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पीलीभीत से छोटी रेल लाइन का सफर अब खत्म

सवा सौ साल से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचा रही छोटी रेल लाइन की ट्रेनें बुधवार से अतीत हो गई। बुधवार को पीलीभीत स्टेशन से दोपहर दो बजे शाहजहांपुर को आखिरी ट्रेन रवाना हुई। इसके एक घंटा बाद स्टेशन से मैलानी को आखिरी ट्रेन रवाना की गई। सवा सौ साल पुराने इन रेल खंडों पर अपने अंतिम सफर पर निकली यह ट्रेनें भारतीय रेल इतिहास के पन्नों में अमर हो गई।

आमान परिवर्तन के लिए इन रेल खंडों पर गुरुवार से ब्लाक ले लिया जाएगा।पीलीभीत को छोटी रेल लाइन की सौगात ब्रिटिश काल में मिली। अंग्रेजों ने वर्ष 1886 से 1891 तक लखनऊ से सीतापुर,लखीमपुर, गोला गोकर्णनाथ होते हुए पीलीभीत तक छोटी रेल लाइन बिछाई। बरेली से भोजीपुरा और भोजीपुरा से पीलीभीत तक वर्ष 1884 में छोटी रेल लाइन बिछा दी गई थी। इस तरह अक्टूर 1884 से अप्रैल 1891 तक पीलीभीत छोटी रेल लाइन से लखनऊ और बरेली से जुड़ गया।

निमार्ण कार्य पूरा होते ही इस रेलखंड पर मीटर गेज की ट्रेनों का संचालन भी शुरू कर दिया गया। फरवरी 1991 में पीलीभीत से बीसलपुर तक और अप्रैल 1912 में पीलीभीत से टनकपुर तक भी अंगे्रजों ने छोटी रेल लाइन बिछा दी। इन रेल खंडों पर छोटी रेल लाइन की टे्रनों का संचालन शुरू होने से पीलीभीत स्टेशन जंक्शन बन गया और इससे जिले को भी पहचान मिली। छोटी रेल लाइन से जिले को मिली यह पहचान आमान परिवर्तन के चलते पिछले कुछ सालोें से सिमट रही थी पर बुधवार को पीलीभीत से मैलानी और शाहजहांपुर को रवाना की गई आखिरी ट्रेनों के साथ यह पहचान अतीत बन गई।

आखिरी ट्रेन में सफर को ट्रेन चालक से यात्री तक उत्सुकपीलीभीत रेलवे स्टेशन से बुधवार को मैलानी और शाहजहांपुर को छोटी रेल लाइन की आखिरी ट्रेने रवाना हुई तो इनमें सफर को सभी उत्सुक रहे। स्टेशन से दोपहर दो बजे शाहजहांपुर को ट्रेन संख्या 52233 रवाना हुई। इस आखिरी ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी मुख्य चालक सईद अहमद, सहायक चालक रामकृष्ण मिना और गार्ड बसंत कुमार के पास रही। चालक दल यह सदस्य स्टेशन से रवाना होने वाली ऐतिहासिक ट्रेन का हिस्सा बनने पर खासा उत्साहित रहे। इनके साथ ही इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों में भी गजब का उत्साह देखने को मिला।

ट्रेन के रवाना होने के मौके पर डीआरएम के पीआरओ राजेन्द्र कुमार सिंह, स्टेशन अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह सहित स्टेशन का अधिकांश स्टाफ मौजूद रहा। सभी इस पल को अपने लिए यादगार लम्हा बताया। शाहजहांपुर को ट्रेन रवाना होने के एक घंट बाद तीन बजे पीलीभीत-मैलानी छोटी रेल लाइन पर भी आखिरी ट्रेन को रवाना किया गया। 52221 नंबर की इस ट्रेने को पायलट एसके तिवारी और गार्ड जीडी बाधवा ले गए। इस ट्रेन के रवाना होने पर चालक दल के सदस्यों के साथ ही यात्रियों को भी स्टेशन के रेल कर्मियों ने हाथ हिलाकर विदा किया।

शाहजहांपुर ट्रैक का निरीक्षण करने पहुंचे डीआरएमपीलीभीत-मैलानी और शाहजहांपुर मीटर गेज लाइन पर ट्रेनों के संचालन के आखिरी दिन का जायजा लेने डीआरएम दिनेश कुमार सिंह सुबह ही कार से स्टेशन पहुंच गए। स्टेशन का निरीक्षण करने के बाद वह शाहजहांपुर ट्रैक का निरीक्षण करने ट्रेन से ही रवाना हो गए। उन्होंने इस ट्रैक पर चल रहे ब्राडगेज के निर्माण कार्यों का जायजा लिया और निर्माण विभाग के अधिकारियों से कार्य की प्रगति के बारे में पूछा।

एक साल में ब्राडगेज होने की संभावनापीलीभीत-मैलानी और पीलीभत-शाहजहांपुर रेल खंड पर ब्राडगेज निर्माण कार्य की जिम्मेदारी रेलवे की ही निर्माण एजेंसी आरवीएनएल के पास है। आरवीएनएल ही लखनऊ तक ब्राडगेज निर्माण कार्य करा रही है। लखनऊ से मैलानी तक ब्राडगेज का कार्य अधिकांश पूरा हो चुका है। मैलानी से पीलीभीत ट्रैक पर भी कार्य तेजी से कराया जा रहा है। गुरुवार से दोनों रेलखंड पर ब्लाक शुरू हो जाएगा। इसके बाद आमान परिवर्तन के काम में और भी तेजी आ जाएगी। इस संबंध में डीआरएम के पीआरओ राजेन्द्र सिंह ने बताया कि एक साल में दोनों रेलखंड पर बीजी का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद वर्ष 2019 में दोनों रेल खंड पर ब्राडगेज की ट्रेनों का संचालन हो जाएगा।

यह भी जानें- 15 नवंबर 1886 को पूरा लखनऊ-सीतापुर रेल खंड का निर्माण कार्य- 15 अप्रैल 1887 को पूरा हुआ सीतापुर से लखीमपुर तक लाइन बिछाने का काम- 15 दिसंबर 1887 को पूरा हो गया लखीमपुर से गोला गोकर्णनाथ तक मीटर गेज का काम- 10 अप्रैल 1891 को गोला से पीलीभीत तक बिछ गई छोटी रेल लाइन- 15 नवंबर 1884 को भोजीपुरा से पीलीभीत तक पूरा हुआ लाइन बिछाने का काम- 12 अक्टूबर 1884 को पूरा हुआ भोजीपुरा से बरेली के बीच छोटी लाइन का काम

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  • Web Title:Pilibhit's journey to the small rail line is over now