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गोष्ठी और प्रतियोगिता से बाघ संरक्षण पर दिया जोर

गोष्ठी और प्रतियोगिता से बाघ संरक्षण पर दिया जोर

बाघ दिवस पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों ने जंगल किनारे गांवों में लोगों को जागरूक करने के लिए पैदल गश्त की। इस दौरान ग्रामीणों को वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर जानकारी दी गई। इसके अलावा महोफ में भी एक कार्यक्रम हुआ। इसमें स्कूली बच्चों को भी शामिल किया गया। वन के अधिकारियों ने बाघ दिवस के बारे में लोगों को जानकारी दी। छात्रों को बाघों के अलावा जंगल और अन्य वन्यजीवों के रहन सहन के बारे में बताया गया। इसके अलावा शहर में भी वन्यजीव प्रेमियों ने गोष्ठी कर बाघ और जंगल के संरक्षण का संकल्प लिया। सामाजिक वानिकी वन प्रभाग ने भी गोष्ठी कर जागरूकता फैलाई।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डा. एच राजा मोहन ने कहा कि पीलीभीत में ज्यादातर हिस्सा जंगल से लगा हुआ है। इससे वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं कुछ माह से बढ़ी है। संघर्ष की घटनाओं को ग्रामीण जागरूक होकर रोक सकते हैं। इसके लिए किसान झुंड बनाकर खेत पर जाएं और अंधेरा होने से पहले खेतों से लौट आएं। उन्होंने कहा कि जिस तरह मानव का जीवन इस धरती पर जरूरी है ठीक उसी तरह वनों और वन्य जीवों का होना भी बहुत जरूरी है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने ग्रामीणों को वन्यजीवों से रूबरू कराते हुए कहा कि जंगल के आसपास या फिर जंगल से बाहर कोई भी वन जीव दिखाई दे तो तुरंत जंगल के स्टाफ को जानकारी दें। हमारा मकसद केवल विश्व बाघ दिवस मनाना नहीं बल्कि वन जीव संघर्ष को भी रोकना है।

हमारी वजह से किसी जानवर को कोई दिक्कत न हो और हम अपनी सीमा में रहे तो जंगली जीव भी जंगल के अंदर ही रहेंगे। इस मौके पर प्रधान सतराम, महोफ़ रेंजर गिरिराज सिंह, जीजीआईसी की प्रधानाचार्य सुखविंदर कौर, इंद्रजीत, मुख्तार बक्स, पुष्पेंद्र, पप्पू सहित ग्रामीण और पीलीभीत टाइगर रिजर्व का स्टाफ मौजूद रहा। सामाजिक वानिकी प्रभाग ने विश्व बाघ दिवस पर अमरिया क्षेत्र के डियूनी डैम इलाके में एक गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें प्रभागीय वनाधिकारी संजीव सिंह ने क्षेत्र में घूम रहे टाइगर के बारे में बताया कि जानवर हमारी तरह नहीं सोच सकता है, लेकिन इंसान जानवरों से दूरी बना सकते हैं। अगर आज हमने इनकी हिफाजत नहीं की तो कल हम सिर्फ विश्व बाघ दिवस ही मना सकेंगे लेकिन हमारे आने वाली पीढ़ी बाघों को नहीं देख पाएगी। इसके लिए क्षेत्र में जब तक बाघों की मौजूदगी है तब तक आप लोग सतर्क रहें। समाज कल्याण एवं विकास अध्ययन केन्द्र की ओर से विश्व बाघ दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। समाज कल्याण एवं विकास अध्ययन केन्द्र के परवेज हनीफ ने कहा जंगल से केवल जीवों का जीवन नहीं बल्कि हर उस चीज का जीवन है जो की दुनिया में सांस लेता है, इसलिए पहले हमें अपने अपने क्षेत्रों में जंगलों की हिफाजत करना चाहिए उसके बाद जंगल में रहने वाले जीवों की।

पीलीभीत भले ही कितना पिछड़ा हो, लेकिन यहां के जंगल और टाइगर रिजर्व के नाम से आज पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मौके टाइगर रिजर्व के गाइड बिलाल मियां ने कहा हम सब को अपने परिवार की तरह जंगल और उसमें रहने वाले जीवों की हिफाजत करनी चाहिए। बाघ को देखना या बाघ दिवस मनाना हमारा मकसद नहीं हमारा मकसद है वन्यजीव की हिफाजत करना और कम से कम अपनी जिंदगी में दो पौधे जरूर लगाना। दो पौधे हमारी आने वाली नस्ल के सांस लेने के काम में आएंगे। गोष्ठी में कई वक्ताओं ने अपनी अपनी सुझाव रखें। इस दौरान रचित, मोनू, विवेक सक्सेना, आशीष कुमार, हिलाल नूरी, अनुज कश्यप, मोहित शर्मा मौजूद रहे।

गोस्वामीज़ मॉम्स प्राइड में बाघ दिवस पर दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से आए अधिकारियों और डॉक्टरों की टीम ने कक्षा पाँच से आठ तक के बच्चों को बाघ और अन्य वन्यजीवन के बारे में बताया। इस मौके पर स्कूल में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में रैपिड रिस्पॉस टीम के हैड प्रेम चन्द्र पाण्डेय और डा. दक्ष गंगवार ने टीम के साथ बच्चों को बताया कि कितनी तेज़ी से बाघों की संख्या में गिरावट आ रही हैं। सबसे शक्तिशाली जानवर होने के बावजूद इनका शिकार होने से संख्या मात्र साढ़े तीन से साढ़े चार हज़ार रह गई है। उन्होंने बाघों का संरक्षण और 29 जुलाई को पूरे विश्व में बाघ दिवस मनाने के बारे में बताया। बच्चों ने भी बाघों व वन्य जीवन में अपनी रूची जताते हुए स्कूल परिसर में आई टीम से अनेकों प्रश्न पूछे। प्रबंधक निशांत गोस्वामी ने बच्चों को बाघों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य बताए और कहा कि कैसे बाघ वन्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है व किस प्रकार वे जानवरों के मध्य संतुलन बनाए रखते हैं। कार्यक्रम का संचालन स्कूल की प्रधानाचार्य सोनिया गोस्वामी ने किया।

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  • Web Title:Thrust on Tiger Conservation from the Conference and Contest