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22 सितम्बर, 2020|9:49|IST

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मजदूरों को रुला रहा कोरोना, काम छिना अब रोटी का भी संकट

मजदूरों को रुला रहा कोरोना, काम छिना अब रोटी का भी संकट

1 / 2बेरोजगारी से उबरने के लिए हजारों मजदूर घर छोड़कर परदेश गए। जी तोड़ मेहनत की, शहरों को संवारा, बसाया, तैयार...

मजदूरों को रुला रहा कोरोना, काम छिना अब रोटी का भी संकट

2 / 2बेरोजगारी से उबरने के लिए हजारों मजदूर घर छोड़कर परदेश गए। जी तोड़ मेहनत की, शहरों को संवारा, बसाया, तैयार...

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बेरोजगारी से उबरने के लिए हजारों मजदूर घर छोड़कर परदेश गए। जी तोड़ मेहनत की, शहरों को संवारा, बसाया, तैयार किया। कभी ऊंची ऊंची बिल्डिगें बनाईं तो कभी अपने हुनर का कमाल दिखाया। कई साहब ही नहीं देश तक को चमका दिया। मगर जब अपने पर पड़ी तो सब सामने आ गया। वर्षों साहब की जी हुजूरी करने वाले मजदूरों को दस दिनों में ही पराया कर दिया गया।

गुरुग्राम में शू कंपनी के स्थानीय आठ मजदूर लॉकडाउन में दस दिन भूखे-प्यासे कमरे में फंसे रहे। गुरुग्राम क्या दिल्ली, फरीदाबाद, नोयडा समेत बड़े शहरों के लोगों ने मजदूरों का साथ लाकडाउन में ऐसा छोड़ा कि अब मजदूर वहां जाने की भी नहीं सोचते। बबूरा गांव के श्रीकृष्ण बताते हैं कि वहां अब नहीं जाना। बोले 8 सालों तक मैने मेरे बच्चों ने अपने साहब की सेवा की। लॉकडाउन में ऐसा मुंह मोड़ा, कि अब भूखे रहेंगे मगर बाहर नहीं जाएंगे। मेहनत की इस सिला का दर्द हजारों मजदूरों को हैं। इनके बिना कुछ संभव नहीं। मगर विडंबना भी ये है कि इनका ध्यान किसी को नहीं?

दस लोगों के परिवार को चलाना मुश्किल

इरशाद बोले, आठ बच्चे हैं। दस लोगों के परिवार को चलाना मुश्किल है। पहले गांव गांव कबाड़ खरीदते थे। अब धंधा ही बंद हो गया। जा भी नहीं सकता। लोग आते भी नहीं। सब्जी, फल बेच रहा हूं। पहले तीन से चार सौ कमाता था। अब दो सौ भी मुश्किल। घर चलाना मुश्किल है।

सभी की तरह मुझे भी डर लगता है।

विष्णु बोले, सभी की तरह मुझे भी डर लगता है। सोचता हूं बाहर न निकलूं। मगर साफसफाई का काम कौन करेगा। तीन साल से काम कर रहा हूं। अब मजबूरी भी है। जाएं तो कहां जाएं। काम तो करना ही है। पूरे नगर को सेनेटाइज करता घूम रहा हूं।

कोई किसी का नहीं होता

सचिन कुमार ने कहा कि कोई किसी का नहीं होता। तीन साल तक जिस शू कंपनी में हरियाणा में काम किया। लाकडाउन में उसने साथ छोड़ दिया। दस दिन भी वो हमें नहीं खिला सका। मजबूरन जैसे तैसे घर पहुंचा। अब धंधा बंद है। गांव में हूं कम से कम यहां रोटी का तो प्रबंध हो ही जाएगा।

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  • Web Title:Workers are making Corona work lost now even bread crisis