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21 अक्तूबर, 2020|6:29|IST

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खुद को मुसीबत में डालकर औरों के लिए बने सुरक्षा कवच

खुद को मुसीबत में डालकर औरों के लिए बने सुरक्षा कवच

1 / 2धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर कोरोना संक्रमण के दौर में वास्तव में लोगों के लिए ईश्वर के दूत बने। रात दिन संक्रमितों की देखभाल और उनको इलाज के साथ ही हौसला बढ़ाने का काम करते हुए चिकित्सकों ने...

खुद को मुसीबत में डालकर औरों के लिए बने सुरक्षा कवच

2 / 2धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर कोरोना संक्रमण के दौर में वास्तव में लोगों के लिए ईश्वर के दूत बने। रात दिन संक्रमितों की देखभाल और उनको इलाज के साथ ही हौसला बढ़ाने का काम करते हुए चिकित्सकों ने...

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धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर कोरोना संक्रमण के दौर में वास्तव में लोगों के लिए ईश्वर के दूत बने। रात दिन संक्रमितों की देखभाल और उनको इलाज के साथ ही हौसला बढ़ाने का काम करते हुए चिकित्सकों ने समाज के लिए अनूठी सेवा की है।

वह न केवल मिसाल बने बल्कि समाज और देश के सुरक्षा कवच की तरह से जिम्मेदारी से काम करते नजर आए। कोविड में लगे ऐसे ही डॉक्टरों के सामने परिवार की चिंता नहीं बड़ी नहीं बल्कि समाज और जिले के अलावा मरीजों की चिंता उनकी प्राथमिकता में रही। कोविड मे लगे ऐसे ही डॉक्टर कई माह से जहां घर नहीं पहुंचे हैं तो किसी ने परिवार के लोगों को सुरक्षित करने के लिए दूरी बना ली है। घर जाने के बाद भी वह परिवार के साथ थोड़ा वक्त नहीं गुजार पा रहे हैं। ऐसे कोरोना योद्वाओं से हिन्दुस्तान ने जब बात की तो वास्तव में चिकित्सा पेशे को दिल से नमन किया।

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होली के बाद से नहीं गए घर, क्वारंटीन सेंटर को बनाया ठिकाना

कोविड ड्यूटी में लगे ललौरीखेड़ा के डॉ. देवेन्द्र अस्थाना वैसे तो मार्च से कोरोना में काम कर रहे हैं। वे होली पर दो दिन की छुट्टी पर गए थे। इसके बाद उनको अग्रवाल सभा भवन के क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया। यहां पर उन्होंने अपनी परवाह किए बिना ही वहां भर्ती लोगों की सेवा की। संक्रमितों के परिवार के लोगों के साथ सदभाव का नाता जोड़कर उनकी समस्याओं को देखा और बेहतर काम किया। तीन माह से वह लगातार यहीं पर है। अब तक उनके क्वारंटीन सेंटर से निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद करीब दो सौ लोगोें को डिस्चार्ज किया जा चुका है तो सेंटर पर मौजूद रहे लोगों में 37 पाजीटिव आए हें। उनको कहना है कि कोविड में लोगों की सेवा करना और ड्यूटी करना सौभाग्य की बात है। ड्यूटी मिलने से उनको समाज और देश की सेवा करने का मौका मिला जो वह खोना नहीं चाहते हैं।

घर में परिवार और दो साल की बेटी से बना ली दूरी

जिला अस्पताल के आयुष विंग में तैनात डॉ. अदनान भी क्वारंटीन सेंटर में बीते ढाई माह से ड्यूटी कर रहे हैं। उनको कहना है कि वह यहां पर काम कर रहे हैं तो इससे अच्छा अवसर कोई नहीं हो सकता है। खुद की चिंता न कर उनको समाज और जिले के लोगों की चिंता रहती है। कम समय के लिए वह घर जाते हैं तो वहां भी अलग से ही कमरा है और कपड़ों को परिवार के लोगों को छूने नहीं देते हैं। परिवार में मौजूद दो साल की बेटी की बात कहकर वह भावुक हुए और कहा कि बेटी से भी दूरी बना ली ताकि उसको कोई परेशानी न हो। खुद को अलग कर वह औरों और परिवार के लोगों को सुरक्षित कर रहे हैं। खाली समय होने के बाद भी बेटी और परिवार के साथ समय नहीं बिता पा रहे हैं।

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  • Web Title:Safety armor made for others by getting themselves in trouble