बोले बेल्हा: नाले-नालियां और रास्ते खस्ताहाल, पानी की समस्या बरकरार
Pratapgarh-kunda News - ग्राम पंचायत सेतापुर में विकास कार्यों की अनदेखी के चलते ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे और खस्ताहाल रास्ते, अधूरे जलनिकासी नाले, बदहाल सामुदायिक शौचालय, और पेयजल संकट जैसी समस्याएँ ग्रामीणों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही हैं। स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्राम पंचायतों को शहरी तर्ज पर सजाने-संवारने के लिए भले ही शासन से लाखों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है लेकिन गंवई राजनीति से प्रेरित जनप्रतिनिधि और ब्लॉक स्तरीय अफसरों के मनमाने रवैये के कारण सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पातीं। विकास खंड आसपुर देवसरा की ग्राम पंचायत सेतापुर की ठाकुर बस्ती के परिवार भी गंवई राजनीति के चलते विकास कार्यों से वंचित हैं। इस बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले अधिकतर रास्ते कच्चे और खस्ताहाल हैं। जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले-नालियां अधूरे हैं और गंदगी से पटे हैं। सामुदायिक शौचालय बदहाल हालत में है, इसके लिए बनाया गड्ढा खुला छोड़ दिया गया है।
पंचायत भवन परिसर के शौचालय का दरवाजा टूट चुका है और सीट उखड़ गई है। पेयजल की समस्या के मद्देनजर करीब पांच वर्ष पहले गांव में जलनिगम की ओर से बोरिंग कराई गई लेकिन इसके बाद काम ठप हो गया और आज तक शुरू नहीं हो सका। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने ग्रामीणों से गांव की समस्याओं पर संवाद किया तो उनका दर्द छलक पड़ा। विकास खंड आसपुर देवसरा की ग्राम पंचायत सेतापुर पट्टी से अमरगढ़ जाने वाले रोड पर स्थित है। मुख्य सड़क से सटी ग्राम पंचायत की वर्तमान आबादी करीब साढ़े तीन हजार है। मुख्य सड़क से सटी होने के कारण इस ग्राम पंचायत के आसपास से ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी गुजरते रहते हैं लेकिन यहां के विकास कार्यों को लेकर कभी किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजा गांव में इक्का दुक्का रास्तों को छोड़ दें तो अधिकतर रास्ते कच्चे और खस्ताहाल दशा में हैं। सबसे ज्यादा खराब रास्ते गांव की ठाकुर बस्ती में हैं। इस बस्ती के एक भी रास्ते पर खड़ंजा नहीं लगवाया गया है। ऊबड़ खाबड़ रास्तों से होकर ही बस्ती के लोग मुख्य सड़क तक पहुंच पाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इसे लेकर कई बार ब्लॉक मुख्यालय पर शिकायत की गई लेकिन अफसर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। सामान्य दिनों में लोग किसी तरह इन रास्तों से काम चला लेते हैं लेकिन बारिश होने के बाद इन पर चलना दुर्घटना को दावत के समान हो जाता है। बारिश होने पर कच्चे रास्तों में बने गड्ढों में पानी भर जाता है और बारिश थमने के कई दिन बाद तक कीचड़ जमा रहता है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिए इस पर गिरकर चोटिल होना सामान्य हो जाता है। कमोवेश यही हाल में जलनिकासी के लिए बनाए गए अधूरे नाले नालियों का है। सरकारी बजट खपाने के लिए जलनिकासी की नालियों का निर्माण शुरू कराया गया लेकिन उन्हें अधूरा छोड़ दिया गया। नालियों का निर्माण कराने के बाद से एक बार भी सफाई नहीं कराई गई। नतीजा नाले नालियां कूड़े करकट से पटे हैं। बजबजाती नालियों से उठने वाले दुर्गंध दूर तक लोगों को परेशान करती है। पंचायत राज विभाग की ओर से समय समय पर ग्राम पंचायतों की सफाई और नाले-नालियों को साफ कराने का अभियान चलाया जाता है लेकिन इन नालियों तक अभियान नहीं पहुंच सका। गांव के जलनिकासी के लिए बनाया गया नाला घासफूस से भरा है जिससे बारिश में जलनिकासी नहीं हो पाती। जलभराव से बचने के लिए ग्रामीण खुद फावड़ा लेकर नालों की सफाई करते हैं। ग्रामीणों की सुविधा के लिए वर्ष 2009 में बनाए गए मिनी सचिवालय का भवन बेहद बदहाल दशा में है। बाउंड्री जगह-जगह टूट चुकी हैं परिसर सहित बरामदे में अतिक्रमण कर ग्रामीणों ने पुआल सहित अन्य सामान डंप कर रखा है। इसके आसपास मवेशी बांधे जाते हैं जिससे मिनी सचिवालय की दीवारें खराब हो रही हैं। मिनी सचिवालय के दरवाजे खिड़कियां अराजक तत्व तोड़कर उठा ले गए। अहम बात यह कि मिनी सचिवालय की देखरेख करने और संचालन करने के लिए नियुक्त पंचायत सहायक यहां कभी बैठता ही नहीं। इससे ग्रामीणों को मिनी सचिवालय की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ग्रामीणों की ओर से इसकी शिकायत पंचायत राज विभाग में की गई तो वर्ष 2014 में तत्कालीन ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने मिनी सचिवालय को लावारिश छोड़ दिया और पुराने पंचायत भवन की मरम्मत करा दी। हालांकि लाखों रुपये खर्च करने के बाद पंचायत भवन का भी संचालन कभी नहीं किया गया। जिम्मेदारों ने इसमें ताला जड़कर छोड़ दिया। पंचायत भवन से सटकर बनाए गए शौचालय की सीटें टूटी हैं और दरवाजा गायब हो चुका है। परिसर में उगी घासफूस देखकर आसानी से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इसका संचालन कभी नहीं किया गया। ग्रामीणों के घर से निकलने वाला कूड़ा निस्तारित करने के लिए लाखों रुपये के बजट से आरआर सेंटर का निर्माण कराया गया है, ग्रामीणों के घर से कूड़ा उठाने के लिए ई-वाहन खरीदा गया है लेकिन एक भी दिन न डोर टू डोर कूड़ा उठाया गया और न कूड़ा निस्तारण करने की कोई सुविधा है। नतीजा गांव की गलियों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक कूड़ा करकट बिखरा रहता है। गांव के परिषदीय स्कूल की बाउंड्री का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, इससे अराजकतत्व विद्यालय परिसर में मनमाने तरीके से प्रवेश कर जाते हैं। पेयजल की समस्या का समाधान करने के लिए टंकी का निर्माण कराने के लिए गांव में भूमि चिह्नित कर बाउंड्री करा दी गई। इसके बाद बोरिंग कराई गई लेकिन इसके आगे का काम नहीं हो सका। जिससे पेयजल की समस्या बरकरार है। ग्रामीणों के दरवाजे पर लगाए गए आधा दर्जन इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं लेकिन शिकायत के बाद भी रीबोर नहीं कराया जा रहा है। मिनी सचिवालय में ताला बंद, दरवाजे-खिड़की चोरी जिले की अधिकतर ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पंचायत भवन का निर्माण कराया गया है अथवा मिनी सचिवालय का। 100 से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां न पंचायत भवन है और न मिनी सचिवालय। सेतापुर ग्राम पंचायत को शासन से दोनों सौगातें मिली हैं। यहां वर्ष 2009 में मिनी सचिवालय का निर्माण कराया गया और उसे पूरी तरह से सुसज्जित किया गया लेकिन वर्ष 2014 के पंचायत चुनाव के बाद से उसका ताला ही नहीं खुला। लावारिश होने के कारण मिनी सचिवालय के दरवाजे और खिड़कियां तोड़कर अराजकतत्व उठा ले गए। वर्तमान में मिनी सचिवालय में ग्रामीणों पे पुआल आदि सामान डंप कर अतिक्रमण कर लिया है। ग्रामीण बताते हैं कि इससे पहले बनाए गए पंचायत भवन की मरम्मत वर्ष 2014 के बाद कराई गई लेकिन उसका भी कभी ताला नहीं खोला गया। जबकि पंचायत भवन संचालित करने के लिए पंचायत सहायक की नियुक्ति की गई है और इसकी साज सज्जा के लिए किताबें, इनवर्टर, कम्प्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर आदि खरीदे गए हैं। गंवई राजनीति से प्रेरित ब्लॉक स्तरीय अफसरों की मनमानी के चलते ग्रामीण सुविधाओं से वंचित हैं। कूड़े करकट से पटे नाले-नालियों से उठ रही दुर्गंध सेतापुर ग्राम पंचायत में जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले नालियां अधूरे छोड़ दिए गए हैं। इनका निर्माण कराने के बाद से कभी सफाई नहीं कराई गई। इससे नाले नालियां कूड़े करकट और घासफूस से पटे हैं और बजबजा रहे हैं। बजबजाते नाले नालियों से उठने वाली दुर्गंध से उधर से गुजरने वाले परेशान रहते हैं। सफाई कर्मचारी की लापरवाही के कारण गांव के सार्वजनिक स्थलों से लेकर गांव के प्रमुख रास्तों के किनारे कूड़ा करकट डंप किया गया है। आरआर सेंटर का निर्माण कराने और डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए ई-वाहन की खरीदारी के बाद भी गांव में बिखरे कूड़ा करकट जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हैं। अहम बात यह कि आरआर सेंटर का निर्माण कराने पर सरकाी खाते से लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को कूड़ा करकट से राहत नहीं मिली। ग्रामीण कहते हैं कि अफसरों को इसे गंभीरता से लेकर समस्या का समाधान कराना चाहिए। जरा हमारी भी सुनिए... सेतापुर ग्राम पंचायत जिले की उन ग्राम पंचायतों में शामिल है जहां पंचायत भवन और मिनी सचिवालय का अलग-अलग निर्माण कराया गया है लेकिन संचालित एक भी नहीं किया जाता। दुखना सेतापुर में पेयजल का संकट है, गर्मी के मौसम में यह गंभीर हो जाता है। इसका समाधान करने के लिए पेयजल टंकी का निर्माण शुरू कराया गया लेकिन बोरिंग कराने के बाद छोड़ दिया गया। शंकर सिंह परिषदीय स्कूल की बाउंड्री का निर्माण कराने और गेट लगाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बजट दिया गया था। जिम्मेदारों ने बजट खर्च कर दिया लेकिन बाउंड्री वाल अधूरी है। सचिन परिषदीय स्कूल में पढ़ने वाले नौनिहालों की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही बाउंड्रीवाल का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। इससे अराजकतत्व और मवेशी परिसर में घुस जाते हैं। गोलू सेतापुर में वर्ष 2009 के बाद मिनी सचिवालय का निर्माण कराया और उसकी साज-सज्जा के लिए सामान खरीदे गए। इसके बाद से उसे लावारिश छोड़ दिया गया। वर्तमान में मिनी सचिवालय में पुआल आदि डंप किया गया है। विनोद सिंह सेतापुर में लाखों रुपये के बजट से बनाया गया पंचायत भवन लावारिश छोड़ दिया गया है। इसका संचालन नहीं किए जाने से ग्रामीणों को पंचायत भवन की सुविधाएं नही मिल रही हैं। इंदर सिंह लाखों रुपये की लागत से बनाए गए पंचायत भवन की देखरेख के लिए पंचायत सहायक की नियुक्ति की गई है लेकिन इसमें लगातार ताला बंद रहता है। इससे सटकर बनाए गए शौचालय का दरवाजा गायब हो गया है। राजेन्द्र सिंह पंचायत भवन में जनसेवा केंद्र संचालित करने के लिए पंचायत राज विभाग की ओर से पंचायत सहायक को आईडी-पासवर्ड मुहैया कराया गया है लेकिन इन सुविधाओं के लिए ग्रामीण बाजार के साइबर कैफे पर जाते हैं। रितिक सिंह सेतापुर के मिनी सचिवालय को निर्माण के बाद लावारिश छोड़ दिया गया। वर्तमान में परिसर सहित कमरों में पुआल आदि रखकर अतिक्रमण कर लिया गया है। खिड़की, दरवाजे तोड़कर अराजकतत्व उठा ले गए। केशव प्रसाद मिनी सचिवालय की बाउंड्री टूट जाने से आसपास रहने वाले ग्रामीण कंडी-उपली रखने के साथ परिसर में मवेशी बांधने लगे हैं। जिम्मेदार इसे देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं। रोहित सिंह सेतापुर में कूड़ा निस्तारित करने के लिए आरआर सेंटर का निर्माण कराया गया है और डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए ई-वाहन खरीदा गया है। इसके बाद भी कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं की गई है। दीपक सिंह गांव के गरीब परिवारों को सहूलियत के लिए बनाए गए सामुदायिक शौचालय बदहाल हो चुका है। देखरेख के अभाव में बिना प्रयोग किए ही शौचालय बदतर हालत में है। रामजी सिंह ग्राम पंचायत में बनाए गए सामुदायिक शौचालय और स्नानागार की देखरेख के लिए केयर टेकर की नियुक्ति की गई है। बावजूद इसके सामुदायिक शौचालय का कभी ताला नहीं खोला जाता। अंकित सिंह सेतापुर में जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले नालियां अधूरे छोड़ दिए गए हैं। सफाई नहीं होने के कारण कूड़े करकट से पटी नालियां बजबजा रही हैं जिससे दुर्गंध उठ रही है। शैलकुमारी सेतापुर गांव की ठाकुर बस्ती के अधिकतर रास्ते कच्चे और ऊबड़ खाबड़ हैं। इन रास्तों से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है और अक्सर लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। राधा सिंह गांव में जलनिकासी की कच्ची नालियां कूड़े करकट से भरी है, जिससे दुर्गंध उठती हैं। मकानों से निकलने वाला गंदा पानी बजबजाता रहता है। अधूरी नालियों को पूरा कराया जाए। अंजली सिंह गांव में पेयजल की किल्लत के मद्देनजर टंकी का निर्माण कराने की शुरुआत की गई लेकिन बोरिंग कराने के बाद जिम्मेदारों ने काम बंद करा दिया। इससे ग्रामीणों की पेयजल किल्लत बरकरार है। चन्द्रावती सिंह ग्राम पंचायत में आरआर सेंटर का निर्माण कराने के बाद भी डोर टू डोर कूड़ा उठाने और उसे निस्तारित करने की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे रास्तों के बगल और सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा करकट जमा है। कुसुम सिंह -------------------------- बोले जिम्मेदार सेतापुर ग्राम पंचायत के पंचायत भवन और मिनी सचिवालय का सर्वे कराया जाएगा। एडीओ पंचायत और सेक्रेटरी से गांव के विकास कार्यों की रिपोर्ट मांगकर उचित कार्रवाई की जाएगी। धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, बीडीओ आसपुर देवसरा
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