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12 नबम्बर, 2019|5:58|IST

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चाय पर चर्चा कर की फैसले की सराहना

चाय पर चर्चा कर की फैसले की सराहना

अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरनपुर में सभी ने स्वागत किया। हांलाकि बाजार में चहल पहल कम देखी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दिन भर भाग दौड़ करते रहे। मुख्य चौराहों पर पुलिस भी तैनात थी, लेकिन माहौल सामान्य रहा।

सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले को लेकर प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा के इंतजाम कर लिए थे। फैसला आने के बाद एसडीएम, सीओ और तहसीलदार सहित सभी अधिकारी हर एक हरकत पर नजर बनाए रहे। इसके अलावा सुरक्षा को लेकर नगर के सभी चौराहों पर सुरक्षा उपकरणों के साथ पुलिस कर्मी मुस्तैद रहे। शनिवार को तो बाजार में भी भीड़ भाड़ कम रही, लेकिन रविवार को शहर की रवानगी सामन्य नजर आई। लोग फैसला सुनने के लिए टीवी पर नजर बनाए रहे। एसडीएम, सीओ और तहसीलदार सहित भारी पुलिस फोर्स स्टेशन चौराहे पर बैठे रहे।

इधर, पूरनपुर में सौहार्द भरा माहौल देखा गया। एक जगह दुकान पर दो अलग-अलग समुदाय के लोग चाय पर चर्चा करते नजर आए। वह फैसले पर बात तो कर रहे थे, लेकिन उनमें कोई उत्तेजना नहीं थी। उन्होंने फैसले की सराहना की।

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एक साथ आए सभी धर्म गुरुओं को किया सम्मानित

आपसी प्रेम भाईचारे और देश में गंगा जमुनी तहजीब बनी रहे। इसको लेकर पूरनपुर के गायत्री परिजन संदीप खंडेलवाल ने शनिवार को अपने निवास पर सभी धर्मों के विशेष जनों को आमंत्रित कर उनको सम्मानित किया। यहां पर पंडित अनिल शास्त्री, सरदार बाबा जसपाल सिंह, मुस्लिम धर्म गुरू इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी, आनंद प्रकाश अगस्टिन और अमरजीत सिंह पूर्व सैनिक को दोशाला ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू ,मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी आपस में भाई हैं। इस दौरान सभी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। इसके साथ ही लोगों से भी आपसी सौहार्द बनाए रखने की सभी ने अपील की।

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मुसलमान फैसला सच्चे दिल से करें कुबूल: मुफ्ती साजिद

पूरनपुर। मुफ्ती साजिद हसनी ने कहा पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद अलैहिस्सलाम ने हमे ये तालीम दी है कि मुल्क से मोहब्बत ईमान का एक हिस्सा है। मुसलमान जान दे सकता है मगर अपने मुल्क की एकता, अखण्डता, कौमी यकजहती और आपसी प्यार मोहब्बत पर कोई आंच नहीं आने देगा। इस्लाम अमन ओ शान्ति का मज़हब है जो प्यार मोहब्बत की ही तालीम देता है। हमें ये बात याद रखना चाहिए कि इसी देश मे मिलजुल कर रहना है और यहीं मरना और यहीं जीना है। बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि पर फैसला किसी की हार और किसी की जीत नहीं इसलिए अपनी जीत पर न कोई जश्न मनाए और न हार पर कोई अफसोस। ये एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे सबको स्वीकार करना चाहिए।

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