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 बोले बेल्हा : फसलों पर बेमौसम बारिश का कहर, 50 फीसदी किसानों की टूटी कमर

बोले बेल्हा : फसलों पर बेमौसम बारिश का कहर, 50 फीसदी किसानों की टूटी कमर

संक्षेप:

Pratapgarh-kunda News - बेल्हा में बेमौसम बारिश ने किसानों की धान की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। 50 प्रतिशत से अधिक किसानों को नुकसान हुआ है। केवल 40,475 किसानों ने फसल बीमा कराया है। बारिश के कारण खेत में पानी भर गया है और फसलें अंकुरित हो गई हैं, जिससे किसानों की स्थिति गंभीर हो गई है।

Nov 03, 2025 05:10 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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बेल्हा के अधिकतर परिवार खेती पर आश्रित हैं और उनकी जीविका का मुख्य साधन भी खेती है। बीते कुछ वर्षों में कृषि और उद्यान विभाग के अफसरों की सहायता से कुछ किसान केला, ड्रैगन फ्रूट की खेती करने लगे हैं लेकिन इनकी संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। इसके अलावा सदर विकास खंड के गोंड़े सहित दर्जनभर गांव के किसान आंवले की खेती से भी अपने परिवार की स्थित मजबूत कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिले के किसान मुख्य रूप से गेंहू और धान की खेती करते हैं, इसे यूं भी कहा जा सकता है कि जिले के 95 फीसदी किसान परम्परागत खेती ही कर रहे हैं।

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बेल्हा में धान की खेती का कुल रकबा 1.47 लाख हैक्टेयर है और धान की खेती करने वाले किसानों की संख्या 3.50 लाख से अधिक है। इसमें से महज 50 हजार किसान समृद्ध किसानों की श्रेणी में माने जाते हैं, शेष किसान सामान्य श्रेणी में गिने जाते हैं। किसान प्रकृति और आसपास उपलब्ध संसाधनों के भरोसे खेती करते हैं। किसी तरह की आपदा आने पर इन किसानों की फसलें खेत में ही चौपट हो जाती हैं। जिससे इन किसानों की खेती में लगाई गई पूंजी भी डूब जाती है। जिल के किसाों पर एक बार फिर आपदा बनकर बीते चार दिन जिले में हुई बेमौसम बारिश का कहर टूटा है। इससे खेत में काटकर रखी गई धान की फसल पूरी तरह से चौपट होने से जिले के 50 फीसदी से अधिक किसानों की कमर टूट गई है। जिससे उबरने में इन किसानों को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। चार दिन बाद बारिश थमी तो आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने ऐसे किसानों से संवाद किया तो किसानों की आंख से आंसू छलक पड़े और बारी-बारी से सबने अपनी पीड़ा बताई।' किसानों के खेत में धान की फसल पूरी तरह से पककर तैयार थी, दीपावली पर्व के कारण फसल की कटाई मड़ाई में कुछ विलंब जरूर हुआ लेकिन बेमौसम बारिश का किसानों को तनिक भी अनुमान नहीं था। जिसका नतीजा किसानों को भुगतना पड़ गया। हालांकि दीपावली के दिन से ही आसमान में बादल उमड़ घुमड़ रहे थे लेकिन लगातार बारिश का अंदाजा किसी को नहीं था। फिलहाल जिन किसानों की फसलें तैयार हो गई थीं उन्होंने ताबड़तोड़ फसल की कटाई शुरू कर दी। कुछ ने मशीन तो कुछ ने मजदूर लगाकर फसल काटना शुरू कर दिया। यही कारण रहा कि तमाम किसानों ने फसल काटकर खेत में ही छोड़ दिया था। इसी बीच मोथा तूफान ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया और मंगलवार की रात से ही जिले मे रिमझिम बारिश शुरू हो गई। मौसम का बदला रुख देखकर कुछ किसानो ने तेजी दिखाई और खेत में रखी फसल उठाकर किसानों ने खलिहाल तक पहुंचा दिया। बावजूद इसके फसलें भीग गईं, उस वक्त किसानों ने सोचा कि एकाध दिन में बारिश थम जाएगी, इसके बाद फसल सुखाकर धान की मड़ाई कर लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लगातार चार दिन चली बेमौसम बारिश किसानों की फसल पर कहर बनकर बरसी। जिसे खेतों में पानी भर गया और किसान अपनी आंखों से मेहनत से तैयार की गई फसल की बर्बादी देखते रहे। दरअसल किसान ऐसे हालात में कुछ कर भी नहीं सकते थे। ऐसे में खेत किनारे खड़े होकर अपनी बर्बादी को आंखों से देखते रहे। चार दिन की बेमौसम बारिश से खेतों में पानी भर गया और काटकर छोड़ी गई धान की फसल पानी में तैरने लगी। शनिवार को दोपहर बाद मौसम कुछ साफ दिखा तो किसान पूरे परिवार के साथ खेत में पहुंच गए और पानी में तैर रही फसल उठाकर किनारे रखने लगे लेकिन भीग चुके धान अंकुरित हो चुके हैं, जिसे देखकर किसानों के मुंह से आह निकल गई। बावजूद इसके किसान पुआल के लिए फसलें पानी से निकालकर सुखाते दिखे। किसान बताते हैं कि धान की जो फसलें पककर खेत में खड़ी हैं उन्हें काटने में भी दिक्कत है, कारण खेत में पानी हो जाने से कटाई करना आसान नहीं रह गया है। खेत में मशीन घुस नहीं पाएगी ऐसे में फसल काटने के लिए खेत सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। यदि हाथ से फसल काटने का प्रयास किया जाएगा तो वह जड़ से उखड़ने लगेगी, ऐसे में अब फसल काटने के लिए तेज धूप होने के बाद भी कम से कम एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ेगा। 40475 किसान ने कराया है फसल बीमा जिले में चार दिन हुई बेमौसम बारिश ने किसानों के खेत में खड़ी धान की फसल पूरी तरह से चौपट कर दिया है। इससे जिले में धान की खेती करने वाले 50 फीसदी से अधिक किसानों की कमर टूट चुकी है। बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई उन्हीं किसानों की हो सकती है जिन्होंने फसल बीमा करवाया है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में धान की खेती करने वाले कुल 3.50 लाख किसानों के सापेक्ष महज 40475 किसान ने ही धान की फसल का बीमा कराया है। कृषि विभाग की ओर से फसल बीमा कराने वाले किसानों से अपील की गई है कि क्षतिग्रस्त फसल की सूचना 72 घंटे के अंदर टोल फ्री नम्बर-1447 पर दे सकते हैं। क्षतिग्रस्त फसल से हुए नुकसान का मुआवजा बीमा कंपनी पीएमएफबीआई करेगी। यदि किसी कारण टोल फ्री नम्बर पर शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे हैं तो अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी की फोटो कॉपी शिकायत पत्र के साथ उप निदेशक कृषि के कार्यालय में जमा कर दें। जिससे क्षतिग्रस्त फसल का आंकलन पर मुआवजे की धनराशि निर्धारित की जा सके। अंकुरित धान सुखाने के बाद भी नहीं बिकेगा किसानों की मानें तो बेमौसम बारिश से खेतों में काटकर रखी गई धान की फसल लगातार भीगने से अंकुरित हो गई है, जिसे धूपे निकलने के बाद सुखाया जा रहा है। हालांकि सुखाने के बाद इसमें कितने फीसदी धान सुरक्षित मिलेगा, यह कहना मुश्किल है। किसाना बताते हैं कि अंकुरित होने के बाद धान खराब हो जाता है। इसे बहुत सुखाने के बाद भी फ्रेश कैटेगरी का धान नहीं माना जाता। क्रय केंद्र पर इसकी तौल करना आसान नहीं होता, केंद्र प्रभारी जांच के बाद ऐसे धान को खरीदने के लिए अयोग्य करार दे देते हैं। ऐसे धान खरीदते समय व्यापारी भी आधी कीमत देने के लिए ही तैयार होते हैं। किसान कहते हैं कि भीगी फसल सुखाने के बाद पुआल भी किसी काम का नहीं होता, इसे मवेशी भी नहीं खाते। ऐसे में कुल मिलाकर यह माना जा सकता है कि पानी से भीग चुकी धान की फसल को सुखाकर लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि बेमौसम बारिश को किसान कहर मानकर देख रहे हैं। बोई गई आलू के खेत में भर गया पानी जिले में अगैती आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए भी बेमौसम बारिश किसी आफत से कम नहीं मानी जा रही है। जिले के तमाम किसान आलू की अगैती खेती कर उसे मंडी भेजते हैं जिससे वह मुनाफा कमा लेते हैं और इसके बाद नवंबर के आखिरी सप्ताह तक उसी खेत में गेंहू की बोआई कर देते हैं। जिले में चार दिनी चली बेमौसम बारिश से विकास खंड शिवगढ़ के जामताली इलाके में आलू और सब्जी की खेती कर परिवार का खर्च चलाने वाले किसानों के खेत में लबालब पानी भर गया है। इससे आलू के बोए गए बीज सड़ जाएंगे, साथ ही खेत में प्रयोग किए गए उर्वरक का भी नुकसान हो गया है। आलू की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि बोई गई फसल तो चौपट हो ही गई है अब दोबारा बोआई करने के लिए खेत तैयार करने में पखवारे भर लग जाएगे, इसके बाद बोआई करने पर आलू की फसल महीने भी पिछ़ड़ जाएगी। बेमौसम बारिश से आलू वाले किसानों को दोतरफा नुकसान हुआ है। जरा हमारी भी सुनिए... जिले में चार दिन बेमौसम बारिश से किसानों की कमर टूट चुकी है। खेत में काटकर रखी गई धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। जिम्मेदार अफसरों को नुकसान की हकीकत जानने के लिए खेतों में जाना चाहिए और नुकसान की भरपाई कराना चाहिए। बृजेश कुमार बेमौसम बारिश से जिले के 3.50 लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। इसके लिए प्रशासन को राज्सव कर्मचारियों से सर्वे कराना चाहिए और किसानों को राहत देने के लिए शासन से पैकेज की मांग करनी चाहिए, जिससे किसानों को राहत मिल सके। नंदलाल बेमौसम बारिश के साथ तेज हवा चलने से खेत में खड़ी धान की फसल भी खेतों में गिर कर पानी में डूब गई है, जिससे धान के बीच अंकुरित होने लगे हैं। खास बात यह कि बारिश थमने के बाद भी इन फसलों को काटने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। बलराम बेमौसम बारिश से हुए किसानों के नुकसान का आंकलन प्रशासन को राजस्व कर्मचारियों से कराना चाहिए और किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिए शासन का आर्थिक पैकेज की मांग करना चाहिए। जिससे किसानों को राहत मिल सके। रामसूरत जिले में चार दिन चली बेमौसम बारिश ने सिर्फ किसानों की धान की फसल बर्बाद नहीं किया है बल्कि गेहूं की बोआई पर भी ग्रहण लगा दिया है। अब गेहूं की बोआई करने के लिए किसानों को खेत तैयार करने में पखवारे भर का समय लग सकता है। विनोद कुमार यादव बेमौसम बारिश से जिले के अधिकतर किसानों के धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। खेत में लबालब पानी भर जाने से फसल डूब चुकी है। किसान पानी से फसल निकाल कर सुखाने के प्रयास में जुटे हैं, जबकि इससे कोई फायदा नहीं है। रविन्द्र कुमार बेमौसम बरसात से जिले में धान की खेतीकरने वाले 3.50 लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। जिनकी फसलें काटकर खेत में रखी गई थीं वह पानी में डूब गई हैं जिनकी फसलें खड़ी थीं वह गिरकर पानी में सड़ने लगी हैं, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। श्यामलाल बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का सही आंकलन करने के लिए जिले के अफसरों को खेतों में जाकर गिरी हुई सड़ रही धान की फसलों को देखना चाहिए। चौपट फसलों को देखकर किसान की आंख से आंसू निकल रहे हैं। विजय बहादुर बेमौसम बारिश ने जिले के अधिकतर किसानों को प्रभावित किया है, जबकि फसल बीमा सिर्फ 40 हजार किसानों ने कराया है। प्रशासन को इसे गंभीरता से लेकर किसानों को राहत देने के लिए शासन से पैकेज की मांग करना चाहिए। चन्द्रपाल मोथा तूफान से हुई बेमौसम बारिश से जिले के अधिकतर किसान की धान और आलू की फसल चौपट हो चुकी है। पानी में डूब चुकी फसल निकाल कर सुखाने के बाद भी धान की लागत नहीं निकाली जा सकेगी। कारण धान अंकुरित हो चुके हैं। श्रीराम बेमौसम बारिश ने वैसे तो पूरे जिले को प्रभावित किया है लेकिन सबसे अधिक नुकसान धान और आलू का अगैती फसल का हुआ है। प्रशासन को क्षतिग्रस्त धान की फसल का आंकलन कराने के बाद किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग करना चाहिए। अजय सिंह बेमौसम बारिश ने वैसे तो जिले के सभी किसानों का नुकसान किया है लेकिन छोटे किसानों का निवाला ही छिन गया है। छोटे किसानों ने फसल बीमा भी नहीं कराया है, ऐसे में इनकी लागत भी डूब चुकी है। इन किसानों के लिए अलग से विचार करने की जरूरत है। अमर सिंह बेमौसम बारिश से क्षतिग्रस्त हुई धान की फसल देखकर किसानों की आंख से आंसू निकल रहे हैं। प्रशासन फसल बीमा कराने वाले किसानों के नुकसान की भरपाई करने का दावा कर रहा है। इससे छोटे किसान वंचित रह जाएंगे। शिव अचल सिंह मोथा तूफान के कहर से जिले के छोटे किसान पूरी तरह से टूट चुके हैं कारण इनकी धान की फसल बर्बाद होने के साथ लागत भी डूब चुकी है। ऐसे किसानों को मुआवजा न मिला तो कर्जदार बन जाएंगे जिससे उबरने में इन्हें कई वर्ष लग जाएंगे। राजपति बोले जिम्मेदार बेमौसम बारिश से क्षतिग्रस्त हुई धान की फसलों का बीमा कराने वाले किसानों से टोल फ्री नम्बर पर सूचना मांगी गई है। बीमा कंपनी के प्रतिनिधि फसलों का आंकलन कर नुकसान की भरपाई करेंगे। बिना फसल बीमा वाले किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिए शासन से निर्देश मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी