मुख्यमंत्री के करीब योगी शांतिनाथ ब्रह्मलीन, गम में डूबे अनुयायी

मुख्यमंत्री के करीब योगी शांतिनाथ ब्रह्मलीन, गम में डूबे अनुयायी

संक्षेप:

Pilibhit News - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरुभाई योगी शांतिनाथ बीती रात ब्रह्मलीन हो गए। एक वर्ष से बीमार चल रहे शांतिनाथ को उनके शिष्यों ने सीएचसी पहुँचाया। नूरानपुर मठ में समाधि दी गई, जिसमें कई साधु संतों और...

Oct 10, 2024 01:08 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पीलीभीत
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरुभाई योगी शांतिनाथ बीती रात ब्रह्मलीन हो गए। नूरानपुर मठ पर उनकी तबियत बिगड़ने के बाद उनके शिष्य उन्हें सीएचसी लेकर पहुंचे। एक वर्ष से बीमार चल रहे योगी शांतिनाथ ब्रह्मलीन होने की जानकारी गोरखपुर में गोरक्षनाथ धाम पीठ को दी गई। वहां से जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंची। वहीं केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने भी शोक व्यक्त किया है। नूरानपुर आश्रम परिसर में ही दोपहर को उनकी देह को समाधि दी गई। गोरक्षनाथ धाम से हनुमान नाथ, दिनेश नाथ, ओमकार नाथ समेत कई प्रमुख साधु संतों के पहुंचने के बाद उन्हें समाधि दी गई। बरेली शाहजहांपुर समेत कई जिलों से नाथ व अन्य सम्प्रदाय से जुड़े संत, योगी सेना, बजरंग दल समेत अन्य संगठन के लोग भी पहुंचे। जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम नागेन्द्र पांडेय, सीओ प्रतीक दाहिया, तहसीलदार करम सिंह चौहान, नायब तहसीलदार समेत बिलसंडा दियोरिया के इंस्पेक्टर व पुलिसफोर्स मुस्तैद रही। भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा, विधायक विवेक वर्मा, विधायक प्रवक्तानन्द प्रधान सचिन गंगवार, सुखलाल, नरेन्द्र सिंह गंगवार, नरेश कातिब, संजय शर्मा समेत सैकड़ों की तादात में लोग मठ पहुंचे।

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कानून के भी जानकार ज्ञाता थे, जमीन बचाई नुरानपुर को पहचान दिलाई

बिलसंडा। शिव गोरखनाथ मंदिर नूरानपुर का इतिहास करीब सवा सौ साल पुराना है। 18 एकड़ जमीन मंदिर के नाम है। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद पांच साल पूर्व 14 नबम्बर 2019 को गुरुभाई के बुलावे पर यहाँ आए थे। मंदिर के कायाकल्प के लिये 5.86 करोड़ की सौगात देते हुए पर्यटनस्थल घोषित किया। पांच सौ सामूहिक शादियों का आयोजन हुआ। 14 करोड़ से आश्रम पद्धति का छात्रावास मंजूर कराया। मुख्यमंत्री के आगमन के बाद शांतिनाथ की पहुंच का खुलासा पुलिस व प्रशासन तक पहुंचा था। वे कानूनी मामलों के भी जानकार थे। मुख्यमंत्री योगी के सत्ता में आते ही शांतिनाथ का रुतबा था। आश्रम के बाहर रोज रात को पुलिस की पिकेट रहती थी। उनके अनुयायी आज गम में डूबे हैं। बरखेड़ा चतुराह के पूर्वप्रधान रामसिंह से कुछ दिन पहले ही शांतिनाथ ने शारीरिक अस्वस्थता पर चर्चा की थी। अस्वस्थ होने के चलते नवरात्र में गोरक्षनाथ पीठ नहीं पहुंच सके थे। गोरखपुर से एक शिष्य भास्करनाथ को भी यहां बुलाया गया था।