
प्रधान पीछे पड़े, पिस्टल लेकर आते हैं; मासूम संग रात में BSA ऑफिस पर बैठीं दो शिक्षिकाएं
प्रधानाध्यापिका सुधा उपाध्याय ने कहा कि वे हर रोज अपने विद्यालय जाती हैं। उनका आठ महीने का बच्चा है। इसके बाद भी वे नियमित रूप से विद्यालय जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान उनके पीछे पड़े हैं। उन पर विद्यालय न आने का गलत आरोप लगाते हैं। विद्यालय के अंदर पिस्टल लेकर आते हैं।
Primary Teachers: यूपी के आगरा में प्रधान की शिकायत पर लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दो शिक्षिकाओं ने बेसिक शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दो महीने से वेतन का भुगतान न होने पर वे धरने पर बैठ गईं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, तो वे कार्यालय में जमीं रहीं। आठ महीने का बच्चा गोद में लिए फर्श पर चादर डालकर बैठी रहीं। सूचना मिलते ही राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष कीर्तिपाल सिंह टाइगर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बीएसए से बात की। आश्वासन पर रात दस बजे के बाद शिक्षिकाएं धरने से उठीं।

प्राथमिक विद्यालय बड़ापुरा की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका सुधा उपाध्याय ने कहा कि वे टूंडला से हर रोज अपने विद्यालय जाती हैं। उनका आठ महीने का बच्चा है। इसके बाद भी वे नियमित रूप से विद्यालय जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान उनके पीछे पड़े हैं। उन पर विद्यालय न आने का गलत आरोप लगाते हैं। विद्यालय के अंदर पिस्टल लेकर आते हैं। चंबल का इलाका बताकर भय दिखाते हैं। लंबे समय से उनका उत्पीड़न जारी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत करके वेतन रुकवा देते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कई बार ऐसा हुआ है कि बगैर नोटिस और स्पष्टीकरण मांगे वेतन रोक दिया गया। अगस्त से वेतन नहीं आ रहा है। न स्पष्टीकरण मांगा है और न कोई नोटिस दिया है। दिवाली का त्योहार भी ठीक नहीं गुजरा। वहीं, पू् माध्यमिक विद्यालय पडुआपुरा कंपोजिट की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका रामधारा ने आरोप लगाया कि उनके यहां के ग्राम प्रधान ग्रामीणों और छात्रों से गलत बयानबाजी कराकर वीडियो बनाते हैं। इसके आधार पर निलंबित कराने की धमकी देते हैं। एमडीएम कन्वर्जन कास्ट के चेक पर हस्ताक्षर के लिए परेशान करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह पहले भी उनके खिलाफ कई बार कार्रवाई करा चुके हैं। अब फिर वेतन रोक दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रधान बेसिक शिक्षाधिकारी के करीबी हैं।
बीएसए पर लगाया-सुनवाई न करने का आरोप
दोपहर तक स्कूल में सेवा देने के बाद दोनों शिक्षिकाएं दोपहर तीन बजे के करीब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंच गई। सुधा उपाध्याय अपने आठ महीने के बेटे माधव को साथ लेकर आई थीं। उन्होंने बीएसए के सामने अपनी बात रखी। आरोप लगाया कि उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इससे गुस्साई शिक्षिकाओं ने कार्यालय के बाहर चादर बिछाकर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि विभागीय अधिकारियों के पास उनकी बात सुनने का समय नहीं हैं।
शिक्षक नेता जुटे, आंदोलन का ऐलान
बीएसए कार्यालय में रात को धरने पर बैठी शिक्षिकाओं की खबर सुनकर राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ के जिलाध्यक्ष कीर्तिपाल सिंह टाइगर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दोनों शिक्षिकाओं की समस्या सुनीं। इसके बाद उन्होंने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी से फोन पर बात की। दोनों शिक्षिकाओं को आश्वासन दिया है कि संगठन उनके साथ है। उनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। वे मंगलवार को बड़ी संख्या में शिक्षकों के साथ जिलाधिकारी से मिलेंगे।
आश्वासन पर रात दस बजे उठीं
आठ माह के बच्चे को लेकर शिक्षिकाओं के धरने की सूचना जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, तो मामला प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गया। मेडिकल विभाग की टीम एंबुलेंस लेकर बीएसए के कार्यालय पर पहुंच गई। पुलिस भी आ गई। बीएसए ने शिक्षक नेता कीर्तिपाल से फोन पर बातचीत की और शिक्षिका की मांगों को मानने का पूर्ण आश्वासन दिया। मांगें माने जाने के आश्वासन पर देर रात करीब 10:30 बजे शिक्षिकाएं धरने से उठ गईं।
क्या बोले बीएसए
बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने कहा कि दोनों शिक्षिकाएं स्कूल नहीं जाती हैं। ग्राम प्रधान की शिकायत पर दोनों का वेतन रोका गया है। विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण में भी दोनों शिक्षिकाएं अनुपस्थिति मिली हैं। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।





