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 बोले बेल्हा : कच्चे रास्ते से विद्यालय जाने को मजबूर, टंकी अधूरी, हैंडपंप से पानी लेने जाते हैं दूर

बोले बेल्हा : कच्चे रास्ते से विद्यालय जाने को मजबूर, टंकी अधूरी, हैंडपंप से पानी लेने जाते हैं दूर

संक्षेप:

Pratapgarh-kunda News - भगतपुर ग्राम पंचायत में विकास केवल कागज पर हो रहा है। पंचायत भवन का निर्माण पांच साल से अधूरा है। प्राथमिक विद्यालय के लिए पक्के रास्ते का अभाव है, जिससे बच्चे कच्चे रास्तों से जाते हैं। जल निकासी की...

Sep 03, 2025 04:48 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रतापगढ़ - कुंडा
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सांगीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भगतपुर में विकास सिर्फ कागज पर ही हो रहा है। गांव में कई वर्ष पूर्व शुरू हुए पंचायत भवन का निर्माण अब भी अधूरा है। जल निकासी की नालियां नहीं बनवाई गई हैं। यहां बने प्राथमिक विद्यालय में जाने के लिए अब तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है। बच्चे कच्चे रास्ते से विद्यालय जाते हैं। गांव के सार्वजनिक रास्ते पर खड़ंजा इंटरलॉकिंग का काम काम कराने के बजाए जिम्मेदार ने तालाब पाटकर खुद का व्यक्तिगत रास्ता बनवाया लिया। गांव के लोगों ने आपके अपने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि सरकार की ओर से दी गई सुविधाएं भी उनके लिए निरर्थक साबित हो रही हैं, क्योंकि यहां विकास सिर्फ कागज पर है।

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... भगतपुर ग्राम पंचायत के कई पुरवों के बच्चे प्राथमिक विद्यालय में जाते हैं। आज तक विद्यालय जाने के लिए रास्ता नहीं बन सका है। बच्चे कच्चे रास्ते से होकर विद्यालय जा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश में रास्ते के आसपास झाड़ियों के कारण हमेशा जहरीले जंतुओं का डर बना रहता है। गांव में बना सामुदायिक शौचालय जर्जर हालत में है। गांव के लोग उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। उसके संचालन के लिए समुचित प्रयास नहीं किया गया। ऐसे में तमाम लोग आज भी बाहर खुले में शौच जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हर रास्ते के पास कूड़े का अंबार लगा है। वे लोग जानते ही नहीं कि उनके यहां किस सफाईकर्मी की तैनाती है। वह कब आता है कहां सफाई करता है किसी को पता नहीं है। बारिश होने पर हर ओर समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। कच्चे रास्ते पर रात में चलना और भी खतरनाक हो जाता है। घास और झाड़ियों के बीच लोगों को पैदल चलना पड़ता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कच्चे रास्ते पर बजट के बावजूद खड़ंजा आज तक नहीं लगवाया जा सका। चार पहिया वाहन, फायरब्रिगेड और एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। नाली के अभाव में जलनिकासी भी गंभीर समस्या है। बारिश के बाद देर तक रास्तों पर पानी भरा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरों के बजाए जेसीबी से चकमार्ग का निर्माण कराया जा रहा था। ग्रामीणों के विरोध करने पर काम बंद कर दिया गया। सड़क, खड़ंजा के अभाव में लोगों को भारी परेशानी हो रही है। .. पंचायत भवन संग पानी टंकी निर्माण पांच साल से अधर में भगतपुर के ग्रामीणों ने बताया कि उनके यहां पांच साल पहले पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। वह आज तक पूरा नहीं हो सका। ऐसे में गांव के लोगों को पंचायत भवन में मिलने वाली सहूलियतों से वंचित होना पड़ रहा है। निर्माण पूरा कराने के लिए जिम्मेदार गंभीरता से प्रयास नहीं कर रहे हैं। यही नहीं गांव में पेयजल की समस्या को देखते हुए तीन साल पहले पानी की टंकी का निर्माण शुरू किया गया था। वह आज तक अधूरा है। उसमें पाइप डालकर छोड़ दिया गया। कुछ इलाके में पाइप बिछाई गई। कई पुरवों में पाइप बिछाने का काम अब भी बाकी ही है। ऐसे में लोगों को दूर लगे हैंडपंप या किसी दूसरे के सबमर्सिबल पंप से पानी लाना पड़ रहा है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव में सरकार की विकास और जनकल्याण की योजनाएं गरीब, जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। गांव में मुख्य समस्या है सार्वजनिक रास्ते पर खड़ंजा अथवा इंटरलॉकिंग का न होना। बरसात के दिनों में कच्चे रास्ते पर चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। एक जिम्मेदार ने तालाब पाटकर खुद के घर लिए पक्का रास्ता तो बनवा लिया गया लेकिन गांव वालों का रास्ता बदहाल हालत में ही है। देवशरण शर्मा गांव में बनी पानी टंकी अब तक चालू नहीं हुई है। पाइपलाइन भी पूरे गांव में नहीं बिछाई गई। ऐसे में हम लोगों को दूर लगे हैंडपंप या किसी दूसरे के सबमर्सिबल पंप से पानी लाना पड़ रहा है। इससे कई लोगों को परेशानी हो रही है। मुहर्रम अली भगतपुर गांव में सबसे ज्यादा समस्या रास्ते की है। कच्चे रास्तों को खड़ंजा या इंटर लॉकिंग कराया जाना चाहिए। बारिश में सबसे अधिक समस्या स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों और बाहर जाने वाली महिलाओं को हो रही है। इस्लाम जल निकासी गांव की जटिल समस्या है। इसपर अभी तक कोई काम नहीं कराया गया है। पूरे गांव में नाली का अभाव है। जल निकासी नहीं होने से पूरे गांव के रास्तों में दलदल बना रहता है। जमालुद्दीन गांव के स्कूल का रास्ता आज तक नहीं बन पाया। थोड़ी सी भी बरसात हुई तो बच्चों का स्कूल पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। झाड़ियों और घास के कारण हमेशा जहरीले जंतुओं का डर बना रहता है। इसराइल गांव में विकास के नाम पर खानापूरी की गई है। कई बार शिकायत भी हुई और जांच के दौरान खामियां मिलीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में समस्याएं गांव के लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। रज्जन अली गांव में जल निकासी की नाली का निर्माण बहुत जरूरी है। जहां कहीं पर थोड़ा बहुत नाली बनी भी है तो वह मानक के विपरीत है। ऐसे में उसके बनने का कोई मतलब नहीं है। उससे जलनिकासी नहीं हो पा रही है। मुनीर सामुदायिक शौचालय टूटा और खस्ताहाल हालत में पड़ा है। सिर्फ कागज में उसका उपयोग हो रहा है। ऐसे में गांव के तमाम लोग बाहर खुले में शौच जा रहे हैं। ब्लॉक के अधिकारी भी शौचालय की जांच को नहीं आते। रमजान लगभग पांच साल पहले गांव में पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। वह आज तक नहीं पूरा हो पाया। अन्नपूर्णा भवन भी बना लेकिन कोटेदार राशन घर पर वितरित करता है। असगर अली जल निकासी की नाली हो या फिर दूसरे विकास कार्य, ब्लॉक से लेकर गांव स्तर तक खूब मनमानी की जा रही है। मजदूरों से होने वाले कार्य जेसीबी से कराए जा रहे हैं। इससे कार्यों की पारदर्शिता पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। प्रज्ञेश त्रिपाठी बोले जिम्मेदार- प्राथमिक विद्यालय का रास्ता निर्माण में जो भी दिक्कत होगी उसे जल्द दूर कर बनवाया जाएगा। पंचायत भवन निर्माण पांच साल से क्यों अधूरा है इसकी जानकारी कर अड़चन दूर कर उसे पूरा कराया जाएगा। गांव में व्याप्त सफाई, सामुदायिक शौचालय की समस्या का समाधान प्राथमिकता से कराया जाएगा। विमल कुमार श्रीवास्तव, खंड विकास अधिकारी, सांगीपुर