DA Image
25 सितम्बर, 2020|2:25|IST

अगली स्टोरी

बैंको की बेरुखी से मुश्किल में किसान

default image

जानलेवा वायरस के संक्रमण के दौर में खेती ही किसानों के लिए बड़ा सहारा है। संक्रमण के दौर में धन के अभाव में किसान खेती नहीं कर पा रहे। ऐसे दौर में बैंकों की बेरुखी किसानों पर और भी भारी पड़ रही है। किसान क्रेडिट कार्ड के अभाव में अधिकतर किसान साहूकारों से कर्ज लेकर जैसे-तैसे खेती में जुटे हैं। दूसरी तरफ बैंकों का दावा है कि किसानों को हर स्तर पर सहूलियत दी जा रही है।

उद्योग विहीन जिले में लोगों को रोजीरोटी के लिए किसानी ही सहारा है। खेती में जुटे लोगों को सबसे अधिक मुश्किल धन की आती है। खेती की तैयारी से लेकर फसल की बोआई और कटाई तक हर कदम पर इसकी जरूरत पड़ती है। साहूकारों के कर्ज से किसानों को मुक्ति दिलाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की गई लेकिन बैंकों के असहयोग के चलते इसका लाभ अधिकतर किसानों को नहीं मिल पा रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष को ही देंखें तो 93126 क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अगस्त माह तक सिफ 43554 केसीसी बनाए जा चुके हैं। किसानों का कहना है कि केसीसी बनवाने के लिए वे वकील, तहसील व बैंक का चक्कर लगाते हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिलती। सबसे अधिक मुश्किल बैंक से ही होती है। मनोज कुमार मिश्र, देवी प्रसाद शर्मा, सत्यव्रत तिवारी, शीलता प्रसाद मिश्र, रामकुमार मौर्य का कहना है कि केसीसी की फाइल बैंक में है लेकिन उसे अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसी हालत में वह उधारी के जरिए खेती करा रहे हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर एलडीएम अनिल कुमार ने बताया कि कोविड 19 बीमारी को लेकर शुरुआत में लॉकडाउन होने से कामकाज ठप रहा। विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य के 40 फीसदी की पूर्ति कर ली गई है। यह भी कहा कि बैंक स्तर पर जो भी फाइलें लंबित होंगी उनमें औपचारिकताएं अपूर्ण होंगी। किसान बैंक से संपर्क कर इसे दूर कराने के बाद केसीसी प्राप्त कर सकते हैं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Farmers in trouble due to banks 39 indifference