अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

क्रीड़ा शुल्क जमा ना करने वाले स्कूलों का रुकेगा वेतन

छात्र-छात्राओं का क्रीड़ा शुल्क न जमा करने वाले प्रधानाचार्यों की मुश्किल बढ़ गई है। ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर डीआईओएस ने वेतन रोकने का निर्देश दिया है। मंडलीय रैली के पहले प्रधानाचार्यों को बकाया क्रीड़ा शुल्क जमा करना ही होगा। बिना शुल्क जमा कराए ऐसे स्कूलों का वेतन नहीं निकाला जाएगा।

माध्यमिक स्कूलों में प्रतिमाह छात्र-छात्राओं से पांच रुपये क्रीड़ा शुल्क जमा कराया जाता है। मासिक फीस में जोड़कर कक्षाध्यापक इसकी वसूली कर कार्यालय में जमा करा देते हैं। वहां से शुल्क की निर्धारित धनराशि कोषागार व डीआईओएस कार्यालय में जमा कराई जाती है। जिले में राजकीय स्कूलों की संख्या 41 व सहायता प्राप्त की संख्या 78 है। बताया जाता है कि दो दर्जन से अधिक राजकीय व सहायता प्राप्त स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने वर्षों से क्रीड़ा शुल्क डीआईओएस कार्यालय में जमा ही नहीं किया है। तहसील, जनपद व मंडल स्तर पर होने वाली क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में क्रीड़ा शुल्क का ही उपभोग किया जाता है। इसकी जानकारी होने के बाद डीआईओएस ने ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कराई और प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर मंडलीय रैली से पहले क्रीड़ा शुल्क जमा कराने का निर्देश दिया है।

लेखाधिकारी को दिया निर्देश

डीआईओएस ने लेखाधिकारी को दिए निर्देश में कहा है कि अगस्त का वेतन जारी करने के पहले स्कूलों से क्रीड़ा शुल्क का नोड्यूज जरूर देखें। ऐसे स्कूल जिन्होंने क्रीड़ा शुल्क जमा नहीं किया है उनका वेतन रोक दिया जाए।

तीन चौथाई भाग स्कूल में रहता है

छात्र-छात्राओं से क्रीड़ा शुल्क के नाम सालभर में 60 रुपये लिए जाते हैं। बताया जाता है कि इसका तीन हिस्सा स्कूल में ही रहता है जबकि एक हिस्सा डीआईओएस कार्यालय में जमा कराया जाता है।

इनका कहना है...

क्रीड़ा शुल्क का नोड्यूज होने पर ही अगस्त का वेतन निर्गत किया जाएगा। इसका निर्देश लेखाधिकारी को दिया गया है। ऐसे स्कूल जिन्होंने नोड्यूज नहीं लिया है उनका वेतन क्रीड़ा शुल्क जमा करने के बाद ही निर्गत किया जाएगा।

एसपी यादव, डीआईओएस

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:if sports fee not filled by school cut salary