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 बोले बेल्हा : रास्ते में जलभराव से आवागमन हुआ मुश्किल

बोले बेल्हा : रास्ते में जलभराव से आवागमन हुआ मुश्किल

संक्षेप:

Pratapgarh-kunda News - कुंडा ब्लॉक के जाखामई गांव में पक्का रास्ता नहीं है और खड़ंजा उखड़ने से जलभराव की समस्या बढ़ गई है। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी खराब है। ग्रामीणों ने अधिकारियों से समस्याओं के समाधान की मांग की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

Nov 10, 2025 02:54 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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कुंडा ब्लॉक का जाखामई गांव में पक्का रास्ता नहीं है, मार्ग पर जो खड़ंजा था उसे भी मरम्मत के लिए उखाड़ दिया गया। फिर उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। रास्ते में कई महीनों से जलभराव है। उसी कीचड़भरे रास्ते से लोगों को आना जाना पड़ता है, लेकिन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इससे बहुत परेशानी हो रही है। नाला और नालियां बनी हैं लेकिन उनकी सफाई न होने से मक्खी मच्छरों की संख्या काफी अधिक हो गई है। सार्वजनिक शौचालय बदहाल स्थिति में है। उसके दरवाजे तक नहीं बंद होते। लोग जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से कई बार मांग कर चुके हैं लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

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इससे समस्याओं से निजात नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से समस्याओं को साझा करते हुए जल्द इससे निजात दिलाने की मांग की है। जाखामई गांव में आवागमन के लिए बिछाया गया खड़ंजा बहुत पुराना हो चुका था। इससे वह नीचे हो गया था और उसके दोनों तरफ बने लोगों के घर ऊपर हो गए थे। कुछ महीने पहले खड़ंजे को ऊपर करने के लिए उखाड़ा गया तो फिर दोबारा उस पर काम नहीं लगा। इससे रास्ते से ईंट हट गई और वह लोगों के घरों से पहले की अपेक्षा और अधिक नीचे हो गया। इससे बरसात के अलावा लोगों के घरों से निकलने वाला पानी भी इसी रास्ते पर जमा रहता है। पानी से कच्ची मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो गई है। इससे रास्ता इस कदर खराब हो गया है कि उसमें बाइक व चार पहिया वाहन तो दूर पैदल और साइकिल से निकलना भी मुश्किल हो गया है। दलित बस्ती में 50 से अधिक घर इसकी चपेट में आ गए हैं। यही हाल पसियान टोला और कालू राम का पुरवा का भी है। यहां भी खड़ंजा उखाड़ देने से रास्ते पर जलभराव हो गया है। इससे लोगों को आवागमन में बहुत परेशानी हो रही है। बरसात में उक्त रास्ते तालाब बन गए थे। उनमें इतनी अधिक संख्या में मेढक इकट्ठा हो गए थे कि उनकी आवाजों के शोर से रात में नींद नहीं आती थी। इस पानी के जरिए कीड़े मकोड़े लोगों के घरों में रसोईं तक पहुंचकर परेशानी पैदा कर रहे हैं। इन्हीं परेशानियों से निजात दिलाने के लिए लोग बार-बार गुहार लगा रहे हैं। लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की कोई पहल नहीं हो रही है। जहां इंटरलॉकिंग लगी है वहां भी हालत बहुत अच्छे नहीं हैं। इंटरलॉकिंग के जोड़ों में इतनी अधिक चौड़ी दरार आ गई है कि उसमें लोगों के पैर की उंगलियां व अंगूठे फंसकर चोटहिल हो रहे हैं। ऐसे में फसल का बोझ लेकर बिना चप्पल के कोई किसान उक्त इंटरलॉकिंग पर नहीं जाना चाहता। हालांकि इंटरलॉकिंग पर जलभराव की समस्या नहीं है। फिर भी उसमें आई दरारों को देखते हुए लोग उसकी भी मरम्मत की मांग कर रहे हैं। ताकि फसल लेकर आते समय कोई चोटहिल न हो। . 447 शौचालय फिर भी नहीं सुधरी सफाई खुले में शौच पर रोक लगाकर गांव की सफाई की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए गांव में पांच साल पहले सार्वजनिक शौचालय बनाया गया। इसके अलावा 447 लोगों को शौचालय का अनुदान दिया गया। लेकिन लोगों का कहना है कि मौके पर 50 फीसदी शौचालय भी नहीं उपलब्ध हैं। सार्वजनिक शौचालय भी ग्रामीणों के काम नहीं आ रहा है। उसके दरवाजे टूटे हुए हैं। जो दरवाजे नहीं टूटे हैं उनकी कुंडी गायब है। ऐसे में वह गांववालों के काम नहीं आ पा रहा है। इससे जिस उद़्देश्य से इतनी अधिक संख्या में गांव को शौचालय दिए गए थे वह ठंडे बस्ते में चला गया है। सबकुछ वैसे ही है जैसे शौचालय बनने के पहले चल रहा था। गंदगी से बजबजा रहे नाला, नालियां गांव में सड़क किनारे बने नाले व गांव में बनी नालियों की सफाई नहीं होती। इससे उसमें गंदगी सड़कर बजबजाती रहती है। इसमें पैदा हो रहे मच्छर व मक्खियां लोगों के बीच बीमारी का खतरा बढ़ा रही हैं। इनसे उठने वाली दुर्गंध कई बार लोगों के घरों की भीतर तक सबको परेशान कर देती है। फिर भी इनकी सफाई नहीं कराई जा रही है। इससे गंदगी की समस्या बढ़ती जा रही है। शाम होते ही मच्छरों के झुंड लोगों को ही नहीं उनके मवेशियों को भी परेशान करने लगते हैं। इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई है कि धुंआ भी इन पर बेअसर दिखता है। जब तक धुंआ रहता है तभी तक लोगों को इनके डंक से राहत रहती है। जैसे ही धुंआ अपनी दिशा बदलता है मच्छरों का झुंड फिर हमला कर देता है। यही हाल मक्खियों का है। उनकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि पानी की बाल्टी से लेकर रसोई तक हर जगह उड़ती रहती हैं। इन मक्खियों के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसलिए लोग नाला और नालियों की नियमित सफाई की मांग कर रहे हैं। पसियाना टोला में एक घर के पास नाली टूट गई है। वहां से नाली की गंदगी व संक्रमित पानी आसपास जमा होकर परेशानी पैदा कर रहा है। कई बार शिकायत के बाद भी उसकी मरम्मत नहीं हो रही है। जिससे समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। गांव में नहीं बनी पानी टंकी जिले में जमीन के नीचे मिलने वाले पानी में फ्लोराइड सहित अन्य खतरनाक अशुद्धियों की मात्रा इतनी अधिक है लोगों की हड्डियां, दांत, बाल आदि प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए जलजीवन मिशन के तहत जिले के सभी गांव में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों की लागत से बोरिंग कराई गई हैं। जिस गांव की बोरिंग में पीने योग्य पानी नहीं निकल रहा है उसे उस गांव से पानी लाकर सप्लाई किया जा रहा है जहां के पानी की गुणवत्ता ठीक है। लेकिन जाखामई इससे अछूता बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पुराने जमाने से जिस हैंडपंप आदि के सहारे उनकी पेयजल की व्यवस्था चल रही थी वही आज भी है। यहां न तो बोरिंग हुई है और न ही पानी की टंकी बनी है। किसी दूसरे गांव से भी पानी की सप्लाई के लिए यहां पाइप नहीं बिछाई गई है। .जरा हमारी भी सुनिए... खड़ंजा हटने पर बरसात के समय से ही गांव के रास्ते इतने खराब हो गए कि स्कूली बच्चे उसमें फिसलकर गिर जाते हैं। इससे उनकी साइकिल, बस्ता व कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं। ऐसे में बच्चा उस दिन स्कूल नहीं जा पाता है। रास्ता न होने की वजह से स्कूली वाहन गांव में नहीं आते हैं। इसलिए जल्द से जल्द खड़ंजे की मरम्मत कराई जानी चाहिए।। -दिनेश कुमार खड़ंजा उखाड़ने के बाद से गांव में एंबुलेंस को रास्ता मिलने में परेशान हो रही है। इससे मरीजों को बहुत परेशानी होती है। यदि अचानक कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने में ही इतनी देर हो जाती है कि उसकी हालत नाजुक हो जाती है। -अमित कुमार रास्ते पर कीचड़ होने से स्कूली बच्चों को बहुत परेशानी हो रही है। जिस रात बरसात अधिक हो जाती है उसकी अगली सुबह स्कूल जाने के लिए पैदल रास्ता भी नहीं बचता। ऐसे में या तो उखाड़े गए खड़ंजे की जल्द मरम्मत कराई जाए अथवा एक पक्का सम्पर्क मार्ग अवश्य बनना चाहिए। ताकि बच्चों की पढ़ाई न बाधित हो। -दिनेश गांव में लड़की की शादी देखने आने वाले लोग भी रास्ते की खस्ता हालत देख चौंक जाते हैं। लोग इसे भी एक कमी के रूप में देखते हैं। इससे भी गांव में एक अदद स्थायी पक्का रास्ता बहुत जरूरी है। किन्तु बार-बार मांग करने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। -आशीष सोनकर सबसे ज्यादा समस्या तो बुजुर्गों को होती है। वे यहां के कीचड़युक्त रास्तों पर फिसलकर गिरते हैं और उनको गंभीर चोट आ जाती है। फ्रैक्चर हो जाने पर हालत गंभीर हो जाती है। उम्र अधिक होने के चलते डॉक्टर हड्डी जुड़ना मुश्किल बताने लगते हैं। ऐसे में एक रास्ता गांव में ऐसा होना चाहिए जिस पर बरसात में भी आवागमन हो सके। -शांति जलभराव के चलते रास्तों पर कीचड़ हो गया है। इससे छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचाना बहुत कठिन हो गया है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बार मांग की जा चुकी है। किन्तु मांग सुनी नहीं जा रही है। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है। हम लोगों को जल्द से जल्द उक्त समस्याओं से निजात दिलाई जानी चाहिए। -मोशनी जलभराव से मच्छरों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि धुंआ करने का असर ही नहीं दिखता। पहले शाम को एक बार धुंआ कर देने पर घंटों तक के मच्छरों से राहत मिल जाती थी। किन्तु अब जब तक और जितनी दूर तक धुंआ रहता है वहीं तक मच्छरों से राहत रहती है। मच्छर इतने अधिक हैं कि धुंआ हटने के पहले ही उनकी आवाज कान में सुनाई देने लगती है। -पूजा खडंजा उखड़ा होने की वजह से फसल का बोझ लेकर उस पर चलना कठिन हो गया है। खड़ंजे की ईंट हट जाने से मिट्टी के नीचे धंसे ईंट पत्थर के टुकड़ों पर पैर पड़ने से मुड़ जा रहा है। इससे असंतुलित होकर किसान चोटहिल हो जा रहे हैं। गांववालों को बहुत परेशानी हो रही है। फिर भी उसकी मरम्मत नहीं की जा रही है। -अरुण गौतम गांव में जलभराव होने के बावजूद सफाई व्यवस्था कमजोर है। इससे गंदगी बढ़ गई है। बरसात में बजाबजा रही गंदगी मन खराब कर देती है। लेकिन न तो जल निकासी का इंतजाम किया जा रहा है और न ही सफाई बढ़ाई जा रही है। लोग गंदगी से परेशान हैं। खड़ंजा निर्माण के साथ सफाई की गुणवत्ता सुधारने की मांग की जा रही है फिर भी जिम्मेदारों खामोश हैं। -मक्खन लाल सोनकर खड़ंजा उखड़ने के बाद बचे हुए कच्चे रास्तों की दशा बहुत खराब हो गई है। इस पर इतना कीचड़ हो गया है कि साइकिल का ही नहीं पैदल चलते समय खुद का संतुलन बनाने में भी लोग अक्सर फेल हो जाने से कीचड़ में गिर जा रहे हैं। लेकिन हमारी पीड़ा न तो अधिकारियों को दिखाई दे रही न जनप्रतिनिधियों को दिख रही है। -कुलदीप कच्चे रास्ते पर बारिश के समय से मिट्टी इतनी मुलायम हो गई है कि उसमें लाठी भी धंस जाती है। ऐसे में लाठी के सहारे खेत जाने वाले बुजुर्गों को बहुत परेशानी हो रही है। हल्की सी भी बरसात होने पर वे खुद को अपने घर में नजरबंद महसूस करने लगते हैं। इसलिए कई बार मांग की जा चुकी है कि कम से कम पुराने खडंजे की ही मरम्मत करा दी जाए। -संदीप गौतम सार्वजनिक शौचालय की दशा इतनी खराब है कि उसके संचालकों के अलावा वह और किसी गांववाले काम नहीं आ रहा है। कुंडी ही नहीं दरवाजे तक टूट गए हैं। इससे लोगों को शौचालय आसानी से नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। रास्ता खराब होने की वजह से शौच के लिए घर से दूर जाना भी लोगों के लिए बहुत कठिन हो गया है। -आनंद तिवारी गांव में रास्ता, शौचालय, नाली की सफाई आदि समस्याएं बहुत परेशान कर रही हैं। लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। शौचालय पांच साल पहले बनाया गया लेकिन उसकी हालत इतनी खराब हो गई है कि वह गांववालों के काम नहीं आ रहा है। इसी तरह नाले और नालियों की सफाई न होने से गंदगी बजबजाती रहती है। इससे बहुत परेशानी हो रही है। -राजू कुमार .......................................................... बोले जिम्मेदार मौके पर टीम भेजकर समस्याओं की पड़ताल कराई जाएगी। यदि समस्या के लिए कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई कराते हुए समस्याओं का निस्तारण कराया जाएगा। -प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, बीडीओ कुंडा