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21 अक्तूबर, 2020|10:19|IST

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लॉकडाउन में ठिठकी पीलीभीत आने वाले हाथियों की रफ्तार

लॉकडाउन में ठिठकी पीलीभीत आने वाले हाथियों की रफ्तार

लॉकडाउन में जहां सभी लोगों को कोई न कोई परेशानी उठानी पड़ी तो टाइगर रिजर्व को भी इसका नुकसान झेलना पड़ा है। टाइगर रिजर्व को मांग के बाद भी हाथी नहीं मिल सके। कोरोना संक्रमण के दौर में हाथियों को यहां लाने की कवायद फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई। अब स्थिति सामान्य होने के बाद ही हाथियों को लाने के लिए एफडी कर्नाटक जाएंगे और जांच और परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व गांवों से घिरा होने के कारण कहीं न कहीं मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं होती रहती है। बाघ की गांवों की ओर लोकेशन होने के कारण निगरानी के लिए दुधवा से हाथी बुलाए जाते हैं और इसस काफी बजट खर्च होता है। समस्याओं को लेकर पीटीआर के लिए हाथियों की मांग की गई थी। बीते एक साल पहले कर्नाटक सरकार ने पीटीआर को हाथी देने की हामी भरी थी। इसके तहत यहां पर हर रेंज के लिए दो हाथी आने थे। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद वहां से आने वाले हाथियों का सैंपल लेकर बरेली आईबीआरआई से जांच करानी थी। इसकी तैयारी चल ही रही थी कोरोना का कहर आ गया और लाकडाउन ल गया। लाकडाउन लग जाने से एफडी वहां नहीं पहुंच पाए औा हाथियों की रवानगी और सेंपल का काम भी जहां का तहां ठहर गया। इससे एक बार फिर हाथियों के आने की कवायद पर ब्रेक लग गया। अब कोरोना की स्थित साफ होने के बाद ही हाथियों को यहां लाने की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

छह तरह की होनी थी हाथियों की जांच

कर्नाटक सरकार ने पीटीआर को दस हाथी देने की हामी भरी थी लेकिन इसमें कई तरह की जांच भी जररुी थी। इसमें हाथियों को पीलीभीत रवाना करने से पहले सैंपल लेकर बरेली भेजना था। इसके लिए बरेली आईबीआरआई की टीम को भी वहां सैंपल के लिए जाना था। हाथियों के सूढ़ से निकले पानी, मल, मूत्र सहित छह प्रकार क जांच होना था। यह सब अब बाद में होगा।

कर्नाटक सरकार ने दस हाथी दिए हें और उनको यहां लाना था। इसके लिए जांच भी होनी थी। कोरोना होने के कारण वह कर्नाटक नहीं पहुंच पा रहे हैं और सैंपल भी नहीं हो पाया है। अब स्थित सामान्य होने के बाद प्रक्रिया शुरू होगी। सभी पांचों रेंजों में दो दो हाथी दिए जाएंगे।

डॉ. एच राजा मोहन, एफडी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

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  • Web Title:The speed of elephants coming to lock in the lockdown