
राम मंदिर ध्वजारोहण के लिए पीएम मोदी का 501 बटुक करेंगे स्वागत, गूंजेगी पारंपरिक लोक धुन-भजन
अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम में आगमन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत 501 बटुक ब्राह्मणों द्वारा स्वस्तिवाचन तथा संत-महंतों के शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के मध्य किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम में आगमन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत 501 बटुक ब्राह्मणों द्वारा स्वस्तिवाचन तथा संत-महंतों के शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के मध्य किया जाएगा। साकेत महाविद्यालय से रामजन्मभूमि गेट नंबर-11 तक सड़क के दोनों ओर खड़े लोग पुष्पवर्षा के माध्यम से प्रधानमंत्री का अभिनंदन करेंगे। वैदिक परंपरा के अनुरूप साकेत महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्वस्तिवाचन का आयोजन होगा। स्वागत के लिए 12 मंच बनाए गए हैं, जहां से पुष्प वर्षा की जाएगी। स्वागत पथ पर सात स्थानों पर सांस्कतिक कार्यक्रम होगा।

भजन, लोक धुनों और पारंपरिक वाद्यों की रहेगी गूंज
सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान संगीत और गायन की शृंखलाबद्ध प्रस्तुतियां आध्यात्मिक वातावरण को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। भजन गायन से लेकर ब्रज की पारंपरिक लोक धुनों तक और प्रदेश के विभिन्न अंचलों के लोक गायन दल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरों में पिरोकर प्रस्तुत करेंगे। शहनाई, सारंगी, पखावज, बांसुरी, सरोद और सितार जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की विशेष प्रस्तुतियां आयोजन को अतुलनीय आध्यात्मिक आभा से आलोकित करेंगी।
उत्तर प्रदेश के विविध सांस्कृतिक रंग एक भव्य शोभायात्रा के रूप में नजर आएंगे। एक ही मंच पर मयूर, राई, फरूवाही, बधावा, अवधी, करमा, ढेढिया, धोबिया, कहरवा, वनटांगिया और बारह सिंहा जैसे लोकनृत्य इस आयोजन की विशेष आकर्षण होंगे। शास्त्रीय नृत्य की श्रेणी में कथक की मनोहारी प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी।
500 कलाकार विशेष प्रस्तुति देंगे
अयोध्या में 25 नवंबर को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भव्य ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां जारी है।संस्कृति विभाग 24-25 नवंबर 2025 को आयोजित दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक उत्सव के माध्यम से प्रधानमंत्री समेत आमंत्रित मेहमानों का स्वागत करेगा। देश के 500 कलाकार इस उत्सव में भारतीय परंपराओं, अध्यात्म और लोक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि रामनगरी की आध्यात्मिक गरिमा, परंपरागत सांस्कृतिक पहचान तथा उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक कला विरासत का भव्य एवं प्रेरक प्रदर्शन राष्ट्रीय मंच पर हो सके। इस अवसर पर संगीत, नृत्य, लोक कलाओं तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी।





