‘प्रधान जी प्रसन्न हुए’, यूपी पंचायत चुनाव पर इस नए अपडेट से दावेदारों को झटका

Feb 16, 2026 02:48 pm ISTAjay Singh मुनव्वर हुसैन, संतकबीरनगर (लोहरौली)
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण प्रक्रिया पर उठे सवालों के कारण चुनाव कार्यक्रम पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल, हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि नए समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा।

‘प्रधान जी प्रसन्न हुए’, यूपी पंचायत चुनाव पर इस नए अपडेट से दावेदारों को झटका

UP Panchayat Chunav: यूपी के गांवों में प्रधान जी प्रसन्न हैं। वहीं, पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटे संभावित प्रत्याशियों को बड़ा झटका लगा है। हाल में योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा देते हुए बताया कि एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। इसके नए अपडेट से इस साल यूपी में पंचायत चुनाव होना मुश्किल ही लग रहा है। साफ हो गया है कि पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट के बिना चुनाव कराना संभव नहीं होगा। इस फैसले से जहां दावेदारों के अरमानों पर पानी फिर गया है। वहीं वर्तमान प्रधानों की बांछें खिल उठी हैं। कई प्रधानों की खुशी छिपाए नहीं छिप रही है। अपने समर्थकों और नजदीकी गांववालों के बीच वे अपनी प्रसन्नता खुलकर जाहिर भी कर दे रहे हैं।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण प्रक्रिया पर उठे सवालों के कारण चुनाव कार्यक्रम पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल,हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि नए समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। जब तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी सिफारिशें नहीं देगा, तब तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होना मुश्किल है। कोर्ट के फैसले के बाद चुनावी चौपाल सन्नाटे में बदलती नजर आ रही है।

चुनाव लड़ने वाले दावेदार महीनों से जनसंपर्क अभियान चला रहे थे, वे अब रणनीति बदलने को मजबूर हैं। महीनों से चुनावी जमीन तैयार कर रहे दावेदार अब असमंजस की स्थिति में हैं। गांव-गांव चौपाल, बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय रहे संभावित प्रत्याशियों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। पोस्टर-बैनर, प्रचार सामग्री और कार्यकर्ताओं की बैठकों पर खर्च की गई रकम फिलहाल बेअसर होती नजर आ रही है। समर्थकों में उत्साह की जगह मायूसी ने ले ली है। नई परिस्थितियों में मौजूदा प्रधानों को अतिरिक्त समय मिल सकता है। यदि चुनाव टलते हैं तो कार्यकाल बढ़ने या प्रशासक नियुक्त होने तक वर्तमान व्यवस्था जारी रह सकती है। इससे प्रधानों को अधूरे विकास कार्य पूरे कराने और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। अब सबकी निगाहें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं। आयोग का जो भी फैसला आएगा, गांव की सत्ता की तस्वीर उसी के साथ बदलती नजर आएगी।

ग्राम पंचायतों में बैठ सकते हैं प्रशासक

पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है। यदि वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के पहले नई पंचायतों का गठन नहीं हो पाता, तो प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रशासक बैठाए जा सकते हैं। प्रशासक पंचायत के कार्य, वित्तीय लेन-देन व चल रही विकास योजनाओं की निगरानी करेंगे।

सियासत में नई हलचल

पंचायत चुनाव को लेकर नए अपडेट ने प्रदेश के गांवों में राजनीति को दूसरी तरफ मोड़ दिया है। पंचायत चुनाव पर अनिश्चितता ने ग्रामीण सियासत का पारा चढ़ा दिया है। अब सबकी नजरें पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट पर टिक गई हैं।

इसलिए टल सकता है चुनाव

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आरक्षण मानी जाती है। अब एक समर्पित पिछड़ा आयोग का गठन होगा। इस आयोग को आरक्षण पर सर्वे करना होगा। सर्वे रिपोर्ट शासन को सौंपना होगा। आयोग के रिपोर्ट के आधार पर पिछड़े वर्ग का आरक्षण तय होगा। सर्वे रिपोर्ट के बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो सकता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने में समय लग सकता है।

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लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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