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बोले बेल्हा : रास्ता मांग रहा ट्रांसफॉर्मर, गांववाले कर रहे पेयजल का इंतजार

बोले बेल्हा : रास्ता मांग रहा ट्रांसफॉर्मर, गांववाले कर रहे पेयजल का इंतजार

संक्षेप:

Pratapgarh-kunda News - सदर विधानसभा क्षेत्र के पतांवा, टेकार और बरासराय गांवों में ट्रांसफार्मर तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। इससे बिजली में बार-बार कटौती होती है और मरम्मत में भी समस्या आती है। गांववाले कई वर्षों से ट्रांसफार्मर को ऐसी जगह लगाने की मांग कर रहे हैं जहां तक पहुंचना आसान हो। जलजीवन मिशन के तहत पानी की सप्लाई भी नहीं हो रही है।

Jan 31, 2026 04:34 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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सदर विधानसभा क्षेत्र के पतांवा, टेकार और बरासराय तीन गांवों को बिजली की सप्लाई करने वाले ट्रांसफॉर्मर तक जाने के लिए रास्ता नहीं है। ऐसे में ट्रांसफॉर्मर के पास कोई भी खराबी आने पर कई दिन तक मरम्मत नहीं हो पाती। इससे तीनों गांवों की बिजली गुल हो जाती है। लोगों के खेतों में लगे नलकूप से लेकर घर में लगे उपकरण तक ठप हो जाते हैं। इससे खेती करने वालों से लेकर नौकरी पेशा तक गांव के सभी लोग परेशान हो जाते हैं। जलजीवन मिशन की पाइप लोगों के घरों तक बिछाकर छोड़ दी गई है। लेकिन उसमें पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है।

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इससे बिजली न रहने पर पेयजल की समस्या भी पैदा हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए ग्रामीण कई दशकों से ट्रांसफॉर्मर को ऐसी जगह लगाने की मांग कर रहे हैं जहां आसानी से लाइनमैन आदि पहुंच सकें और समय पर मरम्मत कर बिजली की सप्लाई बहाल की जा सके। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार लोग उनकी मांगों पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। इससे समस्या जस की तस बनी हुई है और बार-बार परेशान कर रही है। परेशान ग्रामीणों ने आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान से पीड़ा साझा करते हुए जल्द समाधान की मांग उठाई है। पतांवा और टेकार गांव के बीच बिजली विभाग ने 63 केवीए का ट्रांसफॉर्मर लगाया है। इस ट्रांसफॉर्मर से टेकार और पतांवा के अलावा बरासराय गांव को भी बिजली की सप्लाई की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रांसफार्मर को खेतों के बीच में लगा दिया गया है। वहां तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में जब ट्रांसफॉर्मर में कोई खराबी आती है तो उसकी मरम्मत में रास्ते की समस्या आड़े आ जाती है। इससे कई दिन तक मरम्मत नहीं हो पाती। ऐसे में बिजली सप्लाई बाधित रहती है। जिससे तीन गांव के लोग परेशान हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि रास्ता इतना भी नहीं है कि कोई पैदल भी जा सके। इससे बिजली विभाग ट्रांसफॉर्मर की नियमित देखभाल भी नहीं कर पाता। इससे प्यूज उड़ने, कार्बन व ट्रांसफॉर्मर में खराबी आदि तरह-तरह की दिक्कतें आने से बार-बार बिजली बाधित हो जाती है। इससे अधिक पीड़ा तब होने लगती है जब रास्ते के अभाव में मरम्मत का बाधित हो जाता है। कई दिन तक मरम्मत न हो पाने से बिजली की सप्लाई बहाल नहीं हो पाती। गांववालों का कहना है कुछ साल पहले ट्रांसफॉर्मर खराब हुआ तो डेढ़ महीने तक बत्ती गुल रही थी। इतने लंबे समय तक बिजली न आने से तीनों गांव के लोग परेशान हो उठे थे। उनके अधिकांश काम बाधित हो गए थे। खेती ही नहीं पशुपालन तक प्रभावित हो गया था। रोजमर्रा की दिनचर्चा काफी कठिन हो गई थी। रवीन्द्र सरोज आदि ग्रामीणों का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर की जितनी क्षमता है उतनी बिजली की जरूरत अकेले टेकार गांव में ही पड़ती है। जबकि इसी ट्रांसफार्मर से पतांवा व बरासराय गांव को भी बिजली की सप्लाई की जाती है। इससे ट्रांसफॉर्मर पर ओवरलोड पड़ता है। देखभाल के अभाव में पहले से ही उपेक्षित पड़े ट्रांसफॉर्मर पर ओवरलोड होने से फॉल्ट आने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। जबकि बिजली विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को भी पता है कि इस ट्रांसफॉर्मर तक जाकर मरम्मत का काम बहुत कठिन है। ट्रांसफॉर्मर तक जाने का रास्ता बोए हुए खेतों की खड़ी फसल से ही है। जिससे किसानों की फसल खराब हो जाती है। इसीलिए लोग बार-बार ट्रांसफॉर्मर ऐसी जगह लगाने की मांग कर रहे हैं जहां तक चार पहिया वाहन आसानी से आ जा सकें। इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर की क्षमता बढ़ाने की मांग भी की जा रही है। लेकिन उनका कहना है कि विभाग उनकी एक भी मांग पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। जबकि इससे तीन गांव के लोग पीड़ित हैं। उनके मुताबिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर के पास कोई भी फॉल्ट आने पर जब बिजली विभाग को सूचना दी जाती है तो कर्मचारी आनाकानी करते हैं। संबंधित कर्मचारियों का याद आ जाता है कि उक्त ट्रांसफॉर्मर तक जाने का रास्ता ही नही है, यदि किसी के दबाव में वे किसानों की फसल से होकर गए और खड़ी फसल को नुकसान हुआ तो उनके साथ दिक्कत हो सकती है। इसलिए कर्मचारी वहां जाने से बचने का प्रयास करते हैं। यदि आ गए तो रास्ते की समस्या रहती है। समस्या तीन गांवों की रहती है इसलिए गांववाले उन किसानों से गुजारिश करते हैं जिनकी फसल ट्रांसफॉर्मर के रास्ते में आ रही होती है। किसी तरह मरम्मत का काम शुरू हो पाता है। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बहाल होने में कई दिन लग जाते हैं। जबकि लोगों का कहना है कि जहां ट्रांसफॉर्मर तक जाने का सीधा रास्ता है वहां ऐसी समस्याएं आने पर कुछ ही घंटे में मरम्मत कर सप्लाई बहाल कर दी जाती है। इसलिए इस ट्रांसफॉर्मर को भी सुविधाजनक स्थान पर शिफ्ट करना चाहिए। इसके अलावा गांव में जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपों में पानी की सप्लाई न शुरू किए जाने से भी लोग परेशान हैं। वे इसे जल्द चालू करने की मांग कर रहे हैं। आग की भेंट चढ़ जाती है किसानों की फसल गांव के किसानों का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर पर लोड अधिक बढ़ने पर चिंगारी आदि निकलने की घटनाएं हो जाती हैं। इससे गर्मी के मौसम में तैयार फसल में आग लग जाती है। आग लगने पर बुझाने के लिए पानी लेकर दमकल भी मौके तक नहीं पहुंच पाती। ट्रांसफॉर्मर के पास रास्ता न होने के चलते दमकल को पहले ही रुकना पड़ जाता है। ऐसे में गांववाले आग को पीटकर किसी तरह बुझाते हुए फैलने से रोकने का प्रयास करते हैं। इसलिए लोग मांग कर रहे हैं कि या तो आग लगने की मुख्य वजह बनने वाले बिजली के ट्रांसफॉर्मर को फसलों के बीच से हटा दिया जाय अथवा वहां तक जाने के लिए सार्वजनिक रास्ते का इंतजाम किया जाए। रास्ते के लिए जमीन नहीं है ऐसे में ट्रांसफॉर्मर को किसी ऐसी जगह लगाया जाए जहां से आग फैलने का खतरा कम से कम और चार पहिया वाहन पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता हो। जरा हमारी भी सुनिए इस ट्रांसफॉर्मर से तीन गांवों को बिजली जाती है। लेकिन खुद ट्रांसफॉर्मर तक जाने के लिए रास्ता नहीं है। ऐसे में ट्रांसफॉर्मर की समय-समय पर देखभाल नहीं हो पाती। इसी महीने 15 जनवरी को ट्रांसफॉर्मर खराब हुआ तो पता चला कि उसका तेल सूख चुका है। इसलिए वह फुंक गया है। यदि समय पर यह देखा गया होता कि उसमें तेल कम हो रहा है तो उसे फुंकने से बचाया जा सकता था। -सूरज ट्रांसफॉर्मर में छोटी भी खराबी आने पर कई दिन तक तीन गांव में बिजली की समस्या पैदा हो जाती है। इसके समाधान के लिए कई साल से गांववाले प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार लोगों का सक्रिय सहयोग न मिल पाने से इतने साल बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इसका जल्द हल खोजा जाना चाहिए। -अर्जुन बिजली की समस्या फसलों की सिंचाई के समय आती है तो पूरी खेती चौपट हो जाती है। पैदावार पर इतना बुरा असर पड़ता है कि जुताई की लागत भी नहीं निकल पाती। इसलिए ट्रांसफॉर्मर का कोई न कोई विकल्प जल्द खोजकर समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए। हम लोग सालों से नुकसान उठाते चले आ रहे हैं फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -वीरेंद्र मिश्रा बिजली न आने से पेयजल की समस्या भी परेशानी बढ़ाने लगती है। दरअसल अभी तक इस ट्रांसफॉर्मर से प्रभावित गांवों में पेयजल के लिए जल जीवन मिशन योजना के तहत सप्लाई चालू नहीं की गई है। ऐसे में लोग पानी के लिए निजी सबमर्सिबल पम्पों के सहारे हैं। जो बिजली न आने पर नहीं चल पाते। इससे लोगों को दैनिक इस्तेमाल के लिए भी पानी की किल्लत हो जाती है। -महेन्द्र मौर्य ट्रांसफॉर्मर से निकलने वाली चिंगारी से जब फसल में आग लगती है तो पूरे छह महीने की कड़ी मेहनत व महंगी लागत राख हो जाती है। पीड़ा तब और बढ़ जाती है जब दमकल आने के बाद भी खेत तक रास्ता न होने की वजह से नहीं पहुंच पाती। इसलिए जल्द से जल्द इसका समाधान किया जाना चाहिए। -राजाराम ट्रांसफॉर्मर के पास चिंगारी निकलने से लगनी वाली आग में किसानों की महीनों की गाढ़ी कमाई पल भर में राख में बदल जाती है। फिर भी इस ट्रांसफॉर्मर को फसलों के बीच से हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि गांववाले कई सालों से इसकी मांग करते आ रहे हैं। फिर भी अनसुना कर दिया जा रहा है। -गौतम गांव में पेयजल की समस्या से लोगों को क्या-क्या बीमारियां हो रही हैं इसकी जांच भी कभी नहीं की जाती। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए लोगों के घरों तक पाइप बिछाकर टोंटी लगाने के लिए छोड़ दी गई है। लेकिन उसमें आज तक एक बार भी पानी नहीं आया। बताया जाता है कि अभी पानी की टंकी भी नहीं बनी है। इससे गांववालों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। -राजेश कुमार जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पेयजल की आपूर्ति जल्द से जल्द शुरू करानी चाहिए। ताकि लोगों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचाने में मदद मिल सके। इसकी सप्लाई शुरू हो जाने से बिजली के ट्रांसफॉर्मर में खराबी आने पर पेयजल की समस्या नहीं बनेगी। फिर भी जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। -मलखान ट्रांसफॉर्मर तक जाने का रास्ता न होने के चलते लाइनमैन उसका रूटीन चेकअप भी नहीं कर पाते। इससे वह उपेक्षित पड़ा रहता है। शायद यही वजह है कि ट्रांसफॉर्मर का तेल सूख गया लेकिन विभाग को पता भी नहीं चला। ट्रांसफॉर्मर बिना तेल के गर्म होकर चलते-चलते फुंक गया तब विभाग को पता चला। जबकि समय पर तेल डाल दिया गया होता तो ट्रांसफॉर्मर भी बचा रहता और आपूर्ति भी न बाधित होती। -राजमणि ट्रांसफॉर्मर की वजह से बिजली बाधित होती है तो पेयजल की समस्या भी खड़ी हो जाती है। ऐसे में जल जीवन मिशन के तहत लोगों के दरवाजों तक बिछाई गई पाइपें सबको याद आती हैं। लेकिन धूल फांक रही उक्त पाइप पेयजल की समस्या से राहत नहीं दे पा रही हैं। लोग व्यवस्था को कोसकर फिर पानी के जुगाड़ में लग जाते हैं। जबकि इसे चालू कर दिया जाए तो गांववालों की परेशानी खत्म हो जाएगी। -हर्षित ट्रांसफॉर्मर से चिंगारी निकलने पर फसलों में आग लगती है तो रास्ता न होने से बुझाने के लिए दमकम काम नहीं आ पाती। इससे आग को बुझाने के लिए आसपास मौजूद अरहर जैसी हरी फसलों, झाड़ियों व पेड़ों की डालियों आदि का इस्तेमाल किया जाता है। उनसे पिटाई कर आग बुझाने में काफी समय लग जाता है। इससे अधिक मात्रा में फसल जल जाती हैं। -सोनू ट्रांसफॉर्मर के लिए ऐसी जगह होनी चाहिए जहां साल के बारह महीने कभी भी चार पहिया लोडर वाहन जा पाएं। लेकिन इस ट्रांसफॉर्मर को जहां लगाया गया है वहां साइकिल जाने का भी रास्ता नहीं है। ऐसे में ट्रांसफॉर्मर की जगह बदलकर ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए जहां आसानी से उसकी सर्विसिंग, मरम्मत हो सके। -संजय पाल गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बहुत जरूरी हो गई है। इसके लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च भी किए। किन्तु लेट लतीफी के चलते अभी तक इससे लोगों के घरों तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई है। इसे जल्द चालू कराना चाहिए। -मोहनलाल गांववालों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट दिया। इसके बाद भी पानी की आपूर्ति शुरू कराने की बजाय हीलाहवाली ही चल रही है। पानी की पाइप बिछा दी गई लेकिन अभी टंकी का निर्माण ही नहीं हुआ है। इससे पानी की सप्लाई नहीं शुरू हो पा रही है। -रविन्द्र सरोज बोले जिम्मेदार गांव की उक्त समस्याओं के बारे में संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान कराया जाएगा। -राजेन्द्र मौर्य, सदर विधायक