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3 दिसंबर, 2020|7:49|IST

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शासनादेश के बाद भी नहीं बन रही संयुक्त कार्ययोजना

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पंचायती राज विभाग के बजट से गांव में होने वाले विकास कार्यों की मजदूरी मनरेगा से दिए जाने के शासनादेश का जिले में पालन नहीं हो पा रहा है। पंचायती राज विभाग और मनरेगा की संयुक्त कार्ययोजना न बन पाने से विकास कार्यों की रफ्तार गति नहीं पकड़ पा रही है।

पंचायती राज विभाग से विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को एक साल में तकरीबन 10 लाख रुपये का बजट आवंटित होता है। इससे किए जाने वाले नाली, खड़ंजा आदि के निर्माण कार्य में मजदूरी की कार्ययोजना मनरेगा से बनाने के लिए शासन ने आदेश दिया था। इसका जिले में पालन नहीं किया जा रहा है। पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय के निर्माण में तो संयुक्त कार्ययोजना बनाई गई लेकिन नाली, खड़ंजा आदि के निर्माण में ऐसा नहीं हो सका। पंचायती राज विभाग से ग्राम पंचायत को मिलने वाले बजट से ही सामग्री और मजदूरी पर व्यय की कार्ययोजना बनाने के कारण काम कम हो पा रहा है। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और गांव में विकास कार्य की रफ्तार गति नहीं पकड़ पा रही है। प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायत के ही बजट से सामग्री और मजदूरी पर व्यय किए जाने के कारण नाली और खड़ंजा की लंबाई कम करनी पड़ जाती है।

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  • Web Title:Even after the mandate joint action plan is not being made