थानेदारों की 'गोपनीय डायरी' की वापसी, अपराधियों और रसूखदारों का खोलेगा राज
यूपी के थानों से वर्षों पहले गायब हो चुकी थानेदार की गोपनीय डायरी अब डिजिटल रूप में लौट आई है। पुलिस विभाग ने इसे यक्ष एप के माध्यम से फिर से लागू कर दिया है। अब थानेदार इस गोपनीय डायरी में ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश के थानों से वर्षों पहले गायब हो चुकी थानेदार की गोपनीय डायरी अब डिजिटल रूप में लौट आई है। पुलिस विभाग ने इसे यक्ष एप के माध्यम से फिर से लागू कर दिया है। अब थानेदार इस गोपनीय डायरी में ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पहले यह व्यवस्था पूरी तरह मैनुअल थी, लेकिन समय के साथ इसका चलन लगभग समाप्त हो गया था। अब यक्ष एप में जहां बदमाशों का लेखा-जोखा, उनकी फोटो और अवाज का नमूना रखा जा रहा है, वहीं एक जगह थानेदार के लिए गोपनीय सूचना की भी जगह दी गई है। यह सिर्फ थानेदार की लागिंग से खुलेगी।
थानेदार के नियंत्रण में रहने वाली गोपनीय डायरी में थाना क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों, गिरोहों, प्रभावशाली लोगों, अच्छे-बुरे तत्वों और अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी दर्ज रहती थी। इसे लॉकर में सुरक्षित रखा जाता था और थानेदार के तबादले के समय नए थानेदार को सौंप दिया जाता था। लेकिन समय के साथ यह परंपरा खत्म हो गई।
स्थिति यह रही कि जब वरिष्ठ अधिकारियों ने थानों में गोपनीय डायरी की तलाश कराई, तो वह कहीं नहीं मिली। नए जमाने के कई थानेदारों ने स्वीकार किया कि उन्होंने गोपनीय डायरी के बारे में केवल वरिष्ठ अधिकारियों से सुना था, लेकिन कभी देखा नहीं। कई अफसरों को भी इसके अस्तित्व की जानकारी नहीं थी।गोपनीय डायरी में थाना क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों, स्थानीय समीकरणों और सामाजिक संतुलन की पूरी जानकारी दर्ज रहती थी। कई बार जिन लोगों को थानेदार थाने पर बैठाकर चाय पिलाता था, उनके बारे में भी डायरी में यह उल्लेख होता था कि उनसे किस तरह की सतर्कता बरतनी चाहिए। अवैध गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क, धन के लेन-देन और उसके बंटवारे तक का विवरण भी इसमें होता था।
गोपनीय डायरी से क्या फायदा
थाने का चार्ज लेते ही गोपनीय डायरी से नए थानेदार को क्षेत्र की सामाजिक, राजनीतिक और आपराधिक संरचना की पूरी जानकारी मिल जाती थी, जिससे उसे स्थिति समझने में महीनों का समय नहीं लगता था। लॉ एंड ऑर्डर की किसी भी संवेदनशील स्थिति में यह डायरी कारगर साबित होती थी। इसमें दर्ज प्रभावशाली व्यक्तियों और स्थानीय समीकरणों की मदद से पुलिस हालात को संभालने में सक्षम होती थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल गोपनीय डायरी के लागू होने से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तथ्यात्मक और व्यावहारिक हो सकेगी।
लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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