रायबरेली एम्स का पूर्ण क्षमता के साथ संचालित न किया जाना चिंताजनक: प्रमोद
Pratapgarh-kunda News - रायबरेली के दरियापुर में बने एम्स को 12 वर्ष बाद भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं किया जा रहा है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अस्पताल में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी है और 74 प्रतिशत पद रिक्त हैं। मरीजों को सर्जरी के लिए डेढ़ साल तक इंतजार करना पड़ रहा है।
लालगंज, हिन्दुस्तान संवाद। पड़ोसी जिले रायबरेली के दरियापुर में बने एम्स को 12 वर्ष बाद भी पूर्ण क्षमता के साथ संचालित न कराया जाना चिंताजनक है। यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी ने आठ अक्तूबर 2013 को एम्स का भूमिपूजन किया था। रायबरेली में एम्स की स्थापना का उद्देश्य प्रतापगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर एवं रायबरेली सहित पूर्वांचल, मध्यांचल के लगभग चालीस जनपदों के साथ बिहार, मध्य प्रदेश के भी कई हिस्सों की बड़ी आबादी के लिए जीवन रक्षक एवं उन्नत चिकित्सा सेवा जनता को अत्याधुनिक व बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराना रहा है। शुरू में एम्स के लिए 960 बेड के बड़े अस्पताल की परिकल्पना की गई थी।
वर्तमान में यह मात्र 610 बेड तक ही सीमित है और एम्स रायबरेली में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की भारी कमी है। यह बातें राज्यसभा सांसद व विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने सोमवार राज्यसभा में कही। सदन में सांसद ने भाजपा सरकार की घेराबंदी करते हुए कहाकि एम्स के लिए स्वीकृत लगभग 200 एसआरओ के पदों के विरूद्ध वर्तमान में केवल 37 एसआरओ कार्यरत हैं। अस्पताल में अब भी 74 प्रतिशत तक पद रिक्त पड़े हैं। सांसद ने सरकार को बताया कि देश के अन्य एम्स संस्थानों में सर्जरी की प्रतीक्षा अवधि लगभग छह महीने होती है। इसके विपरीत एम्स रायबरेली में मरीजों को डेढ़ वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। इस स्थिति में गंभीर मरीजों को समय पर उपचार न मिल पाने के कारण लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय बजट 2026 में भी एम्स रायबरेली के विस्तार एवं सुविधाओं में सुधार के लिए कोई विशेष प्राविधान नहीं किया गया।

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