टीईटी की विसंगति पुरानी सरकार की गलत नीतियों का परिणाम
Pratapgarh-kunda News - प्रतापगढ़ में प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल ने कहा कि टीईटी की अनिवार्यता से 20 लाख शिक्षक तनाव में हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इसे पुरानी सरकार की नीति का परिणाम बताया। शिक्षकों ने 22 फरवरी से सोशल मीडिया अभियान और 26 को धरना प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।
प्रतापगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने विगत दिनों कहा था कि टीईटी की विसंगति पुरानी सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है, हालांकि प्रकरण अब सुप्रीम कोर्ट में है फिर भी हम शिक्षकों के प्रति चिंतित है। यह बातें प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल ने मंगरौरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय मदाफरपुर में आयोजित मीटिंग में कहीं। कहा कि 2017 में आपकी ही सरकार में एनसीटीई ने चुपके से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में संशोधन करके सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किया था। तभी उस संशोधन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने गत 1 सितंबर 2025 को ऐसा निर्णय पारित किया है, जिसमे सभी शिक्षकों को अब टीईटी अनिवार्य कर गई है।
पिछली सरकार ने तो 23 अगस्त 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए स्पष्ट रूप से टेट अनिवार्यता से मुक्ति का प्रावधान अपने राजपत्र में किया था। आज पूरे भारत का 20 लाख शिक्षक तनाव में है। प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त संघ मिल कर अपने नैतिक कर्तव्य को पूरा करने के प्रयास में है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि 22 फरवरी को सोशल मीडिया पर अभियान, 23, 24 एवं 25 को-काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन और 26 को जिले पर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन सौंपा जाएगा। निर्णायक आन्दोलन राजधानी नई दिल्ली में होगा। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष बृजेश सिंह, जिला मंत्री विनय सिंह, ब्लॉक मंत्री बलराम पाठक, कोषाध्यक्ष संतोष प्रजापति, आलोक पांडेय, अनूप सिंह, राजकिशोर मिश्र और अशोक शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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