेले हुए अखिलेश; मुलायम सिंह के परिवार में डिंपल-अपर्णा के अलावा और कौन?

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प्रतीक यादव के निधन ने मुलायम सिंह यादव के परिवार को गहरा सदमा दिया है। अखिलेश यादव के भाई होने के बाद भी प्रतीक ने भले ही राजनीति से दूरी रखी, लेकिन परिवार की मजबूती में उनका अहम योगदान था।

प्रतीक की मौत से अकेले हुए अखिलेश; मुलायम सिंह के परिवार में डिंपल-अपर्णा के अलावा और कौन?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से दबदबा बनाए रखने वाले मुलायम सिंह यादव का परिवार आज एक गहरे सदमे से गुजर रहा है। बुधवार सुबह मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) के निधन ने 'सैफई कुनबे' को झकझोर कर रख दिया है। अखिलेश यादव, जिन्होंने अपने पिता और मां को खोने के बाद छोटे भाई प्रतीक को हमेशा एक संबल की तरह देखा, आज इस घटना से अकेले पड़ गए हैं। मुलायम सिंह यादव का परिवार देश का सबसे बड़ा राजनीतिक कुनबा माना जाता है, जिसकी जड़ें बेहद गहरी हैं।

मुलायम सिंह यादव के परिवार की दो शाखाएं हैं। पहली शाखा उनकी पहली पत्नी स्वर्गीय मालती देवी से है, जिनके बेटे अखिलेश यादव हैं। अखिलेश ने पिता की राजनीतिक विरासत को संभाला और पिता की बनाई समाजवादी पार्टी को संभालने के साथ ही यूपी के मुख्यमंत्री भी बने। उनकी पत्नी डिंपल यादव वर्तमान में मैनपुरी से सांसद हैं।

दूसरी शाखा मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता से है। प्रतीक यादव साधना के ही बेटे थे। प्रतीक ने राजनीति के बजाय जिम और रियल एस्टेट को अपना करियर चुना। उनकी पत्नी अपर्णा यादव भाजपा की कद्दावर नेता और वर्तमान में यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। प्रतीक के निधन के बाद अब इस शाखा की जिम्मेदारी अपर्णा और उनकी दो बेटियों प्रथमा व प्रतीक्षा पर आ गई है।

मुलायम सिंह पांच भाई और एक बहन

मुलायम सिंह यादव कुल पांच भाई और एक बहन थे। आज यह पूरा कुनबा राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है। इसके साथ ही मुलायम के चचेरे भाइयों का परिवार भी राजनीति में हैं। पूरा कुनबा समाजवादी पार्टी के झंडे तले राजनीति कर रहा है। केवल प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव ही सपा से दूर भाजपा में हैं। हालांकि 2022 से पहले अपर्णा भी सपा में ही थीं। 2017 में सपा ने अपर्णा को लखनऊ से विधानसभा के टिकट भी दिया था।

मुलायम परिवार में कौन-कौन

रतन सिंह यादव (बड़े भाई): इनका निधन हो चुका है। इनके पोते तेज प्रताप यादव (मैनपुरी के पूर्व सांसद) राजनीति में सक्रिय हैं। धर्मेंद्र यादव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दामाद भी हैं।

अभय राम सिंह यादव (भाई): इनके बेटे धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से सांसद हैं और परिवार के मजबूत स्तंभों में से एक हैं।

राजपाल सिंह यादव (भाई): इनके बेटे अंशुल यादव हैं और राजनीति में सक्रिय हैं। वह जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं और पंचायत की राजनीति में ही रमे हुए हैं।

शिवपाल सिंह यादव (छोटे भाई): प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संस्थापक और वर्तमान में सपा के वरिष्ठ नेता व विधायक हैं। इनके बेटे आदित्य यादव बदायूं से सांसद हैं।

प्रो. रामगोपाल यादव (चचेरे भाई): सपा के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मुख्य रणनीतिकार माने जाते हैं। अखिलेश यादव इनकी बहुत इज्जत करते हैं। रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं और इस फिरोजाबाद से सांसद हैं।

कमला देवी (बहन): मुलायम सिंह यादव की इकलौती बहन, जिनका परिवार भी समाज में प्रतिष्ठित है।

तीसरी पीढ़ी भी संभाल रही कमान

अखिलेश यादव की संतानें अदिति, टीना और अर्जुन अभी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन समय-समय पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आते हैं। खासकर अदिति अपनी मां डिंपल के लिए पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचार करते भी नजर आई थीं। वहीं, प्रतीक यादव की बेटियां अभी छोटी हैं। इस परिवार की खासियत यह रही है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद खास मौके पर पूरा 'सैफई कुनबा' एक साथ खड़ा नजर आता है।

आज प्रतीक के जाने पर अखिलेश यादव के साथ उनके सभी चाचा और चचेरे भाई कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिखाई दे रहे हैं। प्रतीक के निधन के समय अपर्णा यादव गुजरात में थीं। ऐसे में पोस्टमार्टम हाउस पर भी परिवार की तरफ से सबसे पहले अखिलेश यादव ही पहुचे थे।

यादव परिवार के यह लोग भी राजनीति में आए

इसके अलावा मुलायम सिंह के छोटे भाई राजपाल यादव की पत्नी प्रेमलता यादव भी सूबे की सियासत में किस्मत आजमा चुकी हैं। वो इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। शिवपाल यादव की पत्नी सरला यादव को 2007 में जिला सहकारी बैंक इटावा की राज्य प्रतिनिधि बनाया गया था। मुलायम सिंह की भतीजी संध्या यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के जरिए राजनीतिक एंट्री की थी। संध्या यादव धर्मेंद्र यादव की बहन हैं और मैनपुरी से जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं।

मुलायम की चचेरी बहन और रामगोपाल यादव की सगी बहन गीता देवी के बेटे अरविंद यादव ने 2006 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और मैनपुरी के करहल में ब्लॉक प्रमुख बने थे। वहीं, शीला यादव मुलायम के कुनबे की पहली बेटी हैं जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। शीला यादव जिला विकास परिषद की सदस्य रहीं। इसके साथ ही बहनोई अजंत सिंह यादव बीडीसी सदस्य रहे हैं।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

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योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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