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मृदा जांच के बाद संतुलित उर्वरक करें प्रयोग

नेशनल मिशन फॉर एस्टेनेबल एग्रीकल्चर के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम में दो दिवसीय कर्मचारी प्रशिक्षण मंगलवार को शुरू हुआ। कृषि भवन सभागार में चल रहा प्रशिक्षण बुधवार को संपन्न होगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजा दिनेश कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक परमेंद्र कुमार सिंह ने मृदा, बीज, रोगी पौधे के उपचार की विधियां बताई। मुख्य पोषक तत्व, सूक्ष्म पोषक तत्व की जांच के बारे में विस्तार से बताया। मृदा जांच के बाद संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला सहायक प्रताप नारायण मिश्र ने मृदा की जांच के नमूने जीपीएस से लेने की बात बताई। वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खेती, फसल चक्र पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके फायदे गिनाए। उप कृषि निदेशक डॉ. रघुराज सिंह ने जैविक खेती पर जोर देते हुए फसल अवशेष को जलाने से मना किया। कहा कि इससे प्रदूषण के साथ ही खेती को नुकसान होता है। इस दौरान प्रभारी भूमि परीक्षण प्रयोगशाला आनंद पाल, सुनील सिंह, प्रवीण सिंह, संजय, मनीष, अरुण, जगत, सुरेश चंद्र, भगौती, अनिल कुमार मौर्य, युवराज सिंह आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Balanced fertilizer experiment after soil testing