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19 जनवरी, 2021|2:15|IST

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तीन साल में टाइगर रिजर्व को हुई 84 लाख से अधिक आय

तीन साल में टाइगर रिजर्व को हुई 84 लाख से अधिक आय

नौ जून 2014 को पीलीभीत के जंगल को जब टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला तब से लगातार नई ऊंचाईंयों को का शिखर बनता जा रहा है। तीन साल में लगातर पर्यटकों की संख्या में जिए तरह से इजाफा हुआ उसी तरह से इसकी आय में भी दिन दूनी और रात चौगुनी की बढोत्तरी होती गई। तीन साल में पीलीभीत के जंगल और वन्यजीवों का दीदार करने के लिए 48098 सैलानी आए तो इनसे टाइगर रिजर्व को 84 लाख रुपए से अधिक आय होने का सौभाग्य भी है। आय के साथ ही जंगल में वन्यजीवों की संख्या में भी खासा इजाफा हुआ है। 15 से एक बार फिर से खुल रहे चूका पिकनिक स्पाट से अधिकारी नया लुक होने का दावा करते हुए आय बढ़ने की संभावना जता रहे है।

पीलीभीत के जंगल को वर्ष 2014 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। यह दर्जा मिलने के बाद यहां पर सैलानियों की संख्या में भी खासा इजाफा होने लगा। हालांकि इससे पहले चूका के नजारे के कायल पर्यटकों के आने की संख्या भी बेहतर रही थी, लेकिन बाद में साल दर साल बढोत्तरी होती रही। टाइगर रिजर्व का तीन साल का सफर अब तक काफी अच्छा रहा है। यहां पर देश ही नहीं विदेश से भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं। विदेशी मेहमानों के आने का गौरव भी इसे पिछले साल मिला है। इस बार भी अधिकारी पर्यटकों को रिझाने के लिए बहुत कुछ अलग होने का दावा कर रहे है जो दिखाई भी देगा।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के चूका और अन्य विश्राम गृहों में वैसे तो पर्यटक कई साल से आ रहे है लेकिन टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां पर सैलानियों की संख्या में लगतार इजाफा हो रहा है। सैलानी बढ़ने के साथ ही आय में भी आशातीत काफी बढोत्तरी हो रही है। वर्ष 2011-12 से अब तक आए पर्यटकों पर नजर डाले तो आकड़े चौकाने वाले है।

करीब तीन साल पहले बाघों की हत्या के बाद यहां पर इनकी संख्या काफी कम हो गई थी। इसको लेकर तत्कलीन सपा सरकार के मंत्री हेमराज वर्मा ने चिंता जताते हुए शासन स्तर पर इस समस्या को रखा था। पैरवी के बाद जो प्रयास हुए उसका अब सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। मौजूदा समय में जहां अन्य वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं बाघों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। 37 बाघों से बढ़कर संख्या अब 54 हो गई है। इसमें 38 वयस्क बाघ है और आठ शावकों के साथ आठ अवयस्क है। सभी की लगातार कैमरों में लोकेशन भी मिल रही है। इसके अलावा आकड़ों पर यदि नजर डाले तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व में भालू के अलावा हिरन, पाड़ा, सांवर के अलावा अन्य जानवरों की संख्या में काफी बढोत्तरी हुई है।

वर्ष 2001 में भालू की संख्या 59 थी जो अब 103 है।

बारहसिंद्या की वर्ष 2001 में संख्या 117 थी जो अब 561 है। इसके अलावा गणना के अनुसार मौजूदा समय में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सांभर 195, चीतल 4104,चौसिंद्या 52, सुअर 4391,नीलगाय 4479, पाड़ा 670, कांकड 375, बंदर 13710, लंगूर 2885 है। जंगल में अभी भारतीय गैण्डा नहीं है जो लैग्गाभग्गा में नेपाल के है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद यहां पर बाघों का हमला भी कफी बढ़ा है। वन विभाग के आंकड़ों पर ही यदि नजर डाले तो तीन अक्टूबर वर्ष 2016 से अब तक 19 लोग बाघ के शिकार हुए है। इसमें आठ लोग जंगल क्षेत्र में लकड़ी बीनने के दौरान बाघ के हमले में मारे गए है। 11 लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया गया है।

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  • Web Title:Tiger Reserve has more than 84 lakh earnings in three years