बोले बेल्हा : घर आने को पगडंडी का सहारा, पानी और बिजली के लिए भी करना पड़ रहा संघर्ष
Pratapgarh-kunda News - खजुरनी ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को जंगली रास्तों और बिना संपर्क मार्ग के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली और पानी की समस्या भी गंभीर है। ग्रामीणों ने विधायक से पुलिया निर्माण और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की है। क्षेत्र में बोरिंग की कोशिशें विफल हो चुकी हैं, जिससे जलापूर्ति की स्थिति चिंताजनक है।
जिला मुख्यालय के विकासखंड सदर की ग्राम पंचायत खजुरनी के हर ओर सिर्फ जंगल दिखाई देता है। लोगों को आवागमन के लिए ऊंची नीची सड़कें हैं लेकिन सरपतों के बीच बलुई मिट्टी से होकर गुजरने वाले ज्यादातर रास्तों पर चलना मुश्किल हो रहा है। गांव के लोग पानी, बिजली जैसी समस्या से भी जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि जिला मुख्यालय के करीब होने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर खजुरनी ग्राम पंचायत में हर ओर जंगल में सरपत के बीच से गुजरते रास्तों पर चलना आसान नहीं है।
कई पुरवे तक जाने के लिए संपर्क मार्ग नहीं है। आज भी लोगों को अपने घरों तक आने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत के पुरवे शिवपुर, गोसाईं का पुरवा, छोटकी संड़ारी, पांडेय का पुरवा और खजुरनी काफी दूर-दूर बसे हैं। नदी के कछार के बीच मिट्टी की ऊंचे टीलों के कारण दूर से पता ही नहीं चलता कि इसके आगे भी कोई गांव बसा होगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव तक सड़क तो आई है लेकिन शिवपुर, गोसाईं का पुरवा जाने के लिए आज भी खेतों के बीच की मेड़ और पगडंडी का ही सहारा लेना होता है। चार पहिया वाहन उनके घरों तक नहीं पहुंच पाते। शादियां गर्मी में करते हैं ताकि घर तक कार आने के लिएा कहीं से रास्ता बनाया जा सके। फायरब्रिगेड तो जरूरत पड़ने पर मौके तक नहीं पहुंच पाती। यही हाल एंबुलेंस का है। कोई बीमार होता है या गर्भवती महिलाओं को हॉस्पिटल ले जाना होता है तो एंबुलेंस का घर तक पहुंचना संभव नहीं होता। इसके अलावा पेयजल के लिए लोगों को समस्या हो रही है। एक व्यक्ति ने सरकारी इंडिया मार्का हैंडपंप अपने खेत में लगवाने के बाद वहां कटीले तार से बैरिकेडिंग कर दी है। कोई भी व्यक्ति वहां पानी भरने नहीं जा पाता। ब्लॉक प्रमुख की ओर से एक सबमर्सिबल पंप लगवाया गया। वहां आसपास के लोग पानी भरने जाते हैं। जलजीवन मिशन की पाइपलाइन का अभी यहां पता नहीं है। दो जगह बोरिंग की गई लेकिन वह फेल हो गया। अब तीसरी जगह बोरिंग कराई जा रही है। इससे कब तक जलापूर्ति हो सकेगी अभी कुछ पता नहीं। वाटर लेवल काफी नीचे होने के कारण हर किसी के लिए बोरिंग कराना संभव नहीं है। उनके लिए सिर्फ इंडिया मार्का हैंडपंप ही सहारा हैं। खेतों की ओर जाने के रास्ते बेहद खतरनाक रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को खेती करने में भी दिक्कत हो रही है। ग्रामीण बताते हैं कि ऊबड़ खाबड़ रास्ते में ट्रैक्टर जाना ही मुश्किल होता है। ट्राली के साथ ही लोडर जाना संभव नहीं होता है। ऐसे में लोगों को मजदूरों से ज्यादा काम कराना पड़ता है। रास्ता ऊबड़ खाबड़ होने के कारण ट्रैक्टर, लोडर पलट भी जाते हैं। मजदूरों से काम कराने में खर्च भी अधिक हो जाता है। कई बार मजदूर न मिलने के कारण फसल तैयार करने में भी दिक्कत होती है। स्कूल वैन से टूटी थी पुलिया की रेलिंग, नहीं बनी खजुरनी के ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बीच से गुजरे नाले की पुलिया पर पिछले साल स्कूली वैन टकराने से रेलिंग टूट गई थी। वैन में 20 से अधिक बच्चे सवार थे हालांकि वैन नाले में गिरने से सकुशल बच गए। इससे आज भी पुलिया पर खतरा मंडरा रहा है। ग्राम पंचायत के लोगों ने पुलिया निर्माण के लिए सदर विधायक से मुलाकात कर प्रार्थनापत्र दिया। आश्वासन के बाद भी पुलिया आज तक अधूरी है। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया की रेलिंग न होने से रात को अंधेरे में राहगीरों के गिरने का डर बना रहता है। हर पुरवे में बांस-बल्ली पर दौड़ रही बिजली की लाइन खजुरनी में आज तक विद्युतीकरण अधूरा है। ग्रामीण बताते हैं कि बिजली तो हर घर पहुंची है लेकिन लोग एक दो किलोमीटर से केबल बांस-बल्ली के सहारे घर तक ले आए हैं। कई जगह काफी नीचे से केबल सड़क के आरपार गुजरी है। ट्रैक्टर या अन्य वाहन पर ऊंचाई पर लदे सामान से केबल टूट जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि सभी पुरवों में पोल लगवाने के लिए कई बार मांग की गई लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है। .. जरा हमारी भी सुनिए.... गांव से गुजरा नाला भुपियामऊ के पास से गुजरी नहर से आया है। इसकी कभी सफाई नहीं होती। स्कूल वैन से दीवार गिरने के बाद बनवाने की जरूरत नहीं समझी गई। शिवपूजन दुबे पांडेय का पुरवा में बिजली पूरी तरह से बांस-बल्ली के सहारे गई है। इससे केवल बल्ब आसानी से जलता है। सबमर्सिबल पंप चलाने पर केबल स्पार्क कर जलने का डर रहता है। राममूर्ति दूर से खींची गई केबल अक्सर गर्मी में जलने के बाद लोगों को कई दिन तक बिना बिजली के रहना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों से भी कहा गया लेकिन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। जगदीश प्रसाद पूरी ग्राम पंचायत तराई इलाके में है। यहां वाटर लेवल काफी नीचे है। जलजीवन मिशन की बोरिंग का अभी पता नहीं है। सभी पुरवे के लोगों को पेयजल के लिए परेशानी हो रही है। ज्ञानेंद्र दुबे गांव में एक जगह सार्वजनिक सबमर्सिबल पंप लगाया गया है। वहां करीब के पुरवे के लोग तो आ जाते हैं लेकिन दूर के लोगों को परेशानी हो रही है। मयूरेश दुबे ग्राम पंचायत में कई जगह खारा पानी है। जलजीवन मिशन की बोरिंग इसी कारण दो जगह फेल हो गई। तीसरी जगह उपयुक्त पानी निकला है लेकिन इसकी सप्लाई कब तक मिलेगी पता नहीं। विशाल दुबे कई लोगों ने गांव में रास्ता न होने के कारण गांव से बाहर निकलकर घर बना लिया है। इसके बावजूद उनकी दिनचर्या गांव के रास्तों के कारण प्रभावित हो रही है। अनुज द्विवेदी पानी के पीने की समस्या है। गांव में एक ही हैंडपंप से कई घरों के लोग पानी भरते हैं। अभी दो महीने पहले बोरिंग शुरू की गई। इससे जलापूर्ति कब तक होगी पता नहीं। रामआसरे सरोज रात को टेढ़े मेढ़े रास्तों पर चलना आसान नहीं होता। हर मोड़ पर डर बना रहता है। सभी रास्ते इतने घुमावदार हैं कि आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। नीरज बोले जिम्मेदार खजुरनी ग्राम पंचायत की पुलिया के लिए गांव के लोग आए थे। उसके लिए लिखा भी गया था। फिर से प्रयास करके पुलिया निर्माण कराया जाएगा। बिजली की समस्या के लिए विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर समाधान कराया जाएगा। राजेंद्र मौर्य सदर विधायक

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