पीटीआर में दो किमी. का क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन घोषित
Pilibhit News - जंगल की परिधि में व्यवसायिक गतिवियों वाले निर्माण नहीं होंगेपीटीआर में दो किमी. का क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन घोषितपीटीआर में दो किमी. का क्षेत्र इको से

पीलीभीत। हिटी पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बहुप्रतीक्षित इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर पीटीआर में दो किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया है। इससे कहीं खुशी कहीं गम जैसी बात सामने आई है। इसी के साथ जंगल में अब पर्यटन को लेकर व्यापक नीति रीति के अनुसार होम स्टे और होटल आदि तय परिधि में विकसित हो सकेंगे। पूर्व दस किलोमीटर वाले इको सेंसिटिव जोन की अवधारणा के बाद इस बात पर चर्चा थी कि जब जंगल के आसपास रिहायश बढ़ रही है बस्ती बढ़ी हैं तो ऐसे में नए नियमों और संहिता के अंतर्गत इसको घोषित किया जाए।
तब माना गया था कि डेढ़ से दो किलोमीटर तक जंगल के आसपास इको सेंसिटिव जोन तय हो जाएगा। पर तमाम कवायद के बीच अब पीटीआर का इको सेंसिटिव जोन दो किमी. की परिधि में घोषित कर दिया गया है। इससे जंगल के अंदर से बाहर दो किमी. दायरे में कोई वित्तीय गतिविधियों वाले कार्य नहीं हो सकेंगे। इसमें आरा मशीनें हों, होम स्टे हो रेस्टोरेंट हो अथवा खनन के काम हों। यह पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है। 00 अनाधिकृत निर्माण आ गए रडार पर ईको सेंसिटिव जोन को लेकर पहली बैठक तत्कालीन डीएम पुलकित खरे के कार्यकाल में एडीएम सूरज यादव और डीएफओ नवीन खंडेलवाल के समय हुई थी। पर इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका था। 00 पीटीआर के रडार पर आए कई काम दस किमी. का ईको सेंसिटिव जोन होने की बात को लेकर यहां कारोबारियों समेत अन्य स्थानीय लोगों को बड़ा झटका लगा था। मामला डीएम और शासन तक गया। कई स्तर पर पत्राचार हुआ था। लंबे समय से इसकों लेकर प्रतीक्षा की जा रही थी। अब रुके हुए काम नियमपूर्वक चालू होंगे और जो अनाधिकृत निर्माण कराए गए हैं वो पीटीआर के निशान पर आ गए हैं। 00 मिलेगी एनओसी काम होंगे अब एनओसी जारी होंगी और रुके हुए काम शुरू हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से संबंधित इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) की अधिसूचना जारी कर दी है। पर्यावरण संरक्षक अधिनियम 1986(1986 का 29) की धारा के अंतर्गत गजट जारी किया गया है। 00 73 हजार वर्ग किमी. में हैं पीटीआर पीटीआर के अंतर्गत 7302498 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैले बाघ अभ्यारण में 602.798 वर्ग किमी. का मुख्य क्षेत्र और 127.4518 वर्ग किमी. का बफर क्षेत्र इसमें शामिल है। इसकी एक सीमा उत्तराखंड से तो पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से लगती है। यही नहीं दुधवा और शाहजहांपुर की तरफ भी इसकी सीमा लगती है। 00 कई विलुप्त प्रजातियां का संसार हैं यहां हिरनों की सात में पांच प्रजातियों समेत कई लुप्तप्राय प्रजातियों वाले पीटीआर में स्तनधारियों की 13 प्रजातियां और नौ किस्म के पक्षियों और सरीसृप की 11 प्रजातियों वाले पीटीआर की तमाम वन्यजीव मौजूद हैं। यहां हर तरफ सीमा क्षेत्र को लेकर ईएसजेड तय कर दिया गया है। यहां प्रदूषण उत्पन्न करने वाले कारकों को मंजूरी नहीं दी जाएगी। 00 कौन सी सीमा पर कितनी परिधि पीलीभीत से उत्तराखंड सीमा 0 किमी. पीलीभीत से नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा 0 किमी. पीलीभीत से शाहजहांपुर एक किमी. पीलीभीत जिले में आने वाला टाइगर रिजर्व दो किमी. क्षेत्र तय किया है। 00 मानको का पालन कराएंगे पीटीआर के ईएसजेड क्षेत्र में ध्वनि, वायु मानव निर्मित संरचनाओं का प्रदूषण बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा। होटल या रिजॉर्ट आदि को लेकर मानकों का पालन कराया जाएगा। साथ ही कुल 41 बिंदुओं पर गजट में अनुमति जारी की गई है। ताकि सख्ती से पालन कराया जा सके। जो अनाधिकृत निर्माण हैं उनको रडार पर लिया जाएगा। - मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर।

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