बोले बेल्हा : टंकी तीन-तीन लगीं पर पानी एक बूंद न मिला, रास्ता ऐसा कि बारिश में चलना मुश्किल

Feb 07, 2026 05:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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Pratapgarh-kunda News - कटका मानापुर गांव के लोग संपर्क मार्ग और पेयजल की समस्या से परेशान हैं। कच्चा मार्ग बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल से भरा रहता है। गांव में कई टंकियां बनाई गईं, लेकिन शुद्ध पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। लोग जनप्रतिनिधियों से सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

बोले बेल्हा : टंकी तीन-तीन लगीं पर पानी एक बूंद न मिला, रास्ता ऐसा कि बारिश में चलना मुश्किल

संडवा चंद्रिका विकास खंड का कटका मानापुर गांव एक अदद संपर्क मार्ग के लिए कई सालों से परेशान है। गांव तक जाने के लिए कच्चा मार्ग है जो गर्मी और बरसात में पैदल चलने लायक भी नहीं बचता। ऐसे में लोगों को आवागमन में बहुत परेशानी हो रही है। यही हाल गांव में पेयजल का है। गांववालों को शुद्ध पेयजल उनके दरवाजों तक पहुंचाने के लिए पेयजल की कई योजनाओं के करोड़ों रुपये इस गांव पर खर्च किया जा चुके हैं। लेकिन गांव में पेयजल के लिए एक भी सार्वजनिक इंतजाम चालू हालत में नहीं हैं। लोग हैंडपंप या निजी साधनों से किसी तरह पानी की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक से कई बार लोग मांग और शिकायत कर चुके हैं लेकिन एक बार भी यहां की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। गांववालों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से पीड़ा साझा करते हुए समाधान के लिए आवाज उठाई है। कटका मानापुर गांव चंद्रिकन संग्रामपुर मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस डेढ़ किलोमीटर में 500 मीटर तक ईंट का खड़ंजा है। इसके बाद करीब एक किलोमीटर तक सड़क कच्ची है। पांच सौ मीटर तक जो खड़ंजा बिछा है कि वह भी बहुत पुराना हो चुका है। कुछ ईंटें टूटकर उखड़ गई हैं तो कुछ मिट्टी में धंस गई हैं। काफी ईंटें उखड़कर गायब हो चुकी हैं। इससे खड़ंजे की हालत जर्जर हो चुकी है। उस पर पैदल चलने में भी तकलीफ होती है। खड़ंजा जहां खत्म होता है उसके आगे गांव तक सड़क आज तक पक्की नहीं हो पाई। गर्मी में इस कच्ची सड़क पर इतनी अधिक धूल हो जाती है कि उसमें साइकिल और बाइक के पहिए धंसने व फिसलने लगते हैं। ई-रिक्शा वाले सामान लादकर गांव में जाने को तैयार नहीं होते। वाहनों के टायरों से इतनी अधिक धूल उड़ती है कि पैदल चलने वालों के कपड़ों पर धूल की मोटी परत जम जाती है। आंखों में धूल पड़ने से स्कूली बच्चों की आंखें लाल हो जाती हैं। बरसात में रास्ते की समस्या और गंभीर हो जाती है। कच्ची मिट्टी बारिश के पानी में गलकर कीचड़ बन जाती है। जगह-जगह गड्ढा व जलभराव हो जाता है। जिससे सड़क पर पैदल चलने लायक जगह भी नहीं बचती। साइकिल और बाइक के पहिए धंसने लगते हैं। ई-रिक्शा तक फंस जाते हैं, चार पहिया व भारी वाहनों की बात तो बहुत दूर रही। बरसात में रास्ता इतना अधिक खराब हो जाता है कि चार पहिया वाहन गांव में नहीं आ पाते। ऐसे में कोई बीमार पड़ जाता है तो बहुत समस्या होती है। एंबुलेंस या अन्य तीन पहिया, चार पहिया वाहन कीचड़ भरे रास्ते की वजह से गांव में नहीं आ पाते। ऐसे में मरीज को करीब डेढ़ किलोमीटर तक चारपाई पर लादकर ले जाना पड़ता है। इसके बाद वाहन से नजदीकी अस्पताल ले जाया जाता है। लेकिन इस दौरान कई बार बहुत देर हो जाती है। जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है। कीचड़युक्त रास्ते पर मरीज को चारपाई पर लादकर पैदल ले जाना भी बहुत कठिन व जोखिमभरा हो जाता है। पैर फिसलने से चारपाई सहित मरीज के गिरने का खतरा बना रहता है। लेकिन गांववालों के पास इस जोखिम को उठाने के अलावा दूसरा कोई रास्ता या विकल्प नहीं बचता। ऐसे में लोग बार-बार मांग कर रहे हैं कि कम से कम एक रास्ता ऐसा बना दिया जाए जिस पर पूरे साल चार पहिया वाहन बिना किसी परेशानी के जा सकें। लेकिन उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे लोग परेशान हैं। गांव में पंचायत भवन बना है। लेकिन लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। गांव के विकासा कार्यों की बैठकों या योजनाएं बनाने में इसका इस्तेमाल न होने से यह जुआरियों व नशेड़ियों के निशाने पर आ गया है। पंचायत भवन निष्प्रयोज्य देख जुआरी, नशेड़ी इकट्ठा होते हैं। इससे जिस पंचायत भवन को गांव के विकास को बढ़ावा व सहूलियत देने के लिए बनाया गया था वह जुआरियों व नशेड़ियों का अड्डा बन रहा है। लेकिन शिकायत के बाद भी इस बारे में कुछ नहीं किया जा रहा है। विद्यार्थियों और मतदाताओं को होती है परेशानी जिस कच्चे रास्ते से पूरे गांव को परेशानी हो रही है, उसी रास्ते पर प्राथमिक विद्यालय भी है। बरसात में कच्चा रास्ता जब कीचड़ और जलभराव का शिकार हो जाता है तो बच्चों को स्कूल जाने में बहुत परेशानी होती है। रास्ते में कीचड़ होने से अक्सर बच्चे फिसलकर गिरते हैं तो चोटहिल होने के साथ उनके कपड़े व कापी किताब भी खराब हो जाती हैं। ऐसे में कई बार बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। इसी विद्यालय को चुनाव में बूथ बनाया जाता है। मतदाताओं को बूथ ले आने के लिए चुनाव आयोग हर चुनाव के पहले करोड़ों रुपये खर्च कर बूथ तक रास्ता, पेयजल, प्रकाश, शौचालय आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कराता है। लेकिन इस विद्यालय को बूथ बनाए जाने के बाद भी इसका रास्ता आज पक्का नहीं कराया गया। कुछ साल पहले हुए चुनाव में मतदान के दिन बरसात हो गई तो मतदाताओं को कीचड़ से होकर जाना पड़ा। लोगों का कहना है कि ऐसे में मतदान प्रतिशत भी प्रभावित हो जाता है। इसके बाद भी इस कच्चे रास्ते को पक्का नहीं किया जा रहा है। लोग जल्द से जल्द एक अदद पक्के सम्पर्क मार्ग की मांग कर रहे हैं। टंकी से पानी की आपूर्ति की मांग गांव में लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल की सप्लाई करने के लिए पानी की तीन-तीन टंकियां बनाकर सरकार के करोड़ों रुपये खपा दिए गए हैं लेकिन उनसे गांववालों को एक बूंद पानी नहीं मिल रहा है। सबसे पहले करीब 12 साल पहले तत्कालीन सपा सरकार के मंत्री ने गांव में पानी की टंकी का निर्माण कराकर लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल आपूर्ति का वादा किया था। टंकी तो बन गई लेकिन उससे लोगों के घरों तक पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। उससे लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। करीब तीन साल पहले जलजीवन मिशन के तहत भी पानी की एक टंकी बनाई गई। लेकिन उससे भी पानी की आपूर्ति चालू नहीं की जा सकी है। इतना ही नहीं गांव में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सोलर नलकूप और टंकी भी बनाई गई है। लेकिन अन्य दो टंकियों की तरह इससे भी लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिल रहा है। गांववालों का कहना है कि हम लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार से करोड़ों रुपये का बजट पास कराकर खर्च दिखा दिया गया लेकिन हम लोगों को उससे एक बूंद पानी नहीं मिल रहा है। गांव वाले इसकी जांच कराकर कार्रवाई कराते हुए उक्त टंकियों से पानी की आपूर्ति शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। जर्जर तार से हो रही बिजली की सप्लाई गांव में बिजली आई है। लेकिन गांववालों का कहना है कि उससे तार इतने पुराने व जर्जर हो चुके हैं कि वे बार-बार टूटकर या जलकर बिजली सप्लाई रोक दे रहे हैं। इससे फसलों की सिंचाई भी प्रभावित हो जाती है। बिजली का बिल पूरा जमा करने के बाद भी लोगों को लोकल फॉल्ट से छुटकारा नहीं मिल रहा है। बिजली का भरोसा नहीं रहता कि कब कहां से फॉल्ट आने पर सप्लाई ठप हो जाए। इसके लिए गांववालों ने कई बार बिजली के तार बदलने की मांग की लेकिन उनका कहना है कि विभागीय अफसर उनकी मांग पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में बिजली के लिए लोगों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। जरा हमारी भी सुनिए हमारे गांव का सम्पर्क मार्ग पक्का होना तो दूर ईंट का खड़ंजा भी पूरा नहीं बिछ पाया है। एक ओर जहां अन्य गांवों में पक्की और आरसीसी सड़कों पर ग्रामीणों के वाहन फर्राटा भर रहे हैं वहीं हम लोग अभी भी धूल, कीचड़ और गंदे पानी से होकर आवागमन को मजबूर हैं। इससे निजात मिलनी चाहिए। -राजेश सिंह गांव में बिजली के तार इतने जर्जर हो चुके हैं कि कब और कहां से गरम होकर टूट जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब फसल की सिंचाई के बीच में बिजली के तारों में फॉल्ट आ जाता है। फॉल्ट दूर कर बिजली की सप्लाई प्रभावित होने तक इतना समय लग जाता है कि फसल प्रभावित हो जाती है। -रामजीत सिंह गांव में लाखों रुपये खर्च पर पंचायत भवन इसलिए बनाया गया था कि उसमें बैठकर गांव के विकास कार्यों पर बात होगी। लेकिन उसका इस्तेमाल न किए जाने से वह जुआरियों का अड्डा बनता जा रहा है। इससे गांव का माहौल भी खराब हो रहा है। पंचायत भवन से अराजकतत्वों को हटाना चाहिए। -मनोज सिंह गांव में बिजली के तार बहुत पुराने हो चुके हैं। इसके चलते बार-बार लोकल फॉल्ट आता है और बिजली सप्लाई ठप हो जाती है। इससे घर और खेत दोनों के काम प्रभावित हो रहे हैं। बिजली के तारों को बदलने की मांग कई साल से की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे बिजली की समस्या परेशान करती है। -उदयभान सिंह गांव में पानी की तीन टंकियां दिखाई देती हैं लेकिन पानी एक से भी नहीं आता। इसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सरकार के लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी गांव वालों को अपने परिवार व मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम खुद करना पड़ रहा है। -दिनेश गांव में आने का रास्ता इतना खराब है कि बरसात में जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस भी नहीं आ पाती। ऐसे में मरीज को अस्पताल पहुंचाने में बहुत देर हो जाता है। इसलिए कई बार मांग की गई कि पक्की सड़क न सही आरसीसी या ईंट का खड़ंजा ही बिछा दिया जाए तब भी काफी राहत मिल जाएगी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -बैजनाथ गांव में लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाकर उनको पानी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए सरकार ने पानी की तीन टंकियों पर करोड़ो रुपये खर्च कर दिए। उनकी गुणवत्ता की ठीक से निगरानी न हो पाने से वे किसी काम नहीं आ पा रही हैं। एक भी टंकी लोगों के लिए पानी की सप्लाई नहीं कर पा रही है। -राम समुझ गांव की सड़क बनना बहुत जरूरी है। अन्य गांवों में एक से अधिक पक्की सड़कें बन गई हैं लेकिन हम लोग एक अदद खड़ंजा भी नहीं पा रहे हैं। इससे सम्पर्क मार्ग की दशा दिन प्रतिदिन खराब ही होती जा रही है। इसे जल्द से जल्द पक्का कराना चाहिए। ताकि अगली बरसात में लोगों को रास्ता न बाधित हो। -विश्वनाथ गांव में बिजली के तार बहुत पुराने हो चुके हैं। ऐसे में जरा भी ओवरलोड होने पर बिजली के तार गर्म होकर टूट जाते हैं। काफी दूर तक बिजली की सप्लाई रुक जाती है। उसकी मरम्मत के लिए जब लाइनमैन शटडाउन लेता है तो पूरे इलाके की बिजली सप्लाई रुक जाती है। इसलिए तार बदलना आवश्यक है। -अनिल बरसात में लोग मनाते रहते हैं कि कोई रिश्तेदार न आ जाए। अन्यथा गांव के कीचड़ से सने रास्ते को लेकर बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। कई बार सड़क बनवाने की मांग की गई लेकिन कभी उस पर कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि सड़क या खड़ंजा बनना बहुत जरूरी है। -प्रेमा देवी गांव में पंचायत भवन बनाया गया तो कहा गया था कि इसमें बैठकर गांव के विकास की योजनाओं पर चर्चाएं होंगी। लेकिन वहां सिर्फ जुआरी व नशेड़ी ही दिखाई देते हैं। गांव के विकास कार्यों से जुड़ा कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि वहां नहीं दिखाई देता। इस स्थिति में सुधार लाया जाना चाहिए। -सविता सिंह बरसात में गांव जाने वाले रास्ते पर पानी भर जाता है। इससे उस पर आवागमन बहुत कष्टदायी हो जाता है। यदि इस कच्ची सड़क को पक्का कर दिया जाता तो आवागमन में होने वाली दिक्कतों से मुक्ति मिल जाती। इसलिए हम लोग काफी समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। लेकिन उस पर जिम्मेदार लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। -किशन गांव का रास्ता बहुत खराब हो गया है। बरसात में गांव से बाहर जाना हो तो समझ में नहीं आता कि कैसे जाएं। मुख्य सम्पर्क मार्ग पर इतना पानी व कीचड़ जमा हो जाता है कि उसमें से गुजरना बहुत मुश्किल काम हो जाता है। इसलिए सड़क जल्द से जल्द बननी चाहिए। -चंद्रभान सिंह बोले जिम्मेदार गांव की समस्याओं का पता लगाया जाएगा। इसके बाद संबंधित से कार्रवाई कराते हुए लोगों को जल्द से जल्द समस्याओं से निजात दिलाई जाएगी। -विमल श्रीवास्तव, बीडीओ संडवा चंद्रिका

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