DA Image
21 सितम्बर, 2020|5:27|IST

अगली स्टोरी

कोरोना नहीं बाघ की आवाजाही से डरते हैं ग्रामीण

कोरोना नहीं बाघ की आवाजाही से डरते हैं ग्रामीण

गजरौला क्षेत्र के गांवों में कोरोना से ज्यादा बाघ की आवाजाही की दहशत है। तीन माह से लगातार बाघों की अलग अलग गांवों में चहल कदमी है। यही नहीं पिछले दिनों छह लोगों की मौत होना भी लोगों के कलेजे में डर पैदा कर रहा है। कोरोना का खौफ तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दूर कर रहा है पर वन विभाग बाघों का खौफ लोगों के मन से नहीं निकाल पा रहा। आलम यह है कि छूट के बाद भी लोग खेतों पर काम करने नहीं जा पा रहे हैं।

गजरौला क्षेत्र में बाघों का आतंक पहली फरवरी से उस वक्त से शुरू हुआ था जब गांव बैजूनगर के फूलचंद को बाघ ने मार डाला था। इसके बाद पांचवे दिन ही गांव विधिपुर में रूपलाल को बाघ ने मार दिया। इन दो घटनाओं के बाद बाघ की चहल कदमी खेतों में होती रही और पशुओं को मारने की घटनाएं हुई। इसके बाद इसी क्षेत्र में माला कालोनी में 22 मार्च को बाघ ने खेत पर काम करने के दौरान एक महिला को मार दिया था। 29 मार्च को कालोनी मे ही बाघ ने ग्रामीण को निवाला बना लिया था। बाघ का आतंक ऐसे ही जारी रहा और फिर अप्रैल की शुरूआत में रिछौला में बाघ ने दो लोगों को एक साथ मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि वन विभाग ने बाघ को पकड़ तो लिया था लेकिन दहशत कम नहीं कर पाए हैं। यही कारण है कि जंगल से बाहर घूम रहे बाघ ने जरी गांव के पास तीन ग्रामीणों के अलावा वन विभाग की टीम पर हमला कर दिया।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Villagers are afraid of tiger movement not Corona