
शारदा नदी के तट पर बह रही भक्ति की बयार
Pilibhit News - पूरनपुर में संत महात्माओं ने शारदा नदी के तट पर कल्पवास शुरू कर दिया है। एक महीने तक वे भजन-कीर्तन करेंगे और आध्यात्मिक चर्चाएं करेंगे। इस बार लगभग 250 लोग कल्पवास कर रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद, संतों का दिन धार्मिक गतिविधियों में व्यतीत होता है। मकरसंक्रांति पर दूसरा स्नान होगा।
पूरनपुर। शारदा नदी के तट पर संत महात्माओं ने धूनी रमा ली है। सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान किया जाता है। एक महीने तक नदी की कलकल के साथ भजन कीर्तन का सुर मिलेगा। अध्यात्म के गूढ़ बिषयों पर चर्चाएं होंगी। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी भी संतों के तप के आगे कमजोर पड़ जाती है। नदी के तट पर एक महीने तक संतों का कल्पवास रहेगा। माघ महीने में नदियों में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शारदा नदी के धनाराघाट पर माघ महीने में साधू संत एक महीने तक हर साल कल्पवास करते हैं। इस बार भी घास फूस की झोपड़ी डालकर कल्पवास के लिए रामनगरिया बस गई है।
इस बार पीलीभीत के अलवा, बरेली और शाहजहंापुर के संत महात्माओं की लगभग पचास झोपड़ी डाली गई हैं। इनमें दिन पर धूनी सुलगती रहती है। इस दौरान हरमोनियम, ढोलक और मंजीरे के साथ भजन कीर्तन किए जाते हैं। झोपड़ियों में रह रहे संत महात्मा रोजाना ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर शारदा नदी में स्नान करते हैं। उसके बाद उनका दिन अध्यात्मिक चर्चाओं में गुजरता हैं। आस पास के गांवों के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। इससे वातावरण भक्तिमय बना रहता हैं। इस बार नदी के तट पर लगभग ढाई सौ लोग कल्पवास कर रहे हैं। पूस पूर्णिमा पर पहला स्नान किया गया। मकरसंक्रांति को दूसरा स्नान किया जाएगा। इस दौरान धनाराघाट पर श्रद्धालु की भीड़ भी पहुंचेगी। अमावस्या के बाद अन्य जिलों के भी साधू संत कल्वास के लिए नदी किनारे पहुंचेंगे। कल्वास कर रहे मंहत बाबा राघवदास ने बताया कि 26 जनवरी से कल्पवास में यज्ञ शुरु होगा जो निरंतर एक फरवरी तक चलेगा। इसमें सैकड़ों लोग आहुतियां अर्पित करेंगे।

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