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गुरु पूर्णिमा पर पूजा अर्चना, मंदिर के कपाट बंद

गुरु पूर्णिमा पर पूजा अर्चना, मंदिर के कपाट  बंद

1 / 2गुरु पूर्णिमा का पर्व मंगलवार का श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की और अपने गुरुओं को याद किया। स्कूलों में भी यह पर्व मनाया गया। दोपहर बाद चन्द्र ग्रहण का...

गुरु पूर्णिमा पर पूजा अर्चना, मंदिर के कपाट  बंद

2 / 2गुरु पूर्णिमा का पर्व मंगलवार का श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की और अपने गुरुओं को याद किया। स्कूलों में भी यह पर्व मनाया गया। दोपहर बाद चन्द्र ग्रहण का...

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गुरु पूर्णिमा का पर्व मंगलवार का श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की और अपने गुरुओं को याद किया। स्कूलों में भी यह पर्व मनाया गया। दोपहर बाद चन्द्र ग्रहण का सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद हो गए।

गुरु की महिमा को हमारे धर्म ग्रंथों ने जन-जन तक पहुंचाया है। गुरु को ही ज्ञान का श्रोत माना गया है और उन्हें भगवान से अधिक महत्व दिया गया है। देवलोक से लेकर भूलोक तक गुरु के प्रति श्रद्धा अर्पित करने को ही गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर जहां लोग अपने अराध्य देवों की पूजा अर्चना करते हैं वहीं अपने गुरुओं से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार गुरु पूर्णिमा पर चन्द्र ग्रहण का भी योग है। बताया जाता है यह योग डेढ़ सौ वर्षों बाद बना है। इस योग के चलते ही इस बार गुरु पूर्णिका का पर्व विशेष माना गया। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जहां सभी देवी देवताओं की पूजा अर्चना की वहीं देवों के गुरु बृहस्पति को भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस पर्व पर शहर के यशवंतरी देवी मंदिर में ग्रामीण क्षेत्रों से आए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर में पूजा अर्चना को महिलाओं व पुरुषों की अलग-अलग कतार लगी रही। दोपहर तक मंदिर में पूजा अर्चना को भक्त जमे रहे। अन्य मंदिरों में भी भक्त पूजा के लिए पहुंचे।

दोपहर बाद बंद हुए मंदिरों के कपाट

गुरु पूर्णिमा पर चन्द्र ग्रहण का योग होने का असर मंदिरों में दिखा। इस योग के चलते दोपहर बाद भक्तों के लिए मंदिरों के कपाट बंद हो गए। इस पर्व पर चन्द्र ग्रहण का समय यूं तो रात 1.30 बजे से सुबह 4.30 बजे तक रहा, पर इसका सूतक काल चन्द्र ग्रहण शुरू होने के नौ घंटा पहले ही शुरू हो गया। इस तरह चन्द्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर बाद 4.30 बजे से शुरू हो गया। सूतक काल में मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ ही सभी धार्मिक कार्य वर्जित बताए गए हैं। इसके चलते मंगलवार को दोपहर बाद मंदिरों के कपाट बंद होना शुरू हो गए। यह कपाट बुधवार सुबह सूतक काल पूरा होने के बाद ही खुले। चन्द्र ग्रहण के चलते शहर में गौरीशंकर मंदिर, दूधियानाथ मंदिर, अद्र्धनारीश्वर मंदिर, यशवंतरी देवी मंदिर, निरंजनकुंज कालोनी के महामातेश्वरी देवी मंदिर सहित सभी छोटे-बड़े मंदिरों के कपाट बंद हो गए।

सरस्वती शिशु मंदिर में मना गुरु पर्व

शहर के संत राम सरस्वती शिशु मंदिर में मंगलवार को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। इस अवसर पर सभी बच्चे और आचार्य स्कूल के सभागार में एकजुट हुए। यहां प्रिंसिपल ओम प्रकाश दीक्षित ने बच्चों को इस पर्व के बारे में बताते हुए गुरु और शिष्य परंपरा के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा गुरु वह है जो अज्ञान का निराकरण करता है। गुरु वह है जो धर्म का मार्ग दिखाता है। स्कूल में इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा की अर्चना और महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण कर हुआ। इस अवसर पर आचार्य राजेन्द्र मिश्रा ने भी बच्चों को गुरु की महिमा के बारे में बताया। कार्यक्रम में सभी आचार्य और बच्चे मौजूद रहे। इसी तरह यह पर्व जिलेभर के विद्याभारती के स्कूलों में श्रद्धापूर्वक मनाया गया।

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  • Web Title:Worship of Guru Purnima worship hall of temple