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बोले बेल्हा : रास्ता और पेयजल की दोहरी मार से गांव बदहाल

बोले बेल्हा : रास्ता और पेयजल की दोहरी मार से गांव बदहाल

संक्षेप:

Pratapgarh-kunda News - बेहटा गांव में सड़कें और शौचालय की स्थिति बहुत खराब है। गांववालों का कहना है कि सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और दस साल से मरम्मत की मांग कर रहे हैं। सार्वजनिक शौचालय बंद रहते हैं और जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का काम भी अधूरा है। गांववाले अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठा रहे हैं।

Jan 24, 2026 05:30 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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आसपुर देवसरा ब्लॉक के बेहटा गांव में जाने के लिए कहने को तो पक्की काली सड़क है। जबकि गांव के भीतर आवागमन के लिए कई खड़ंजे व चकमार्ग हैं। लेकिन काली सड़क से चकमार्ग तक सबकी हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि दूर से देखने पर तीनों में कोई अंतर नहीं मालूम पड़ता। गांववालों को आवागमन में बहुत परेशानी हो रही है। खड़ंजों की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलने वालों के पैर में ठोकर लग रही है। नाखून उखड़ जा रहे हैं। गांववाले दस साल से मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन न तो सड़क की मरम्मत की जा रही है और न ही खड़ंजों की।

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सार्वजनिक शौचालय और दिव्यांग शौचालय सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं। वहां पानी की व्यवस्था नहीं है, ताला बंद रहता है। इससे लोगों को जरूरत पड़ने पर यह उनके काम नहीं आ पा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पानी आज तक गांव के एक भी घर तक नहीं पहुंच पाया है। पीड़ित ग्रामीणों ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से पीड़ा साझा करते हुए समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाई है। बेहटा गांव से होकर गुजरी नहर की पटरी से गांव में जाने के दिए दो पक्की सड़कें कई साल पहले बनाई गई थीं। गांववालों का कहना है कि बनने के बाद से उक्त में से एक भी सड़क की कभी मरम्मत नहीं कराई गई। सड़क पर डामर कहीं बचा ही नहीं है। गिट्टियां उखड़ गई हैं। अचानक देखने पर लगता है कि कंकड़ वाला चकमार्ग है। लोग कई साल से इन दोनों सड़कों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन एक की भी मरम्मत नहीं कराई गई। इससे उन पर आवागमन बहुत तकलीफ देह हो गया है। पैदल चलने में भी सड़क पर बिखरी गिट्टियां बहुत तकलीफ देती हैं। खड़ंजों की हालत तो इस कदर बिगड़ गई कि ईंट मिट्टी में धंस गई हैं और मिट्टी ईंटों के ऊपर आ गई है। पैदल चलने पर पैर के पंजों में ठोकर लगती रहती है। सिर पर फसल का बोझ लादकर आते समय पैर मुड़ने से मोच आ जाती है। सफाई का हाल भी खराब है। गांववालों के मुताबिक सफाईकर्मी स्कूल तक ही आता है, गांव में सफाई करता नहीं दिखता। इससे गंदगी बढ़ती जा रही है। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए पूरे जिले की तरह यहां भी जल जीवन मिशन के तहत लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम दो साल पहले शुरू हुआ था। लेकिन काम इतना धीमा है कि लोगों को बहुत निराशा हो रही है। लोगों का कहना है कि दो साल पहले पानी की टंकी बनने का काम शुरू हुआ। लेकिन अभी तक बोरिंग से आगे काम नहीं बढ़ पाया है। इससे लोग अभी भी हैंडपम्प आदि के सहारे पेयजल का काम चला रही है। जबकि लोगों को बताया गया था कि उनके दरवाजे तक पाइप बिछाकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। लेकिन वह दूर-दूर तक होती नहीं दिख रही है। गांववालों ने इसकी शिकायत भी की फिर भी पानी की टंकी का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। किसी के काम नहीं आ पा रहे शौचालय बेहटा गांव में सामुदायिक शौचालय के साथ दिव्यांगों के लिए भी अलग से शौचालय बनाया गया है। लेकिन गांववालों का कहना है कि सरकार ने इनके लिए भले ही लाखों रुपये का बजट दे दिया पर ये शौचालय किसी के काम नहीं आ रहे हैं। उनमें ताला बंद रहता है। ताला कब खुला था किसी को याद भी नहीं। ध्यान से देखने पर पता चलता है कि दरवाजे की पेंटिंग होते समय भी ताला नहीं खोला गया था बल्कि ताला सहित पेंट कर दिया गया था। यही हाल दिव्यांगों के लिए बने शौचालय का है। सबसे बड़ी समस्या, दोनों शौचालयों में पानी का इंतजाम तक नहीं है। हमारी भी सुनें नहर से गांव के भीतर आने वाली सड़क जब टूटना शुरू हुई तभी से इसके मरम्मत की मांग की जा रही है। लेकिन इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। इससे आवागमन में बहुत परेशानी हो रही है। जबकि इसकी मरम्मत करा दी जाए तो लोगों को आवागमन में बहुत सुविधा होगी। लेकिन जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। - रामलाल सड़क की हालत इतनी खराब हो गई है कि इस पर पैदल चलने में भी गिरकर चोटिल होने का खतरा बना रहता है। इसकी जल्द से जल्द मरम्मत कराई जानी चाहिए। मरम्मत के लिए कई बार आश्वासन दिया गया लेकिन अभी तक एक बार भी काम नहीं लगाया गया। जबकि यह सड़क गांव का रोज का मुख्य रास्ता है। -गंगा प्रसाद यादव गांव में लोगों की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय बना है। लेकिन उसमें ताला बंद रहता है। ऐसे में अचानक जरूरत पर भी वह गांव वालों के काम नहीं आ रहा है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय बनाने का गांववालों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसा लगता है कि इसे सिर्फ अधिकारियों की चेकिंग में दिखाने के लिए ही बनाया गया है। -शीला गांव में सफाई कर्मचारी न आने के कारण कचरा रास्तों के किनारे फैलता रहता है। इससे आने-जाने वाले राहगीरों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत की गई फिर भी सफाई नहीं कराई जा रही है। इससे चारों ओर गंदगी बिखरी रहती है। गांववालों को इससे बहुत परेशानी हो रही है। लेकिन सफाई पर फिर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। -अमरावती गांव में बने दिव्यांग शौचालय में ताला बन्द रहने से उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। जरूरत पड़ने पर दिव्यांगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही हाल सार्वजनिक शौचालय का भी है। रात में महिलाओं और बच्चों को शौच जाने के लिए जंगली जानवरों का भय बना रहता है। फिर भी सार्वजनिक शौचालय का ताला नहीं खोला जा रहा है। दोनों को चालू करना चाहिए। -देवी प्रसाद पांडेय सड़क खराब हुए कई साल बीत गए। हर साल इसकी मरम्मत का आश्वासन मिलता है लेकिन कभी सड़क पर काम नहीं शुरू किया गया। जबकि सड़क जर्जर हो चुकी है। दूर से देखने पर वह सड़क की बजाय कच्चा चकरोड दिखती है। जब सड़क की ऊपरी परत टूटनी शुरू हुई तभी से शिकायत की जा रही है। लेकिन सड़क का काला हिस्सा गायब हो गया लेकिन मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया। -शोभा गांव की सड़कों पर बरसात में पानी भर जाता है। इससे उस पर आवागमन बहुत कष्टदायी हो जाता है। यदि सड़क की मरम्मत कर दी जाती तो आवागमन में होने वाली दिक्कतों से मुक्ति मिल जाती। इसलिए हम लोग कई साल से सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। लेकिन उस पर जिम्मेदार लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। -महावीर यादव सार्वजनिक शौचालय इसलिए बनाया गया था ताकि गांव के लोगों को खुले में शौच न जाना पड़े। लेकिन सार्वजनिक शौचालय में ताला बंद कर दिया गया है। इससे वह गांववालों के काम नहीं आ पा रहा है। इससे बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। सार्वजनिक शौचालय को गांववालों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराना चाहिए। -बबना गांव का रास्ता बहुत खराब हो गया है। बरसात में गांव से बाहर जाना हो तो समझ में नहीं आता कि कैसे जाएं। इसलिए सड़कों की मरम्मत जल्द से जल्द होनी चाहिए। बिना सड़क की मरम्मत हुए गांववालों को आवागमन में होने वाली परेशानियां दूर नहीं हो पाएंगी। लेकिन जिम्मेदार लोग इस पर तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। -प्रदीप यादव गांव में आने के लिए मुख्य सम्पर्क मार्ग कई साल पहले बनाया गया था। उस समय वह काली और चमकदार सड़क थी। लेकिन समय के साथ वह टूटकर जर्जर हो गई। उसकी गिट्टी तक गायब हो चुकी है। ऐसे में इस पर आवागमन बहुत परेशानी पैदा कर रहा है। इसलिए इसकी मरम्मत जल्द से जल्द होनी चाहिए। -ओम प्रकाश यादव बारिश होने पर कच्चे सम्पर्क मार्ग की मिट्टी धंसने लगती है। उसमें साइकिल के टायर ही नहीं बल्कि बुजुर्गों की लाठी भी धंसने लगती है। ऐसे में लाठी के सहारे खेत जाने वाले बुजुर्गों को बहुत परेशानी होती है। बरसात होते ही वे खुद को अपने ही घर में कैद महसूस करने लगते हैं। इसलिए कई बार मांग की गई कि यहां कम से कम खड़ंजा ही बिछा दिया जाए। लेकिन वह भी नहीं हो रहा है। -सचिन सड़क पर उखड़ी गिट्टियां पैरों के नीचे आ जाती हैं तो इतना तेज दर्द होता है कि चीख निकल जाती है। फिर भी जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि पिछले कई सालों से इसकी मरम्मत नहीं की गई है। इसलिए इसकी जल्द से जल्द मरम्मत कराई जानी चाहिए। ताकि लोगों को इस सड़क से आवागमन में होने वाली तकलीफ से छुटकारा मिल सके। -सोनू काफी समय से इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। जबकि इस दौरान कई जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत और मांग की गई। सबने आश्वासन दिया लेकिन काम एक बार भी नहीं शुरू हुआ। इससे सड़क की मरम्मत नहीं हो पा रही है। लोगों को आवागमन में बहुत तकलीफ उठानी पड़ रही है। इसलिए जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत होनी चाहिए। -सूरज पांडेय सड़क की दशा इतनी खराब हो चुकी है कि बाइक और साइकिल दोनों के टायर इस पर ठीक से संतुलन नहीं बना पाते। दोनों के हैंडल को ताकत लगाकर पकड़ना होता है। अन्यथा ऊबड़ खाबड़ सड़क पर हैंडल कब किस दिशा में अचानक मुड़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। जल्द से जल्द इस सड़क की मरम्मत होनी चाहिए। -प्रवीण बरसात में यहां की सड़कों की हालत और खराब हो जाती है। जहां पर मिट्टी की सड़क (चकमार्ग ) है वहां इतना कीचड़ और पानी हो जाता है कि वाहन फंसने का डर बना रहता है। फंसने से बचने के लिए लोग तेजी से झटके में अपने वाहन कीचड़ के बीच से निकालते हैं। इससे आसपास मौजूद अन्य लोगों पर कीचड़ के छींटें पड़कर उनके कपड़े खराब कर देते हैं। सड़कों की जल्द मरम्मत होनी चाहिए। -पंकज सिंह छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल आने जाने में जब इन जर्जर सड़कों पर पैदल चलना पड़ता है तो वे लड़खड़ाने लगते हैं। उनके जूते बहुत जल्द फट जाते हैं। जबकि सड़क की मरम्मत हो जाए तो बच्चों को कोई परेशानी ही न हो। लेकिन ऐसा न होने से बच्चे भी इस सड़क पर जाने से बचने का प्रयास करते हैं। इसलिए सड़क की मरम्मत जल्द से जल्द होनी चाहिए। -दिनेश जल जीवन मिशन की पानी की टंकी के लिए बोरिंग शुरू हुई तो गांववालों को लगा कि अब उन्हें भी शहरों जैसा शुद्ध पानी पीने को मिलने लगेगा और वे पानी से होने वाली बीमारियों से बच सकेंगे। लेकिन दो साल बाद भी पानी की टंकी नहीं बन पाई। इससे गांववाले अब भी पानी के पुराने श्रोतों से ही पेयजल के लिए निर्भर हैं। -राम सकल यादव गांववालों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बोरिंग कराते हुए पानी की टंकी का निर्माण शुरू हुआ तो हम लोगों को बहुत खुशी महसूस हुई थी। लेकिन काम दो साल बाद भी वैसे ही अधूरा पड़ा है जैसे शुरुआत के समय था। इसे जल्द पूरा कराकर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू करानी चाहिए। लेकिन जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। -सुभाष . बोले जिम्मेदार गांव में टीम भेजकर समस्याओं की पड़ताल कराई जाएगी। उसके बाद जल्द से जल्द उनका समाधान कराया जाएगा। -धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, बीडीओ